नई दिल्ली: राजधानी Delhi में आम लोगों को एक साथ कई मोर्चों पर महंगाई का झटका लगा है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में चार साल बाद बढ़ोतरी हुई है, वहीं CNG और दूध के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं।
बढ़ती कीमतों के खिलाफ दिल्ली कांग्रेस ने शनिवार को राजधानी के कई पेट्रोल पंपों और मदर डेयरी बूथों के बाहर प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार पर “गरीब विरोधी नीतियां” अपनाने का आरोप लगाया।
शुक्रवार से तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी लागू कर दी। इसके साथ ही दिल्ली में CNG ₹2 प्रति किलो महंगी हो गई।
इससे पहले अमूल और मदर डेयरी ने दूध की कीमतों में ₹2 per litre का इजाफा किया था।
महंगाई के इस नए दौर ने दिल्ली के मध्यम वर्ग, नौकरीपेशा लोगों, ऑटो चालकों और रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले लाखों लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
दिल्ली में नए फ्यूल रेट
पेट्रोल, डीजल और CNG की नई कीमतें
| ईंधन | बढ़ोतरी | नई कीमत |
|---|---|---|
| पेट्रोल | ₹3 प्रति लीटर | ₹97.77 प्रति लीटर |
| डीजल | ₹3 प्रति लीटर | ₹90.67 प्रति लीटर |
| CNG | ₹2 प्रति किलो | ₹79.09 प्रति किलो |
दूसरे राज्यों में कितनी बढ़ीं कीमतें?
पेट्रोल की कीमतें
| राज्य | बढ़ोतरी | नई कीमत |
|---|---|---|
| दिल्ली | ₹3 | ₹97.77 |
| महाराष्ट्र | ₹3.14 | ₹106.68 |
| तमिलनाडु | ₹2.83 | ₹103.67 |
| पश्चिम बंगाल | ₹3.29 | ₹108.74 |
डीजल की कीमतें
| राज्य | बढ़ोतरी | नई कीमत |
|---|---|---|
| दिल्ली | ₹3 | ₹90.67 |
| महाराष्ट्र | ₹3.11 | ₹93.14 |
| तमिलनाडु | ₹2.86 | ₹95.25 |
| पश्चिम बंगाल | ₹3.11 | ₹95.13 |
दिल्ली कांग्रेस का प्रदर्शन, बैलगाड़ी पर पहुंचे देवेंद्र यादव
दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव करोल बाग स्थित पेट्रोल पंप पर बैलगाड़ी से पहुंचे। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने चुनाव खत्म होते ही जनता को महंगाई का बड़ा झटका दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि:
- पेट्रोल-डीजल के दाम जानबूझकर बढ़ाए गए
- दूध की कीमतें बढ़ाकर घर का बजट बिगाड़ दिया गया
- सरकार तेल कंपनियों और बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रही है
देवेंद्र यादव ने दावा किया कि 2014 से 2025 के बीच सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों से लगभग ₹43 लाख करोड़ कमाए।
उन्होंने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की औसत कीमतों के हिसाब से देखा जाए तो:
- पेट्रोल लगभग ₹61.60 प्रति लीटर होना चाहिए
- डीजल लगभग ₹56.99 प्रति लीटर होना चाहिए
आखिर अचानक क्यों बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम?
विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध है।
West Asia crisis के कारण:
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया
- Strait of Hormuz में तेल सप्लाई प्रभावित हुई
- भारत का तेल आयात खर्च बढ़ गया
- डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर ₹96 प्रति डॉलर के करीब पहुंच गया
इन सब कारणों से सरकारी तेल कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ा।
तेल कंपनियों को कितना नुकसान हो रहा था?
रिपोर्ट्स के अनुसार IOC, BPCL और HPCL जैसी सरकारी तेल कंपनियां:
- पेट्रोल पर ₹13-15 प्रति लीटर तक घाटा झेल रही थीं
- डीजल पर ₹17-18 प्रति लीटर तक अंडर-रिकवरी हो रही थी
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल ₹3 की बढ़ोतरी से पूरा घाटा नहीं भरेगा और आने वाले समय में कीमतें फिर बढ़ सकती हैं।
आम आदमी पर कितना बढ़ेगा खर्च?
अगर आप रोज 20 किलोमीटर बाइक चलाते हैं
- महीने में लगभग 20-25 लीटर पेट्रोल खर्च
- ₹3 बढ़ने से करीब ₹60-₹75 अतिरिक्त खर्च
अगर कार रोज 40-50 किलोमीटर चलती है
- महीने का खर्च ₹300 से ₹700 तक बढ़ सकता है
CNG वाहन चालकों पर असर
- ऑटो, टैक्सी और कैब ड्राइवरों का रोज का खर्च बढ़ेगा
- आने वाले दिनों में किराया बढ़ सकता है
दूध महंगा होने से रसोई का बजट भी बिगड़ा
अमूल और मदर डेयरी ने दूध ₹2 प्रति लीटर महंगा किया है।
इसका असर:
- चाय-दूध खर्च
- बच्चों के पोषण
- मिठाई और डेयरी प्रोडक्ट्स
- छोटे दुकानदारों
पर सीधे तौर पर पड़ेगा।
दिल्ली के कई परिवारों का कहना है कि:
“पहले बिजली और किराया बढ़ा, अब पेट्रोल और दूध भी महंगा हो गया। हर महीने खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है।”
क्या अब और बढ़ सकते हैं फ्यूल के दाम?
ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक अगर:
- West Asia में तनाव जारी रहा
- कच्चा तेल महंगा बना रहा
- रुपया और कमजोर हुआ
तो आने वाले महीनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
SBI Research और ICRA जैसी एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि:
- महंगाई दर बढ़ सकती है
- ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा
- खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं
- EV और CNG वाहनों की मांग बढ़ सकती है
लगातार बढ़ती फ्यूल कीमतों के बीच अब लोग:
- ज्यादा माइलेज वाली कारें
- CNG वाहन
- Hybrid Cars
- Electric Vehicles (EVs)
की तरफ तेजी से रुख कर सकते हैं।
ऑटो सेक्टर के जानकारों का कहना है कि Tata, Mahindra और Hyundai जैसी कंपनियों को इसका फायदा मिल सकता है क्योंकि लोग कम running cost वाले विकल्प तलाशेंगे।
पिछली बार कब बढ़े थे पेट्रोल-डीजल के दाम?
भारत में आखिरी बार बड़े स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग चार साल पहले हुई थी। उसके बाद सरकार लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखे हुए थी, लेकिन अब वैश्विक संकट और तेल कीमतों में उछाल के कारण फिर बढ़ोतरी करनी पड़ी।
आगे क्या?
फिलहाल दिल्ली में महंगाई का असर सड़क से लेकर रसोई तक साफ दिखाई दे रहा है।
- ऑफिस जाने वालों का खर्च बढ़ेगा
- ट्रांसपोर्ट महंगा होगा
- खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं
- घर का मासिक बजट बिगड़ सकता है
अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में सरकार कीमतों को नियंत्रित कर पाती है या आम जनता को और बड़े झटके के लिए तैयार रहना होगा।