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सीतापुर में बनेगा 250 MW सोलर प्लांट राजनाथ सिंह की मंजूरी सेना को मिलेगी 24x7 ग्रीन बिजली

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीतापुर कैंटोनमेंट की 850 एकड़ रक्षा भूमि पर 250 MW सोलर पावर प्रोजेक्ट और बैटरी स्टोरेज सिस्टम को मंजूरी दी है। यह रक्षा मंत्रालय का पहला बड़े पैमाने का सोलर-प्लस-स्टोरेज प्रोजेक्ट होगा।
सीतापुर में बनेगा 250 MW सोलर प्लांट राजनाथ सिंह की मंजूरी सेना को मिलेगी 24x7 ग्रीन बिजली

नई दिल्ली: भारतीय रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर और ऊर्जा के मामले में सुरक्षित बनाने की दिशा में मंगलवार को एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। केंद्रीय रक्षा मंत्री (Defence Minister) राजनाथ सिंह ने उत्तर Pradesh (यूपी) के सीतापुर में एक विशाल 250 मेगावाट (MW) के सोलर पावर प्रोजेक्ट की स्थापना को हरी झंडी दे दी है। इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि इसमें एक इंटीग्रेटेड बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) भी शामिल होगा। यह रक्षा मंत्रालय (MoD) द्वारा अपनी खाली पड़ी सैन्य भूमि (Defence Land) पर स्थापित किया जाने वाला देश का पहला इतना बड़ा और आधुनिक ग्रिड-स्केल सोलर-प्लस-स्टोरेज प्रोजेक्ट है। इस फैसले से न केवल भारतीय सेना के प्रतिष्ठानों को चौबीसों घंटे क्लीन एनर्जी मिलेगी, बल्कि कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में भी मदद मिलेगी।

 क्या है सीतापुर सोलर प्रोजेक्ट का पूरा मामला और सरकारी आदेश?

रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह महत्वाकांक्षी सौर ऊर्जा परियोजना उत्तर प्रदेश के सीतापुर में स्थित पुराने कैंटोनमेंट (Sitapur Cantonment) की लगभग 850 एकड़ खाली पड़ी रक्षा भूमि पर विकसित की जाएगी। काफी समय से खाली पड़ी इस सरकारी जमीन का इस्तेमाल अब देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में 250 मेगावाट क्षमता के सोलर पैनलों के साथ-साथ 'बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम' (BESS) को भी जोड़ा गया है। बैटरी स्टोरेज होने का फायदा यह होता है कि दिन के समय सूरज की रोशनी से बनने वाली अतिरिक्त बिजली को स्टोर कर लिया जाता है, जिसका इस्तेमाल रात के समय या आपातकालीन परिस्थितियों में सेना के बेस और दफ्तरों में बिजली सप्लाई के लिए किया जा सकता है।

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इस प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन (Implementation) की जिम्मेदारी देश की दिग्गज सरकारी बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड (NTPC Limited) को सौंपी गई है। एनटीपीसी इस पूरे प्रोजेक्ट को एक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया (Competitive Bidding Process) के जरिए आगे बढ़ाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि सबसे कम और किफायती दरों पर बिजली का उत्पादन किया जा सके, जिससे रक्षा प्रतिष्ठानों को महंगी बिजली से पूरी तरह राहत मिल सके। यह पूरा प्रोजेक्ट एनटीपीसी, रक्षा मंत्रालय (सेना के एकीकृत मुख्यालय) और रक्षा संपदा महानिदेशालय (DGDE) के आपसी समन्वय और देखरेख में समय सीमा के भीतर पूरा किया जाएगा।

रक्षा क्षेत्र में ग्रीन एनर्जी का इतिहास और पिछले 3-5 वर्षों का डेटा

पिछले पांच वर्षों में, भारतीय रक्षा बलों (Indian Armed Forces) ने अपनी परिचालन लागत को कम करने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) को अपनाने की रफ्तार तेज की है। इससे पहले, मिलिट्री स्टेशन्स और दूर-दराज के फॉरवर्ड पोस्ट्स पर बिजली की जरूरतों के लिए भारी मात्रा में डीजल जनरेटरों (DG Sets) पर निर्भर रहना पड़ता था, जो काफी खर्चीला भी था और पर्यावरण के लिए भी नुकसानदेह था।

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साल 2021 से 2025 के बीच, रक्षा मंत्रालय ने देश के अलग-अलग कैंटोनमेंट क्षेत्रों में छोटे स्तर के रूफटॉप सोलर पैनल (Rooftop Solar) लगाने की शुरुआत की थी। लेकिन, उन प्रोजेक्ट्स के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि वे सिर्फ धूप रहने तक ही बिजली दे पाते थे। ग्रिड में बिना बैटरी स्टोरेज के बड़ी मात्रा में सोलर पावर को संभालना मुश्किल हो रहा था। यही कारण है कि साल 2026 में सरकार ने अपनी रणनीति बदलते हुए 'सोलर विद बैटरी स्टोरेज' (BESS) को प्राथमिकता दी है। नीचे दी गई तालिका से आप भारत के रक्षा क्षेत्र में हो रहे इस बड़े बदलाव की रूपरेखा को समझ सकते हैं:

पैरामीटर / विशेषता पुराना मॉडल (पिछले 3-5 साल) नया सीतापुर मॉडल (साल 2026)
प्रोजेक्ट का स्केल (Scale) छोटे रूफटॉप और 1-5 MW के छोटे ग्राउंड माउंटेड प्लांट 250 मेगावाट (MW) का मेगा यूटिलिटी स्केल प्लांट
जमीन का इस्तेमाल सीमित और बिखरी हुई जमीनों या छतों पर उपयोग एक साथ 850 एकड़ खाली कैंटोनमेंट भूमि का सर्वोत्तम उपयोग
पावर बैकअप तकनीक बैटरी स्टोरेज नहीं था, रात में ग्रिड या डीजल पर निर्भरता इंटीग्रेटेड बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) का सपोर्ट
मुख्य विकासकर्ता (Developer) स्थानीय वेंडर और छोटे ठेकेदार NTPC Limited (प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से)

 रक्षा प्रतिष्ठानों और आम व्यवस्था पर इस प्रोजेक्ट का क्या असर पड़ेगा?

