बेंगलुरु: भारत की आईटी राजधानी बेंगलुरु अक्सर अपनी ट्रैफिक समस्याओं और अनोखी घटनाओं के लिए खबरों में रहती है। लेकिन हाल ही में एक ऐसी घटना सामने आई जिसने सड़क नियमों, टोल टैक्स के कानूनों और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर एक नई बहस छेड़ दी है। मामला एक साइकिल सवार से टोल टैक्स वसूलने की कोशिश का है, जिसका वीडियो अब इंटरनेट पर आग की तरह फैल रहा है।
क्या है पूरा मामला ? (The Incident)
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक वीडियो क्लिप में देखा जा सकता है कि एक युवक, जो संभवतः 'ऑल इंडिया टूर' पर निकला है, अपनी साइकिल के साथ टोल प्लाजा की 'टू-व्हीलर' लेन में खड़ा है। वहां तैनात टोल कर्मचारी उससे 25 रुपये के टोल टैक्स की मांग करता है।
हैरान कर देने वाली बात यह थी कि जब साइकिल सवार ने कर्मचारी से उस नियम या गाइडलाइन की मांग की जिसमें साइकिल से टोल लेने का प्रावधान हो, तो कर्मचारी के पास कोई लिखित जवाब नहीं था। बहस बढ़ने पर कर्मचारी ने युवक को केवल इतना कहा— "साइकिल साइड में लगाओ!" और रास्ता साफ करने को कहा। हालांकि, युवक ने पैसे नहीं दिए और अपनी साइकिल साइड से निकाल ली, लेकिन इस पूरी घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या वाकई साइकिल पर टोल लगता है? (Legal Aspect)
आमतौर पर भारत में टोल टैक्स की वसूली National Highways Fee (Determination of Rates and Collection) Rules, 2008 के तहत की जाती है। इन नियमों के अनुसार:
NHAI के मानक: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अंतर्गत आने वाले लगभग सभी नेशनल हाईवे पर दोपहिया वाहनों (Bikes), तिपहिया वाहनों और साइकिलों को टोल टैक्स से पूरी तरह छूट दी गई है।
बोर्ड पर क्या लिखा था? वायरल वीडियो में टोल प्लाजा के पास लगे रेट कार्ड पर 'User Fee Two Wheeler' के सामने 25 रुपये (सिंगल ट्रिप) लिखा था। कानूनन, 'टू-व्हीलर' की श्रेणी में मोटर चालित वाहन (जैसे बाइक या स्कूटर) आते हैं, न कि शारीरिक शक्ति से चलने वाली साइकिल।
प्राइवेट और स्टेट हाईवे का पेंच: कुछ एक्सप्रेसवे या फ्लाईओवर्स (जैसे बेंगलुरु का इलेक्ट्रॉनिक सिटी एलीवेटेड टोलवे) 'स्पेशल पर्पज व्हीकल' के तहत आते हैं। यहाँ कुछ निजी नियम लागू हो सकते हैं, लेकिन उनमें भी साइकिल से टैक्स वसूलना लगभग असंभव और अतार्किक है।
सुरक्षा बनाम अधिकार एक और नजरिया
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो धड़ों में बंट गए हैं। जहाँ एक तरफ लोग टोल कर्मचारी की 'जबरन वसूली' की निंदा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बेंगलुरु के स्थानीय निवासियों ने साइकिल सवार की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।
हाई-स्पीड रूट्स का खतरा: बेंगलुरु के कई फ्लाईओवर्स और एक्सप्रेसवे पर वाहनों की न्यूनतम गति सीमा तय होती है। यहाँ गाड़ियाँ 80 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ती हैं। ऐसे में साइकिल जैसे धीमी गति वाले वाहन का वहां होना न केवल साइकिल सवार के लिए, बल्कि पीछे से आ रहे तेज रफ्तार वाहनों के लिए भी जानलेवा हो सकता है।
क्या साइकिल वहां प्रतिबंधित थी? कई यूजर्स ने दावा किया कि जिस फ्लाईओवर पर यह घटना हुई, वहां साइकिल और पैदल यात्रियों का प्रवेश कानूनी रूप से वर्जित (Prohibited) है। अगर ऐसा है, तो सवाल यह उठता है कि साइकिल सवार वहां तक पहुँचा कैसे और कर्मचारी ने उसे सुरक्षा की चेतावनी देने के बजाय पैसे क्यों मांगे?
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का सैलाब
एक्स (X) पर सूरज कुमार बौद्ध नामक यूजर ने इस वीडियो को साझा करते हुए लिखा कि "साइकिलों पर टोल टैक्स की लूट हो रही है।" उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को भी टैग किया। हालांकि, वीडियो की बारीकियों को देखने वाले लोगों ने सुधार किया कि युवक ने पैसे नहीं दिए थे।
एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, "बेंगलुरु के इलेक्ट्रॉनिक सिटी फ्लाईओवर पर साइकिल चलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। टोल मांगना गलत हो सकता है, लेकिन वहां साइकिल लेकर जाना उससे भी बड़ी गलती है। नियमों की जानकारी सिर्फ टोल के लिए नहीं, जान बचाने के लिए भी होनी चाहिए।
यह घटना स्पष्ट करती है कि भारत में सड़क नियमों को लेकर अभी भी स्पष्टता की कमी है। अगर साइकिल प्रतिबंधित थी, तो कर्मचारी को उसे वहां से वापस भेजना चाहिए था, न कि टैक्स मांगना चाहिए था। दूसरी ओर, 'कंटेंट' बनाने या एडवेंचर के चक्कर में साइकिल सवारों को भी अपनी और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।