3 मई 2026 की वो रात दिल्ली के विवेक विहार इलाके के लिए किसी काले अध्याय से कम नहीं थी। शाहदरा जिले की एक साधारण सी चार मंजिला रिहायशी इमारत उस रात मौत का घर बन गई। जब तक सुबह की रोशनी फैली, 9 लोग जिंदगी की जंग हार चुके थे, जिनमें डेढ़ साल का एक नन्हा बच्चा भी था।
रात के सन्नाटे में शुरू हुई तबाही
देर रात एक डिलीवरी एजेंट उस इमारत के पास पहुंचा। उसने देखा कि AC के बाहरी हिस्से से चिंगारियां निकल रही हैं। पहले उसे लगा शायद कोई छोटी सी खराबी होगी, लेकिन कुछ ही मिनटों में स्थिति उसके हाथ से निकल गई। आग ने इमारत के पिछले हिस्से से अपना रास्ता बनाना शुरू किया और देखते ही देखते दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल के छह से अधिक फ्लैट इसकी चपेट में आ गए।
रात 3:47 बजे दिल्ली फायर सर्विस को सूचना मिली और एक मिनट बाद पुलिस कंट्रोल रूम को भी कॉल आई। सुबह 5 बजे तक 14 फायर टेंडर मौके पर पहुंच चुके थे लेकिन इमारत की बनावट ने बचाव कार्य को बेहद मुश्किल बना दिया था।
वो खामियां जो जानलेवा बन गईं
इस पूरे हादसे में इमारत की संरचना सबसे बड़ी दुश्मन साबित हुई। पूरी चार मंजिला इमारत में निकलने का सिर्फ एक रास्ता था, वो भी बीच में बनी एक सीढ़ी। जैसे ही आग फैली, यही एकमात्र रास्ता धुएं और लपटों से भर गया। ऊपरी मंजिलों पर सोए लोगों के पास बाहर निकलने का कोई विकल्प नहीं बचा।
हालात और भी बदतर तब हो गए जब रेस्क्यू टीम को पता चला कि एक कमरे में सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम लगा था। शॉर्ट सर्किट होते ही बिजली गई और लॉक जाम हो गया। टीम को लॉक काटकर कमरे में घुसना पड़ा, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बिस्तर पर शव मिले।
इमारत में भरे पड़े फर्नीचर ने आग को और भड़काया। अधिकारियों के मुताबिक फर्नीचर ने ईंधन का काम किया जिससे आग बुझने की बजाय तेजी से फैलती रही। तीन लोगों के शव सीढ़ियों के पास बंद मम्टी में मिले। साफ है कि वो बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे लेकिन रास्ता बंद था।
पांच घंटे का जानलेवा बचाव अभियान
शाहदरा के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि इमारत में आगे और पीछे दोनों तरफ फ्लैट होने की वजह से फायर ब्रिगेड को अंदर घुसने में भारी दिक्कत हुई। पुलिस, ACP, DDMA टीमें, ट्रैफिक पुलिस सब मौके पर थे। करीब 12 से 15 लोगों को DFS ने बचाया। स्थानीय निवासी चरनजीत सिंह के मुताबिक 20 से ज्यादा लोगों को बालकनी से नीचे उतारा गया।
दो महिलाओं ने तीसरी मंजिल से कूदकर जान बचाई। उन्हें मामूली चोटें आईं और गुरु तेग बहादुर अस्पताल में भर्ती कराया गया। सुबह 6:25 बजे आग पर काबू पाया गया और 8 बजे तक पूरी तरह बुझाई गई। इसके बाद जब टीम ने इमारत के अंदर तलाशी ली तो पहली मंजिल से एक, दूसरी मंजिल से पांच और सीढ़ियों के पास से तीन शव बरामद हुए।
कौन थे वो 9 लोग
पुलिस ने मृतकों की पहचान की। पहली मंजिल पर शिखा जैन (45 वर्ष) का शव मिला। दूसरी मंजिल के पिछले हिस्से में अरविंद (60), अनीता जैन (58), निशांत जैन (35), अंचल जैन (33) और डेढ़ साल का एक बच्चा मिला। तीसरी मंजिल पर एक ही परिवार के तीन सदस्य नितिन जैन (50), उनकी पत्नी शैली जैन (48) और बेटे सम्यक जैन (25) की जान गई। नवीन जैन (48) इस हादसे में घायल हुए।
AC ब्लास्ट या शॉर्ट सर्किट असली वजह क्या थी
आधिकारिक तौर पर आग का कारण अभी तय नहीं हुआ है लेकिन सभी शुरुआती सबूत AC की तरफ इशारा करते हैं। डिलीवरी एजेंट ने AC आउटलेट से चिंगारियां देखीं, स्थानीय निवासी रोहित ने AC ब्लास्ट की बात कही। गर्मियों में AC पर लोड बढ़ जाता है, खासकर जब सर्विसिंग नहीं होती और फिल्टर गंदे होते हैं। ओवरलोडेड वायरिंग के साथ यह कॉम्बिनेशन शॉर्ट सर्किट को खुला न्योता देता है।
गर्मी और बिजली के उपकरण एक खतरनाक जोड़
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं है बल्कि एक चेतावनी है। गर्मियों में कई घरेलू उपकरण खतरनाक हो जाते हैं। लगातार चलने वाला AC बिना सर्विस के ओवरहीट होता है। दीवार से सटा फ्रिज वेंटिलेशन नहीं दे पाता और कॉइल गर्म होते हैं। बंद जगह में रखा इनवर्टर और बैटरी गर्मी बाहर नहीं निकाल पाते। एक एक्सटेंशन बोर्ड पर कई उपकरण लगाने से तार पिघल सकते हैं। बिस्तर पर रखा चार्जर घंटों चलते रहने पर आग का कारण बन सकता है।
धुएं की गंध, बार-बार ट्रिप होता सर्किट ब्रेकर या चिंगारी दिखना इन संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
नेताओं ने जताया दुख
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे अत्यंत दुखद घटना बताया और कहा कि सभी वरिष्ठ अधिकारी राहत कार्य में पूरी तत्परता से जुटे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदनाएं जताईं।
जांच जारी सवाल बाकी
फिलहाल पुलिस और फायर डिपार्टमेंट की जांच जारी है। आग का सटीक कारण, इमारत में एकमात्र सीढ़ी और सेंट्रल लॉकिंग जैसी खामियां, ये सब जांच के दायरे में हैं। यह हादसा शहरी इमारतों में अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी का नतीजा है जो बार-बार सामने आता है लेकिन सबक शायद ही लिया जाता है।