राजधानी दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क (Public Transport Network) को पर्यावरण-अनुकूल, आधुनिक और विश्वस्तरीय बनाने के लिए दिल्ली सरकार और दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (DTC) ने दो बेहद महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है। करीब डेढ़ दशक (15 वर्ष) के लंबे अंतराल के बाद डीटीसी एक बार फिर लंबी दूरी के अंतरराज्यीय (Inter-State) रूटों पर अपनी धाक जमाने के लिए अत्याधुनिक लग्जरी वोल्वो (Volvo) और स्क्रैच-प्रतिरोधी आरामदेह बसें उतारने जा रही है।
इसके साथ ही, दिल्ली के भीतरी और बाहरी इलाकों में 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' को मजबूत करने और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव योजना (PM E-DRIVE Scheme) के तहत डीटीसी के बेड़े में 2,800 नई एयर-कंडीशन्ड लो-फ्लोर प्योर इलेक्ट्रिक बसें शामिल की जा रही हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह के नेतृत्व में इस वृहद परिवहन सुधार योजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है।
16 साल बाद अंतरराज्यीय रूटों पर DTC की वापसी क्यों बंद हुई थी सेवा?
डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन के अनुसार, वर्ष 2010 में दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) के दौरान प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने डीटीसी के पूरे बेड़े को सीएनजी (CNG) में तब्दील कर दिया था। उस समय पड़ोसी राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और पंजाब) के राजमार्गों पर सीएनजी फिलिंग स्टेशनों का नेटवर्क न के बराबर था। ईंधन की इसी किल्लत और तकनीकी व्यावहारिकताओं के कारण डीटीसी को अपनी बेहद लोकप्रिय इंटर-स्टेट बस सेवाओं को पूरी तरह बंद करना पड़ा था।
तब से लेकर अब तक डीटीसी की बसें केवल दिल्ली-एनसीआर की सीमाओं तक ही सीमित थीं, जिससे निजी बस ऑपरेटरों का एकाधिकार हो गया था और वे त्योहारों व वीकेंड पर मनमाना किराया वसूलते थे। डीटीसी की नई वोल्वो बस सेवा शुरू होने से आम जनता को निजी ऑपरेटरों की लूट से मुक्ति मिलेगी और किफायती दर पर सुरक्षित व समयबद्ध यात्रा का विकल्प मिलेगा।
वेट-लीज मॉडल पर सीएनजी और डीजल वोल्वो बसें
चूंकि लंबी दूरी के इंटर-स्टेट रूटों (जैसे 400 से 600 किमी) पर वर्तमान तकनीकी सीमाओं के कारण इलेक्ट्रिक बसें नहीं चलाई जा सकती हैं, इसलिए डीटीसी इन रूटों पर सीएनजी और बीएस-6 मानक वाले डीजल ईंधन से चलने वाली 12-मीटर लंबी हाई-टेक वोल्वो बसें चलाएगी। इन बसों को वेट-लीज मॉडल पर लाया जा रहा है, जिन्हें डीटीसी के चालकों और परिचालकों द्वारा संचालित किया जाएगा। यात्रियों की सुरक्षा के लिए इनमें सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन, जीपीएस ट्रैकिंग और रियल-टाइम पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी।
इन प्रमुख रूटों पर वोल्वो बसें चलाने की तैयारी
परिवहन विभाग ने शुरुआती चरण के सर्वे और परमिट की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया है। इन लग्जरी बसों को देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक, पर्यटन और व्यावसायिक केंद्रों से जोड़ा जाएगा:
- धार्मिक मार्ग (Faith Centers): दिल्ली से प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या (उत्तर प्रदेश), दिल्ली से कटरा वैष्णो देवी (जम्मू-कश्मीर) और राजस्थान के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल खाटू श्याम।
- पहाड़ी व पर्यटन मार्ग: दिल्ली से उत्तराखंड के ऋषिकेश, हरिद्वार व देहरादून तथा हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला।
