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अंडमान के समंदर से आई बड़ी खुशखबरी! भारत को मिला गैस का नया खजाना

अंडमान सागर में ऑयल इंडिया लिमिटेड को प्राकृतिक गैस का नया भंडार मिला है। विजयपुरम-3 कुएं में हुई यह खोज भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है।
अंडमान के समंदर से आई बड़ी खुशखबरी! भारत को मिला गैस का नया खजाना

नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर जारी कूटनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बेकाबू होती कीमतों के बीच भारत ने ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक बहुत बड़ी और रणनीतिक सफलता हासिल की है. भारत सरकार की प्रतिष्ठित नवरत्न तेल कंपनी 'ऑयल इंडिया लिमिटेड' (OIL) ने अंडमान ऑफशोर बेसिन (Andaman Offshore Basin) में प्राकृतिक गैस (Natural Gas) के एक नए और समृद्ध भंडार की खोज की है. यह खोज भारत के लिए ऐसे नाजुक समय में हुई है जब मिडिल ईस्ट के गंभीर तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण पूरी दुनिया में ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर गहरी चिंताएं बनी हुई हैं.

इस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण खोज की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ऑयल इंडिया लिमिटेड की पूरी टीम को इस बड़ी उपलब्धि के लिए बधाई दी है. सरकार का मानना है कि समंदर की गहराइयों में मिला यह नया गैस भंडार भारत के घरेलू ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने और विदेशी आयातों पर निर्भरता कम करने की दिशा में 'अमृत काल' का एक बेहद महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा.

श्री विजयपुरम-3 कुएं में मिली सफलता; समंदर में इतनी गहराई पर हुई खोज

ऑयल इंडिया लिमिटेड द्वारा शेयर बाजारों को दी गई आधिकारिक फाइलिंग के मुताबिक, कंपनी को यह बड़ी सफलता अपने तीसरे एक्सप्लोरेटरी वेल (खोज के लिए खोदे गए कुएं), जिसका नाम 'विजयपुरम-3' (Shri Vijayapuram-3) रखा गया है, में हाइड्रोकार्बन की खोज के दौरान मिली है. इस विशेष कुएं की खुदाई भारत सरकार की ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (OALP) के तहत आवंटित 'AN-OSHP-2018/1' ब्लॉक के अंतर्गत की गई थी.

भौगोलिक स्थिति और तकनीकी बारीकियों की बात करें तो यह कुआँ अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर समंदर के भीतर स्थित है. यहाँ पानी की गहराई करीब 355 मीटर है, जिसके नीचे बेहद जटिल और आधुनिक ड्रिलिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर इस प्रोजेक्ट को अंजाम दिया गया है. कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि समंदर के नीचे इओसीन फॉर्मेशन (Eocene Formation) में 1,900 मीटर से अधिक की गहराई पर जब शुरुआती प्रोडक्शन टेस्टिंग की गई, तो लगातार हुई फ्लेयरिंग (गैस के जलने की प्रक्रिया) के जरिए वहाँ प्रचुर मात्रा में नेचुरल गैस की मौजूदगी की शत-प्रतिशत पुष्टि हो गई.

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Andaman Gas Discovery: खोज से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण तथ्य

  • रणनीतिक खोज: ऑयल इंडिया को अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से 15 किमी दूर समंदर में मिली प्राकृतिक गैस.
  • तकनीकी स्थान: 355 मीटर गहरे पानी में, इओसीन फॉर्मेशन के भीतर 1900 मीटर से अधिक की गहराई पर मिला भंडार.
  • लगातार फ्लेयरिंग: शुरुआती प्रोडक्शन टेस्टिंग के दौरान लगातार फ्लेयरिंग होने से हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी प्रमाणित हुई.
  • दूसरी बड़ी कामयाबी: सितंबर 2025 में 'विजयपुरम-2' में गैस मिलने के बाद इसी ब्लॉक में यह दूसरी लगातार बड़ी सफलता है.
  • एक्सपर्ट्स की मदद: इस खोज के बाद अब भारत ग्लोबल डीप-वॉटर एक्सप्लोरेशन एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर आगे की बड़ी रणनीतियां बनाएगा.

प्रेशर बढ़ने के बाद अब गैस सैंपलिंग और लैब टेस्टिंग का काम शुरू

ऑयल इंडिया के इंजीनियर्स और वैज्ञानिकों के अनुसार, इस कुएं में परफोरेशन (छेद करने की प्रक्रिया) के तुरंत बाद ही प्राकृतिक रूप से प्रोडक्शन शुरू हो गया था. सबसे सकारात्मक संकेत यह रहा कि ऑपरेशन शुरू होने के कुछ ही समय के भीतर कुएं के अंदर दबाव (Pressure) तेजी से बढ़ने लगा, जो इस बात का सीधा प्रमाण है कि नीचे गैस का एक बड़ा और सक्रिय रिजर्व मौजूद है.

