नई दिल्ली। अगर आप इस साल कोई नई पेट्रोल या डीजल गाड़ी खरीदने का सोच रहे हैं, तो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का यह बयान आपके लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने सोमवार को एक उद्योग कार्यक्रम में साफ शब्दों में कह दिया एक बात बिल्कुल तय है पेट्रोल और डीजल इंजन का कोई भविष्य नहीं है।
यह बयान महज एक राय नहीं है। इसके पीछे सरकार की एक बड़ी तैयारी है जो आने वाले कुछ महीनों में आपकी गाड़ी, आपके पेट्रोल पंप और आपकी जेब सब पर असर डालने वाली है।
गडकरी ने क्या कहा
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ऑटोमोबाइल उद्योग को सीधा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल दोनों ही दो बड़ी समस्याएं खड़ी करते हैं पहला, ये विदेश से मंगाने पड़ते हैं जिससे देश का पैसा बाहर जाता है। दूसरा, इनसे निकलने वाला धुआं पर्यावरण को बर्बाद कर रहा है।
उन्होंने वाहन निर्माताओं से कहा कि वे बायोफ्यूल, बायोगैस, हाइड्रोजन और इथेनॉल जैसे स्वच्छ ईंधनों की ओर तेजी से बढ़ें।
गडकरी ने यह भी कहा कि उद्योग को कीमत के पीछे नहीं भागना चाहिए गुणवत्ता पहले होनी चाहिए।
अभी आपकी गाड़ी में क्या चल रहा है?
इस वक्त देशभर के पेट्रोल पंपों पर E20 फ्यूल बिक रहा है। यानी हर 100 लीटर पेट्रोल में 20 लीटर इथेनॉल मिला होता है। सरकार ने यह 1 अप्रैल 2026 से अनिवार्य कर दिया है।
इथेनॉल क्या है ?
यह गन्ने के रस, मक्का, चावल और खराब अनाज से बनाई जाने वाली एक जैव-शराब है जो पेट्रोल में मिलाने पर इंजन को साफ रखती है और विदेश से मंगाने वाले तेल की जरूरत कम करती है।
नवंबर 2025 तक भारत की कुल इथेनॉल उत्पादन क्षमता 1,990 करोड़ लीटर प्रतिवर्ष तक पहुंच चुकी है। यानी देश के पास इतना इथेनॉल बनाने की ताकत है कि आगे के लक्ष्य पूरे किए जा सकें।
E25 दिल्ली मुंबई से होगी शुरुआत
सरकार अब अगला कदम उठाने जा रही है। जल्द ही E25 फ्यूल का पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा यानी 25 प्रतिशत इथेनॉल और 75 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण।
इसकी शुरुआत दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई और बेंगलुरु के चुनिंदा पेट्रोल पंपों से होगी।
E25 अभी सभी पुरानी गाड़ियों में नहीं डाला जा सकता। इसके लिए फ्लेक्स फ्यूल इंजन की जरूरत होगी जो किसी भी मात्रा में इथेनॉल मिले पेट्रोल पर चल सके।
आगे E85 और E100 का रास्ता
सरकार की योजना यहीं नहीं रुकती। ईरान-अमेरिका तनाव के चलते होर्मुज जलसंधि पर संकट है और कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी है। इसी को देखते हुए सरकार E85 फ्यूल की अनुमति के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जल्द जारी कर सकती है।
E85 का मतलब है 85 प्रतिशत इथेनॉल और सिर्फ 15 प्रतिशत पेट्रोल। और 2030 तक का लक्ष्य है E100 यानी शुद्ध इथेनॉल पर गाड़ी चलाना।
Toyota किर्लोस्कर के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी ने कहा फ्लेक्स फ्यूल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक देश के रूप में हम आयात पर निर्भर नहीं रहेंगे।"
माइलेज घटेगी कितना नुकसान होगा?
यह वह सवाल है जो हर गाड़ी मालिक पूछ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक इथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में ऊर्जा कम होती है। इसलिए जितना ज्यादा इथेनॉल, उतना कम माइलेज। S&P ग्लोबल के निदेशक पुनीत गुप्ता के अनुसार E85 पर चलने वाली गाड़ी का माइलेज 20 से 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
लेकिन इसकी भरपाई इथेनॉल की कम कीमत से होगी। अगर इथेनॉल, पेट्रोल से काफी सस्ता मिले तो कुल खर्च घट सकता है।
हाइड्रोजन गडकरी का असली दांव
गडकरी ने इथेनॉल से भी आगे की बात कही। उन्होंने कहा — "हाइड्रोजन ही भविष्य का ईंधन है।"
सरकार ने 10 रूटों पर हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रक और बसें पहले ही शुरू कर दिए हैं। टाटा मोटर्स, अशोक लेलैंड, महिंद्रा और वोल्वो ये सभी कंपनियां हाइड्रोजन वाहनों के परीक्षण में लगी हैं।
हाइड्रोजन इंजन से निकलता क्या है? सिर्फ पानी — एक भी जहरीला धुआं नहीं। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है।
किसानों को क्या मिलेगा ?
इथेनॉल की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा फायदा किसानों को होगा। भारत में मक्का से बनने वाले इथेनॉल का उत्पादन नौ गुना बढ़कर 286 करोड़ लीटर हो गया है। इससे उन किसानों की आय बढ़ रही है जो गन्ने की खेती नहीं करते। उत्तर प्रदेश, बिहार और कर्नाटक जैसे राज्यों में मक्का उगाने वाले किसानों को अब इथेनॉल उद्योग से सीधी खरीद का लाभ मिल रहा है।
आपकी पुरानी गाड़ी का क्या होगा ?
यह सबसे जरूरी सवाल है। E20 पर सभी 2023 के बाद बनी गाड़ियां चल सकती हैं। E25 के लिए कुछ पुरानी गाड़ियों में दिक्कत आ सकती है। E85 के लिए फ्लेक्स फ्यूल इंजन चाहिए — जो Toyota, Maruti और TVS जैसी कंपनियां अब बनाने लगी हैं।
गडकरी ने साफ किया कि पुरानी गाड़ियां E20 पर चलती रहेंगी फिलहाल कोई जबरदस्ती नहीं है। लेकिन आने वाले समय में नई गाड़ियां खरीदते वक्त फ्लेक्स फ्यूल इंजन को प्राथमिकता देना समझदारी होगी।
अब देखना यह है.
भारत ने E20 का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया मई 2025 में ही 19.8 प्रतिशत मिश्रण का राष्ट्रीय औसत पार हो गया। यह एक बड़ी कामयाबी है।
लेकिन E85 और E100 की राह में सबसे बड़ी चुनौती है पेट्रोल पंपों पर अलग से इथेनॉल के पंप लगाना, इथेनॉल उत्पादन को और बढ़ाना, और आम आदमी को माइलेज के नुकसान की भरपाई देना।
जिस दिन हाइड्रोजन स्टेशन उतनी तादाद में खुल जाएंगे जितने आज पेट्रोल पंप हैं उस दिन गडकरी की यह चेतावनी सच साबित हो जाएगी। और जो लोग उस बदलाव के लिए तैयार नहीं होंगे उनकी गाड़ी सड़क पर तो होगी, लेकिन भविष्य में नहीं।