सीतापुर में लगने वाले इस विशाल सोलर प्लांट का असर सिर्फ बिजली उत्पादन तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके कई दूरगामी और रणनीतिक फायदे होने वाले हैं। रक्षा मंत्रालय ने इसके मुख्य प्रभावों को रेखांकित किया है, जिन्हें हम निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझ सकते हैं:

  • लॉन्ग-टर्म एनर्जी सिक्योरिटी (दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा): मिलिट्री बेस और रक्षा प्रतिष्ठानों को अपनी संवेदनशील गतिविधियों के लिए बिना किसी रुकावट के चौबीसों घंटे बिजली की जरूरत होती है। पारंपरिक ग्रिड फेल होने की स्थिति में भी यह बैटरी स्टोरेज सिस्टम सेना को निर्बाध बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
  • बिजली के खर्च में भारी बचत: वर्तमान में रक्षा मंत्रालय को पारंपरिक थर्मल पावर और ग्रिड बिजली के लिए हर साल करोड़ों रुपये का भुगतान करना पड़ता है। खुद की जमीन पर 250 MW का सोलर प्लांट लग जाने से बिजली उत्पादन की लागत बहुत कम हो जाएगी, जिससे सरकारी खजाने और रक्षा बजट में भारी बचत देखने को मिलेगी।
  • खाली पड़ी सार्वजनिक संपत्तियों का सही इस्तेमाल: देश भर में फैली कई रक्षा संपत्तियां और पुराने कैंटोनमेंट की जमीनें सालों से खाली पड़ी थीं, जिन पर अतिक्रमण का भी खतरा बना रहता था। इस 850 एकड़ भूमि पर सोलर हब बनने से सार्वजनिक संपत्ति का सबसे बेहतरीन और सुरक्षित इस्तेमाल सुनिश्चित हो गया है।
  • राष्ट्रीय रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों में योगदान: भारत सरकार ने साल 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन (Non-fossil fuel) से 500 गीगावाट (GW) बिजली उत्पादन का राष्ट्रीय लक्ष्य रखा है। रक्षा मंत्रालय का यह कदम देश को इस ग्रीन गोल के और करीब ले जाएगा।

 आगामी टाइमलाइन और भविष्य की रूपरेखा

अधिकारियों के मुताबिक, सीतापुर का यह प्रोजेक्ट रक्षा क्षेत्र में क्लीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक रोल मॉडल (Benchmark) साबित होने वाला है। रक्षा मंत्री की मंजूरी मिलने के बाद अब इस प्रोजेक्ट के टेंडर और बिडिंग की प्रक्रिया को NTPC द्वारा जल्द ही लाइव कर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले कुछ महीनों में इसके लिए डेवलपर का चयन कर जमीनी स्तर पर काम शुरू करा दिया जाए।

इस प्रोजेक्ट की सफलता के बाद, रक्षा मंत्रालय (MoD) देश के अन्य राज्यों में स्थित विशाल और खाली पड़ी मिलिट्री जमीनों पर भी इसी तरह के सोलर-प्लस-स्टोरेज प्रोजेक्ट्स की शृंखला शुरू करने की योजना बना रहा है। आने वाले समय में यह तकनीक रक्षा क्षेत्र को ग्रिड के मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर (Atmanirbhar) बना देगी, जिससे बाहरी ग्रिड पर सेना की निर्भरता लगभग शून्य हो जाएगी। सभी हितधारक (Stakeholders) इस प्रोजेक्ट को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए एक साझा कार्यबल (Task Force) के रूप में काम कर रहे हैं।

 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सवाल 1: सीतापुर में मंजूर किए गए सोलर प्रोजेक्ट की कुल क्षमता कितनी है? जवाब 1: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा मंजूर किए गए इस नए सोलर पावर प्रोजेक्ट की कुल क्षमता 250 मेगावाट (MW) है, जिसके साथ एक आधुनिक बैटरी स्टोरेज सिस्टम भी जोड़ा जाएगा।

सवाल 2: यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश में कितनी जमीन पर और कहां बनाया जा रहा है? जवाब 2: यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश के सीतापुर में स्थित पुराने कैंटोनमेंट (Sitapur Cantonment) की लगभग 850 एकड़ खाली पड़ी रक्षा भूमि (Defence Land) पर विकसित किया जाएगा।

सवाल 3: इस प्रोजेक्ट को पूरा करने और बिजली बेचने की जिम्मेदारी किस कंपनी को मिली है? जवाब 3: इस सौर ऊर्जा परियोजना को लागू करने और इसकी प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया को संचालित करने की जिम्मेदारी भारत सरकार की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी NTPC Limited को दी गई है।

सवाल 4: सोलर प्रोजेक्ट के साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) लगाने का क्या फायदा है? जवाब 4: BESS तकनीक का फायदा यह है कि यह दिन के समय सूरज से बनने वाली बिजली को स्टोर कर लेती है, जिससे रात के समय या आपातकाल में भी बिना किसी रुकावट के रक्षा प्रतिष्ठानों को लगातार ग्रीन बिजली की सप्लाई मिलती रहती है।

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