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CBSE OSM Controversy किसी की कॉपी बदली, किसी के पैसे कटे छात्रों ने खोली सिस्टम की पोल

CBSE OSM Controversy किसी की कॉपी बदली, किसी के पैसे कटे छात्रों ने खोली सिस्टम की पोल

सीबीएसई बोर्ड के 10वीं और 12वीं रिजल्ट 2026 के बाद अब नया विवाद सामने आया है। इस बार विवाद छात्रों के नंबरों को लेकर नहीं बल्कि CBSE के नए OSM यानी On Screen Marking System को लेकर खड़ा हो गया है। हजारों छात्रों ने री-एवोल्यूशन, वेरिफिकेशन और स्कैन कॉपी डाउनलोड के दौरान भारी तकनीकी समस्याओं की शिकायत की है।

किसी छात्र का पेमेंट फेल हो गया, किसी के खाते से दो बार पैसे कट गए, तो कई छात्रों का आवेदन सफल ही नहीं दिखा। सोशल मीडिया पर छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ता गया, जिसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने SBI, Bank of Baroda, Canara Bank और Indian Bank के अधिकारियों के साथ बैठक कर साफ कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े सिस्टम में तकनीकी लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

क्या है CBSE का OSM Digital Marking System?

CBSE ने इस साल कॉपियों की जांच के लिए On Screen Marking System लागू किया। इसका मकसद कॉपी चेकिंग को ज्यादा पारदर्शी, तेज और त्रुटिरहित बनाना था।

इस सिस्टम में छात्र पहले की तरह कागज पर ही परीक्षा देते हैं, लेकिन उनकी उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल रूप में कंप्यूटर स्क्रीन पर चेक किया जाता है।

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पहले शिक्षक को पूरी कॉपी मिलती थी जिसमें छात्र का नाम और रोल नंबर भी दिखाई देता था। लेकिन नए सिस्टम में पहला पेज हटा दिया जाता है ताकि शिक्षक को यह पता ही न चले कि कॉपी किस छात्र की है।

OSM सिस्टम की खास बातें:
  • कॉपियों की डिजिटल स्कैनिंग होती है
  • टीचर कंप्यूटर स्क्रीन पर कॉपी चेक करते हैं
  • नाम और रोल नंबर छिपा दिए जाते हैं
  • मार्किंग स्कीम स्क्रीन पर पहले से मौजूद रहती है
  • सिस्टम खुद टोटल मार्क्स जोड़ता है
  • हर पेज चेक किए बिना कॉपी सबमिट नहीं होती

फिर विवाद क्यों शुरू हुआ?

CBSE का दावा था कि नया सिस्टम गड़बड़ियों को खत्म करेगा, लेकिन परिणाम आने के बाद उल्टा छात्रों की शिकायतें बढ़ने लगीं।

सबसे बड़ा विवाद तब हुआ जब कुछ छात्रों ने दावा किया कि री-चेकिंग के दौरान उन्हें जो स्कैन कॉपी दिखाई गई, वह उनकी थी ही नहीं। सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हो गया।

इसके अलावा छात्रों ने पोर्टल क्रैश, पेमेंट फेलियर, खराब स्कैन क्वालिटी और आवेदन स्टेटस अपडेट न होने जैसी समस्याओं की भी शिकायत की।

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समस्या छात्रों की शिकायत
पेमेंट फेल फीस जमा होने के बाद भी आवेदन पूरा नहीं हुआ
डबल पेमेंट एक ही आवेदन के लिए दो बार पैसे कट गए
स्कैन कॉपी समस्या धुंधली या गलत कॉपी दिखाई गई
सर्वर डाउन री-चेकिंग पोर्टल बार-बार क्रैश हुआ
रिफंड में देरी कटे हुए पैसे वापस नहीं मिले

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?

लगातार बढ़ते विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़े सरकारी बैंकों के अधिकारियों के साथ हाई लेवल मीटिंग की।

उन्होंने साफ निर्देश दिए कि छात्रों को फीस जमा करने, पेमेंट कन्फर्मेशन और रिफंड जैसी समस्याओं से जल्द राहत दी जाए।

बैठक में यह भी तय किया गया कि अगर किसी छात्र के खाते से अतिरिक्त पैसे कटते हैं तो उनका ऑटोमेटिक रिफंड किया जाए।

सरकार चाहती है कि CBSE का पूरा पेमेंट सिस्टम तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद बने ताकि छात्रों को भविष्य में परेशानी न हो।

क्या OSM सिस्टम वास्तव में फायदेमंद है?