- व्यावसायिक व औद्योगिक शहर: उत्तर प्रदेश के लखनऊ, बरेली और मुरादाबाद; राजस्थान के जयपुर और अलवर; तथा पंजाब के चंडीगढ़ और अमृतसर।
इसके अतिरिक्त, दिल्ली में रहने वाले पूर्वांचली प्रवासियों की भारी संख्या को देखते हुए दिल्ली सरकार उत्तर प्रदेश व बिहार परिवहन विभाग के साथ भी बातचीत कर रही है, जिससे दिल्ली से बिहार के प्रमुख शहरों के लिए लंबी दूरी की स्लीपर व वोल्वो बसों का सुचारू संचालन शुरू किया जा सके। वर्तमान में केवल दिल्ली से नेपाल (काठमांडू) के बीच 'भारत-नेपाल मैत्री बस सेवा' के तहत डीटीसी की वोल्वो बस का सफल संचालन किया जा रहा है, जिसका किराया ₹2815 प्रति यात्री है।
पीएम ई-ड्राइव योजना दिल्ली में शामिल होंगी 2800 नई इलेक्ट्रिक बसें
अंतरराज्यीय वोल्वो सेवाओं के समानांतर, दिल्ली के शहरी और ग्रामीण परिवहन को पूरी तरह हरित (Green Transport) बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय की नई ₹10,900 करोड़ की पीएम ई-ड्राइव (प्रधानमंत्री इलेक्ट्रिक ड्राइव रेवोलुशन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट) योजना के तहत 2,800 नई वातानुकूलित लो-फ्लोर शुद्ध इलेक्ट्रिक बसों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इस फ्लीट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह घनी आबादी वाले संकरे इलाकों और मुख्य मार्गों दोनों की परिवहन आवश्यकताओं को संतुलित रूप से पूरा कर सके:
| बस की श्रेणी / लंबाई | बसों की संख्या | रणनीतिक उपयोग और रूट लक्ष्य |
|---|---|---|
| 09-मीटर इलेक्ट्रिक बसें | 1,400 बसें | लोकल और फीडर परिवहन, संकरे मार्ग और घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्रों में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए। |
| 12-मीटर इलेक्ट्रिक बसें | 1,400 बसें | मुख्य ट्रंक रूटों, चौड़े राजमार्गों और उच्च यात्री घनत्व वाले शहरी कॉरिडोर पर सुचारू संचालन के लिए। |
| आगामी चरण (07-मीटर बसें) | 500 बसें | पीएम ई-ड्राइव फेज-2 के तहत सुदूर ग्रामीण और कम सुविधा वाले उपनगरीय इलाकों के फीडर नेटवर्क के लिए। |
वर्ष 2028-29 तक 14,000 बसों का मेगा विजन
वर्तमान में, दिल्ली में लगभग 6,300 बसें संचालित हो रही हैं, जिनमें से 4,300 शुद्ध इलेक्ट्रिक बसें (EV Buses) हैं। यह वर्तमान में देश के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक बस बेड़ों में से एक है। परिवहन विभाग का लक्ष्य इस साल (2026) के अंत तक इस संख्या को बढ़ाकर 7,500 इलेक्ट्रिक बसों तक पहुंचाना है।
दिल्ली सरकार ने वित्तीय वर्ष 2028-29 तक सार्वजनिक परिवहन बेड़े की कुल संख्या को बढ़ाकर 14,000 बसों तक पहुंचाने का दीर्घकालिक लक्ष्य रखा है। इसके अगले चरण में 3,330 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसों को शामिल करने की योजना पर भी समानांतर काम चल रहा है। इस बड़े पैमाने पर होने वाले विद्युतीकरण (Electrification) को सुचारू बनाए रखने के लिए दिल्ली के सभी प्रमुख बस डिपो में अत्याधुनिक हाई-पावर चार्जिंग और आवश्यक बिजली बुनियादी ढांचे (Power Infrastructure) का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है।
परिवहन मंत्रालय का मानना है कि इन पहलों से न केवल निजी वाहनों पर जनता की निर्भरता कम होगी, बल्कि वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन और पीएम 2.5 व पीएम 10 के स्तर में बड़ी कटौती होगी, जिससे दिल्ली की वायु गुणवत्ता (AQI) में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया जा सकेगा।