वर्तमान में कंपनी के विशेषज्ञ इस कुएं से लगातार गैस सैंपलिंग (Gas Sampling) कर रहे हैं. इस सैंपलिंग के जरिए गैस के सटीक कंपोजिशन (रासायनिक संरचना), उसकी कैलोरीफिक वैल्यू (ऊर्जा उत्पादन क्षमता) और उसके ओरिजिन (उत्पत्ति के स्रोत) का पता लगाया जा रहा है. ऑयल इंडिया का कहना है कि शुरुआती वैज्ञानिक आकलन के अनुसार, यह खोज मौजूदा प्रॉस्पेक्ट में सोर्स, माइग्रेशन पाथवे और हाइड्रोकार्बन के भारी जमाव की मौजूदगी का एक बेहद ठोस और अहम संकेत है. इस डेटा की मदद से कंपनी को भविष्य के गहरे समुद्री एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम की सटीक रणनीति बनाने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी.

"अंडमान सागर में ऊर्जा के अवसरों का एक नया भंडार खुला है! यह बताते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि ऑयल इंडिया लिमिटेड द्वारा अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से 15 किमी दूर खोदे गए 'श्री विजयपुरम-3' एक्सप्लोरेटरी वेल में प्राकृतिक गैस मिली है। यह खोज हमें ग्लोबल डीप-वॉटर एक्सप्लोरेशन एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर अपने लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।"

— हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री, भारत सरकार

अंडमान ब्लॉक में ऑयल इंडिया की लगातार दूसरी बड़ी सफलता

भारतीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए यह इसलिए भी एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट है क्योंकि इस शैलो ऑफशोर ब्लॉक (कम गहरे समुद्री ब्लॉक) में हाइड्रोकार्बन और गैस मिलने का यह लगातार दूसरा बड़ा मामला है. इससे पहले सितंबर 2025 में ऑयल इंडिया को इसी ब्लॉक के 'विजयपुरम-2' नामक एक्सप्लोरेटरी वेल में भी नेचुरल गैस का एक बड़ा भंडार हाथ लगा था.

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पहले कुएं की बड़ी सफलता के बाद कंपनी वहाँ पहले से ही एक विस्तृत अप्रेजल प्रोग्राम (मूल्यांकन कार्यक्रम) चला रही है. इसके लिए ब्लॉक में उपलब्ध पुराने 2D सिस्मिक डेटा की रीप्रोसेसिंग का काम पूरा किया जा चुका है और साथ ही अतिरिक्त 600 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र का आधुनिक 3D सिस्मिक डेटा भी अधिग्रहित कर लिया गया है. वर्तमान में इस सिस्मिक डेटा की प्रोसेसिंग और इंटरप्रिटेशन (व्याख्या) का काम युद्धस्तर पर चल रहा है, जिसके तुरंत बाद कंपनी यहाँ कई और अप्रेजल कुएं खोदकर कमर्शियल प्रोडक्शन की अंतिम रूपरेखा तैयार करने वाली है.

वैश्विक मंच पर भारत की बदलती साख और डीप-वॉटर रणनीतियां

इस नई खोज के बाद भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में मजबूती से खड़ा हो रहा है जिनके पास अपने समुद्रों में गहरे पानी के भीतर (Deep-Water) तेल और गैस की खोज करने की मजबूत क्षमता है. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बयान से साफ है कि इस खोज से मिलने वाले उत्साहजनक नतीजों के बाद भारत अब दुनिया के शीर्ष डीप-वॉटर एक्सप्लोरेशन एक्सपर्ट्स और ग्लोबल कंपनियों को अंडमान बेसिन में निवेश और तकनीकी साझेदारी के लिए आमंत्रित करेगा.

आने वाले समय में यदि इन दोनों कुओं (विजयपुरम-2 और विजयपुरम-3) से कमर्शियल उत्पादन शुरू होता है, तो भारत को न केवल अपनी घरेलू सीएनजी (CNG) और पीएनजी (PNG) की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी, बल्कि देश के भारी उद्योगों और बिजली संयंत्रों के लिए भी ईंधन की लागत काफी कम हो जाएगी. यह खोज निश्चित रूप से भारत की आर्थिक संप्रभुता और ऊर्जा सुरक्षा को एक नया और बेहद सुरक्षित सुरक्षा कवच प्रदान करने जा रही है.

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