यूएस-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) से तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसने भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस संकट के बीच भारत की सरकारी तेल रिफाइनर कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) को अपनी कच्चे तेल के आयात की रणनीति में लगभग हर दिन बदलाव (Recalibrating) करना पड़ रहा है। BPCL के चेयरमैन संजय खन्ना ने बताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण कंपनी अब सालाना अनुबंधों (Annual Contracts) के बजाय स्पॉट मार्केट (तत्काल बाजार) से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने पर मजबूर हो गई है।
रिफाइनरियों को 115% क्षमता पर चलाने की चुनौती
दरअसल, कंपनी ने वित्त वर्ष 2026/27 के लिए अपनी जरूरत का 55% तेल सालाना कॉन्ट्रैक्ट्स के जरिए मुख्य रूप से मध्य पूर्व के देशों से मंगाने की योजना बनाई थी। लेकिन खाड़ी के कई सप्लायर्स द्वारा 'फोर्स मेज्योर' (आपूर्ति असमर्थता) घोषित किए जाने के बाद कंपनी को रिफाइनरियों को 115% की पूरी क्षमता पर चलाने के लिए स्पॉट खरीदारी बढ़ानी पड़ी है। वर्तमान में BPCL भारत में तीन रिफाइनरियां संचालित करती है, जिनकी कुल क्षमता 706,000 बैरल प्रति दिन तेल प्रोसेस करने की है।
मौजूदा समय में भारत अपनी तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी हद तक रूसी कच्चे तेल पर निर्भर है:
- सप्लाई शेयर: BPCL अपनी कुल जरूरत का करीब 40% से 45% हिस्सा रूसी तेल से पूरा कर रहा है, जिसे अमेरिकी छूट के बाद मुख्य रूप से स्पॉट मार्केट से खरीदा जा रहा है।
- घटती छूट: कंपनी के फाइनेंस डायरेक्टर वेत्सा रामकृष्ण गुप्ता के मुताबिक, पहले ब्रेंट क्रूड के मुकाबले रूस से मिलने वाली 10 से 12 डॉलर प्रति बैरल की छूट अब घटकर केवल 5 से 6 डॉलर रह गई है।
पेट्रोल-डीजल पर भारी घाटा और घरेलू कीमतें
इस कम होते डिस्काउंट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मचे हड़कंप का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर भी दिख रहा है। भारत में एक ही हफ्ते के भीतर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में दो बार बढ़ोतरी की जा चुकी है। इसके बावजूद, तेल कंपनियों का घाटा कम नहीं हो रहा है। इसके साथ ही, ईंधन की मजबूत घरेलू मांग के चलते BPCL ने चौथी तिमाही में बिना किसी असाधारण मद के 86.07 अरब रुपये ($892 मिलियन) का शुद्ध लाभ भी दर्ज किया है।
वैल्यू-एडिशन डेटा तेल कंपनियों का रेवेन्यू लॉस और मार्केट के ताजा आंकड़े
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में आए उतार-चढ़ाव और घरेलू तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को हो रहे नुकसान का पूरा ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| ईंधन / क्रूड का प्रकार | ताजा रेट / अंतरराष्ट्रीय स्तर | कंपनियों को घाटा (प्रति लीटर) / डिस्काउंट | सप्लाई की मौजूदा स्थिति और कारण |
|---|---|---|---|
| डीजल (Diesel) | घरेलू खुदरा बाजार में बढ़ा | ₹25 से ₹30 का घाटा | घरेलू स्तर पर कीमतें बढ़ाने के बाद भी प्रति लीटर भारी राजस्व नुकसान जारी है। |
| पेट्रोल (Petrol) | घरेलू खुदरा बाजार में बढ़ा | ₹10 से ₹14 का घाटा | एक हफ्ते में दो बार दाम बढ़ाने के बावजूद घाटा कम नहीं हो रहा है। |
| ब्रेंट क्रूड (Brent July) | $111.28 प्रति बैरल | 82 सेंट की गिरावट (-0.73%) | यूएस-ईरान वार्ता में प्रगति के चलते सोमवार के रिकॉर्ड स्तर से मामूली नरमी आई। |
| यूएस क्रूड (WTI June) | $107.77 प्रति बैरल | 89 सेंट की गिरावट (-0.82%) | जून का कॉन्ट्रैक्ट मंगलवार को समाप्त हो गया, जुलाई का कॉन्ट्रैक्ट $104.15 पर है। |
| रूसी क्रूड (Russian Oil) | स्पॉट मार्केट निर्भरता | $5 से $6 प्रति बैरल छूट | पहले मिलने वाला $10 से $12 का डिस्काउंट अब आधा रह गया है। |
अमेरिका-ईरान बातचीत से कच्चे तेल की कीमतों में मामूली नरमी
दूसरी तरफ, अंतरराष्ट्रीय बाजार से तेल की कीमतों को लेकर थोड़ी राहत भरी खबर आई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) के एक बयान के बाद मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। वेंस ने व्हाइट扩展 की ब्रीफिंग में संवाददाताओं को बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत में काफी प्रगति हुई है और दोनों में से कोई भी पक्ष दोबारा सैन्य कार्रवाई नहीं चाहता है। इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी जानकारी दी थी कि उन्होंने मंगलवार को होने वाले संभावित सैन्य हमलों को फिलहाल टाल दिया है।
पब्लिक इम्पैक्ट (आम जनता और उपभोक्ताओं पर क्या असर होगा?)
अंतरराष्ट्रीय तेल संकट और सरकारी कंपनियों की इस स्थिति का सीधा असर देश की जनता के बजट पर पड़ने जा रहा है:
- पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और तेजी की आशंका: चूंकि BPCL को पेट्रोल पर ₹14 और डीजल पर ₹30 तक का अंडर-रिकवरी (राजस्व घाटा) उठाना पड़ रहा है, ऐसे में आने वाले दिनों में तेल कंपनियां इस घाटे की भरपाई के लिए खुदरा कीमतों में और बढ़ोतरी कर सकती हैं।
- माल ढुलाई और महंगाई में बढ़ोतरी: डीजल की कीमतों में एक हफ्ते में दो बार हुई बढ़ोतरी के कारण देश भर में लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई महंगी हो जाएगी, जिससे फल, सब्जियां और रोजमर्रा का जरूरी सामान आम जनता के लिए और महंगा हो सकता है।
- सऊदी अरब की पाइपलाइन पर नजर: यदि सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता पूरी तरह बहाल होती है और वहां से कांट्रैक्टेड सप्लाई सुधरती है, तो भारतीय कंपनियों का घाटा कम हो सकता है, जिससे खुदरा कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है।
वैश्विक तेल संकट और चीनी रिफाइनरियों पर पड़ा असर
ईरान युद्ध के कारण दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री जलमार्ग 'स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) व्यावहारिक रूप से पूरी तरह बंद है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार, इस जलमार्ग से दुनिया की कुल तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई का लगभग पांचवां (1/5th) हिस्सा गुजरता है, जिसके ब्लॉक होने से इतिहास का सबसे बड़ा तेल आपूर्ति संकट खड़ा हो गया है। इस वैश्विक संकट का असर चीन पर भी साफ देखा जा सकता है, जहां कच्चे तेल की कमी और खराब मार्जिन के चलते चीनी सरकारी रिफाइनरियों ने अपने तेल उत्पादन में 10 लाख बैरल प्रति दिन से अधिक की भारी कटौती कर दी है, जो घटकर अब केवल 84 लाख बैरल प्रति दिन रह गया है।