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देश पहले, बाकी सब बाद में जब राशिद खान ने भारत और ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता को ठुकरा दिया

देश पहले, बाकी सब बाद में जब राशिद खान ने भारत और ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता को ठुकरा दिया

क्रिकेट की दुनिया में जब भी जादुई लेग स्पिन की बात होती है, तो जुबां पर सबसे पहला नाम राशिद खान का आता है। मैदान पर अपनी गुगली से दुनिया के बड़े-बड़े बल्लेबाजों के स्टंप उखाड़ने वाले राशिद ने हाल ही में एक ऐसा खुलासा किया है जिसने पूरे क्रिकेट जगत का दिल जीत लिया है। अक्सर खिलाड़ी बेहतर सुविधाओं और पैसों के लिए दूसरे देशों की नागरिकता ले लेते हैं, लेकिन राशिद खान ने इसके उलट एक ऐसी मिसाल पेश की है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए सबक है।

सोमवार, 20 अप्रैल को रिलीज होने वाली उनकी नई बायोग्राफी राशिद खान: फ्रॉम स्ट्रीट टू स्टारडम’ (लेखक: मोहम्मद हानद जफर) में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि राशिद को क्रिकेट की दो महाशक्तियों—भारत और ऑस्ट्रेलिया—से नागरिकता का ऑफर मिला था, जिसे उन्होंने अपने देश के प्यार के लिए ठुकरा दिया।

"वतन नहीं तो कुछ भी नहीं" – राशिद की दो टूक

किताब के अनुसार, राशिद खान से जब इन बड़े देशों ने संपर्क किया और उन्हें अपने देश की तरफ से खेलने का प्रलोभन दिया, तो राशिद का जवाब बहुत सीधा और दिल को छू लेने वाला था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा:

"अगर मैं अपने वतन अफगानिस्तान के लिए नहीं खेलूंगा, तो मैं दुनिया के किसी भी दूसरे देश के लिए मैदान पर नहीं उतरूंगा।"

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यह बयान उस वक्त आया है जब अफगानिस्तान एक कठिन दौर से गुजर रहा है। राशिद ने साबित कर दिया कि एक खिलाड़ी के लिए उसकी जर्सी पर लगा देश का झंडा किसी भी सुख-सुविधा से कहीं ज्यादा कीमती होता है।

BCCI अधिकारी का वो गुप्त प्रस्ताव

किताब में एक बेहद दिलचस्प वाकये का जिक्र है जो आईपीएल के दौरान का है। राशिद, जो फिलहाल IPL 2026 में गुजरात टाइटंस का अहम हिस्सा हैं, बताते हैं कि एक बार टीम के ही एक अधिकारी ने उनसे कहा कि बीसीसीआई (BCCI) के एक बहुत बड़े पदाधिकारी उनसे निजी तौर पर मिलना चाहते हैं।

मुलाकात के दौरान उस अधिकारी ने राशिद से कहा, "आपके देश (अफगानिस्तान) के हालात फिलहाल बहुत नाजुक हैं। आप भारत आ जाइए, हम आपको यहीं की नागरिकता और सारे जरूरी दस्तावेज (Documents) दिलवा देंगे। आप यहीं रहिए और भारत के लिए क्रिकेट खेलिए।" राशिद कहते हैं कि वह उस समय हैरान रह गए थे, लेकिन उन्होंने मुस्कुराते हुए बहुत ही विनम्रता से इस ऑफर को यह कहकर मना कर दिया कि उनका वजूद उनके देश से है।

जब पूरा भारत चाह रहा था 'राशिद भाई' को अपना बनाना

यह किस्सा साल 2018 का है, जब राशिद खान सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के लिए खेल रहे थे। कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खिलाफ एक मैच में उन्होंने सिर्फ 10 गेंदों पर 34 रन बनाए और 3 विकेट चटकाए। उनकी उस जादुई परफॉर्मेंस के बाद सोशल मीडिया पर एक अलग ही लहर दौड़ गई थी।

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हजारों भारतीय फैंस ने ट्विटर (अब X) पर तत्कालीन विदेश मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज को टैग करना शुरू कर दिया और मांग की कि "राशिद खान को भारत की नागरिकता दे दी जाए।" यह शायद पहली बार था जब किसी विदेशी खिलाड़ी के लिए भारतीयों का प्यार इस कदर उमड़ा था। उस समय सुषमा स्वराज ने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया था कि नागरिकता का मामला गृह मंत्रालय का है, लेकिन उन्होंने राशिद के खेल की सराहना जरूर की थी।

अफगान राष्ट्रपति का वो ऐतिहासिक जवाब

जब भारत में राशिद को नागरिकता देने की मांग उठी, तो अफगानिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अशरफ गनी भी चुप नहीं रहे। उन्होंने ट्विटर पर जवाब देते हुए लिखा था कि "राशिद खान अफगानिस्तान की शान हैं और हम उन्हें किसी भी कीमत पर किसी दूसरे देश को नहीं सौंपेंगे।" इसके बाद राशिद ने भी राष्ट्रपति का शुक्रिया अदा किया था और दोहराया था कि वह अपनी आखिरी सांस तक अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व करेंगे।

 गलियों से क्रिकेट के शिखर तक

इस किताब में सिर्फ नागरिकता के किस्से ही नहीं हैं, बल्कि यह राशिद के उस संघर्ष को भी दिखाती है जिसने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुँचाया है। अफगानिस्तान के अशांत माहौल में बड़े हुए राशिद ने बचपन में प्लास्टिक की गेंदों से टेप लगाकर गेंदबाजी सीखी थी। उनके परिवार के कई सदस्य उनके क्रिकेट खेलने के खिलाफ थे, लेकिन उनकी मेहनत और जुनून ने सबको झुकने पर मजबूर कर दिया।

आज राशिद खान सिर्फ एक गेंदबाज नहीं हैं, बल्कि वह अफगानिस्तान के करोड़ों युवाओं के लिए 'उम्मीद की किरण' हैं। उनकी इस बायोग्राफी में यह भी बताया गया है कि कैसे उन्होंने दुनिया भर की टी20 लीग्स (IPL, BBL, PSL) में अपनी धाक जमाई, लेकिन कभी भी अपने मूल (Roots) को नहीं भूले।

क्यों खास है यह खुलासा ?

आजकल के 'फ्रीलांस' क्रिकेट के दौर में, जहाँ खिलाड़ी अपने बोर्ड से कॉन्ट्रैक्ट तोड़कर लीग क्रिकेट को तरजीह देते हैं, वहाँ राशिद खान का यह कदम एक बहुत बड़ा संदेश देता है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देश, जहाँ की नागरिकता पाना दुनिया भर के लोगों का सपना होता है, उसे ठुकराना कोई छोटी बात नहीं है।

20 अप्रैल को रिलीज होने वाली यह किताब हर क्रिकेट प्रेमी के लिए एक मस्ट-रीड (जरूर पढ़ने वाली) है। यह हमें बताती है कि राशिद खान सिर्फ अपनी 'रॉन्ग-वन' या 'फ्लिपर' के कारण महान नहीं हैं, बल्कि वह अपने चरित्र और अपनी मिट्टी के प्रति अपनी वफादारी के कारण एक सच्चे लेजेंड हैं। राशिद का यह फैसला उन सभी के लिए एक मिसाल है जो सफलता मिलते ही अपने जड़ों को भूल जाते हैं।

 

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