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100% एथेनॉल की तैयारी क्या खत्म होने वाला है पेट्रोल-डीजल का दौर? जानें नितिन गडकरी का पूरा मास्टरप्लान

100% एथेनॉल की तैयारी क्या खत्म होने वाला है पेट्रोल-डीजल का दौर? जानें नितिन गडकरी का पूरा मास्टरप्लान

क्या वह समय करीब है जब आपकी गाड़ी पेट्रोल के बजाय पूरी तरह से खेती से निकले ईंधन पर दौड़ेगी? केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के होलिया बयानों ने तो कुछ ऐसा ही संकेत दिया है। भारत अब केवल 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) पर रुकने वाला नहीं है, बल्कि देश अब 100 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग की तरफ कदम बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।

नितिन गडकरी का विजन साफ है—विदेशी तेल पर निर्भरता खत्म करना और भारत के किसान को 'ऊर्जादाता' बनाना। आइए जानते हैं कि भारत के इस बड़े कदम से आपकी जेब और गाड़ियों पर क्या असर पड़ेगा।

वेस्ट एशिया का तनाव और भारत की चिंता

हाल ही में आयोजित 'ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉन्क्लेव' में नितिन गडकरी ने वैश्विक परिस्थितियों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वेस्ट एशिया (मध्य पूर्व) में चल रहे युद्ध और तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई चेन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। भारत अपनी जरूरत का लगभग 87 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिस पर हर साल देश के खजाने से करीब 22 लाख करोड़ रुपये खर्च हो जाते हैं।

गडकरी का मानना है कि जब तक हम ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर नहीं होंगे, तब तक वैश्विक संकट हमारे बजट को बिगाड़ते रहेंगे। इसीलिए 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक जरूरत बन चुकी है।

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E20 से 100% तक का सफर ब्राजील है मिसाल

भारत ने साल 2023 में E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल मिश्रण) लॉन्च करके एक बड़ी उपलब्धि हासिल की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार कह चुके हैं कि एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से भारत ने तेल आयात में भारी बचत की है।

गडकरी ने ब्राजील का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां 100 प्रतिशत एथेनॉल का इस्तेमाल सफलतापूर्वक हो रहा है। भारत में भी टाटा, टोयोटा और सुजुकी जैसी कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल इंजनों पर काम कर रही हैं। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि मौजूदा वाहनों में थोड़े बहुत तकनीकी बदलाव के साथ उन्हें एथेनॉल पर चलाया जा सकता है और इससे इंजन की उम्र पर भी बुरा असर नहीं पड़ता।

CAFE III नियम और भविष्य की गाड़ियां

अगले साल 1 अप्रैल से लागू होने वाले CAFE III (Corporate Average Fuel Efficiency) नियमों को लेकर भी गडकरी ने स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि इन कड़े नियमों का इलेक्ट्रिक और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में ऑटोमोबाइल कंपनियों को ऐसे इंजन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा जो पूरी तरह से ग्रीन फ्यूल पर चल सकें। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार किसी को जबरदस्ती पेट्रोल-डीजल वाहन छोड़ने के लिए मजबूर नहीं करेगी, लेकिन विकल्प इतने बेहतर होंगे कि लोग खुद बदलाव की ओर बढ़ेंगे।

ग्रीन हाइड्रोजन $1 प्रति किलो का लक्ष्य

नितिन गडकरी केवल एथेनॉल तक ही सीमित नहीं हैं। उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य का असली ईंधन बताया। भारत का लक्ष्य ग्रीन हाइड्रोजन की उत्पादन लागत को कम करके 1 डॉलर प्रति किलो तक लाना है। गडकरी के अनुसार, यदि हम इस लागत को हासिल कर लेते हैं, तो भारत तेल आयात करने वाले देश से बदलकर ऊर्जा निर्यात करने वाला देश (Energy Exporter) बन जाएगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हाइड्रोजन का उत्पादन कचरे से किया जाना चाहिए, जिससे 'सर्कुलर इकॉनमी' को बढ़ावा मिलेगा और लाखों नए रोजगार पैदा होंगे।

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पेट्रोलियम लॉबिंग और ऑटो कंपनियों को चुनौती

सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों और आशंकाओं पर गडकरी ने बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने संकेत दिया कि पेट्रोलियम सेक्टर से जुड़े कुछ लोग एथेनॉल ब्लेंडिंग के खिलाफ लॉबिंग कर रहे हैं और भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने ऑटोमोबाइल कंपनियों से अपील की कि वे केवल लागत (Cost) कम करने के पीछे न भागें, बल्कि क्वालिटी पर ध्यान दें। गडकरी का मानना है कि जब भारतीय कंपनियों के पास वर्ल्ड-क्लास क्वालिटी होगी, तभी हम ग्लोबल मार्केट पर राज कर पाएंगे।

क्या पेट्रोल-डीजल का दौर वाकई खत्म हो रहा है ?

यह सवाल आज हर गाड़ी मालिक के मन में है। गडकरी के विजन को देखें तो संकेत साफ हैं कि फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) का अंत नजदीक है। प्रदूषण को कम करने और देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए बायो-फ्यूल, इलेक्ट्रिक वाहन और हाइड्रोजन ही एकमात्र रास्ता हैं।

जब गाड़ियां कचरे, पराली और गन्ने से बने एथेनॉल पर चलेंगी, तो इसका सबसे बड़ा फायदा देश के किसानों को होगा। पैसा विदेशों में जाने के बजाय भारत के गांवों और खेतों तक पहुंचेगा

नितिन गडकरी का 100% एथेनॉल का सपना भारत को एक नई पहचान दिलाने वाला है। यह केवल पर्यावरण बचाने की मुहिम नहीं है, बल्कि भारत की आर्थिक आजादी की लड़ाई है। आने वाला समय 'फ्लेक्स इंजनों' और 'ग्रीन फ्यूल' का है, जहाँ तेल के कुओं की चाबी खाड़ी देशों के पास नहीं, बल्कि भारत के किसानों के हाथ में होगी।

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