विशेषज्ञों का मानना है कि On Screen Marking System का उद्देश्य सही है। इससे कॉपी जांच में मानवीय गलतियों को कम किया जा सकता है।

पुराने सिस्टम में कई बार टोटलिंग मिस्टेक, पेज छूट जाना या पक्षपात जैसे आरोप लगते थे। नए सिस्टम में इन समस्याओं को कम करने की कोशिश की गई है।

  • टीचर छात्र की पहचान नहीं देख सकता
  • मार्किंग स्कीम फिक्स रहती है
  • कंप्यूटर खुद मार्क्स जोड़ता है
  • हर पेज चेक करना जरूरी होता है
  • रैंडम कॉपियों की दोबारा जांच भी होती है

लेकिन समस्या तकनीकी तैयारी की कमी में दिखाई दे रही है।

छात्रों का सबसे बड़ा डर क्या है?

12वीं बोर्ड परीक्षा के नंबर छात्रों के करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। कॉलेज एडमिशन, स्कॉलरशिप और कई प्रतियोगी परीक्षाओं में बोर्ड मार्क्स अहम भूमिका निभाते हैं।

ऐसे में अगर छात्रों को यह भरोसा ही न रहे कि उनके नंबर सही तरीके से दिए गए हैं, तो पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

कई छात्रों का कहना है कि तकनीकी खराबी का नुकसान उन्हें क्यों भुगतना पड़े? अगर सिस्टम पूरी तरह तैयार नहीं था, तो इसे पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में टेस्ट करना चाहिए था।

क्या CBSE ने जल्दबाजी की?

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बड़े डिजिटल सिस्टम को लागू करने से पहले व्यापक परीक्षण जरूरी होता है।

CBSE ने करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस सिस्टम को सीधे बड़े स्तर पर लागू कर दिया। लेकिन कई स्कूलों में इंटरनेट कमजोर था, कंप्यूटर पर्याप्त नहीं थे और स्कैनिंग क्वालिटी भी खराब बताई गई।

कई शिक्षकों ने भी शिकायत की कि लंबे समय तक स्क्रीन पर कॉपी चेक करने से आंखों पर दबाव बढ़ रहा था।

विशेषज्ञों की राय:
  • पहले छोटे स्तर पर ट्रायल होना चाहिए था
  • स्कूलों की तकनीकी क्षमता जांचनी जरूरी थी
  • स्कैन क्वालिटी बेहतर करनी चाहिए थी
  • सर्वर क्षमता बढ़ानी चाहिए थी
  • छात्रों के लिए हेल्पलाइन मजबूत होनी चाहिए थी

क्या भविष्य में यह सिस्टम बेहतर हो सकता है?

तकनीकी विशेषज्ञ मानते हैं कि सही सुधारों के बाद OSM सिस्टम भविष्य में बेहद सफल साबित हो सकता है।

अगर सर्वर मजबूत किए जाएं, स्कैनिंग क्वालिटी सुधारी जाए और पेमेंट सिस्टम को सुरक्षित बनाया जाए, तो यह सिस्टम बोर्ड परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ा सकता है।

इसके अलावा AI आधारित मॉनिटरिंग और ऑटोमेटिक एरर डिटेक्शन जैसी तकनीकें भी भविष्य में जोड़ी जा सकती हैं।

निष्कर्ष

CBSE का OSM Digital Marking System शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन तकनीकी खामियों ने इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

छात्रों का भविष्य किसी भी सिस्टम से बड़ा होता है। इसलिए जरूरी है कि CBSE जल्द से जल्द इन समस्याओं का समाधान करे और छात्रों का भरोसा वापस जीते।

अब सभी की नजर शिक्षा मंत्रालय और CBSE पर है कि अगली बोर्ड परीक्षाओं से पहले यह सिस्टम कितना मजबूत और भरोसेमंद बनाया जाता है।

Admin Desk

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