दुबई/नई दिल्ली: रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को लेकर वैश्विक गतिरोध एक बार फिर गहरा गया है. ईरान के नवनिर्मित 'परशियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' (PGSA) द्वारा एक नया आधिकारिक नक्शा जारी करने के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ईरान के बीच राजनयिक तल्खी चरम पर पहुंच गई है. इस नक्शे में ईरान ने जलमार्ग के एक विशाल हिस्से पर अपना विनियामक और प्रशासनिक नियंत्रण (Regulatory Control) होने का दावा किया है, जो ईरानी तटों से लेकर यूएई के प्रमुख बंदरगाहों फुजैराह (Fujairah) और उम अल-कुवैन (Umm Al Quwain) तक फैला हुआ है. ईरान की इस नई संस्था ने एलान किया है कि इस क्षेत्र से गुजरने वाले सभी जहाजों को अब अनिवार्य रूप से उनसे पूर्व अनुमति लेनी होगी, जिसे संयुक्त अरब अमीरात ने अपनी समुद्री संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताते हुए खारिज कर दिया है.
ईरान के इस आक्रामक कदम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार डॉ. अनवर गर्गाश ने साफ शब्दों में कहा कि अरब खाड़ी (Arabian Gulf) दशकों से ईरान के इस तरह के व्यवहार से परिचित है. उन्होंने प्राग में आयोजित ग्लोबसेक (GLOBSEC) फोरम में और सोशल मीडिया पर ईरान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उग्र बयानबाजी और दोस्ती के खोखले दावों के बीच तेहरान अपनी साख पूरी तरह खो चुका है. गर्गाश ने दो टूक शब्दों में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित करने या यूएई की संप्रभुता पर अतिक्रमण करने की कोशिशें 'खयाली पुलाव' (Fragments of Dreams) से ज्यादा कुछ नहीं हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल खोखले नारों से भरोसा बहाल नहीं होता, इसके लिए जिम्मेदार भाषा और पड़ोसी देशों के अधिकारों का सम्मान करना जरूरी है.
ग्राउंड फैक्ट्स और अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता की स्थिति
यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के बाद का नाजुक युद्धविराम (Ceasefire) लागू है, लेकिन व्यापक राजनीतिक समाधान को लेकर चल रही बातचीत पूरी तरह अधर में लटकी हुई है. राजनयिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम और प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील देने को लेकर एक अंतिम मसौदा तैयार तो हुआ था, लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन मीडिया रिपोर्टों को महज अटकलें करार दिया है. यूएई के अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सफल होने और होर्मुज जलमार्ग को दोबारा सामान्य यातायात के लिए पूरी तरह खोले जाने की संभावना इस समय केवल 50-50 प्रतिशत ही बची है. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि ईरान इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को अपनी एक घरेलू सुरक्षा चौकी की तरह इस्तेमाल करना चाहता है और गुजरने वाले जहाजों से अवैध 'सुरक्षा शुल्क' या टोल वसूलने की फिराक में है, जिसे वैश्विक शक्तियों ने पूरी तरह अवैध माना है.
विभिन्न देशों पर आर्थिक प्रभाव
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रभावी रूप से बंद होने और ईरान के इस नए प्रशासनिक नियंत्रण के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजारों पर भारी दबाव देखा जा रहा है, जिसका देश-वार प्रभाव बेहद गंभीर है:
वैश्विक तेल बाजार: सामान्य दिनों में दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20% (यानी प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल) इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है. इस नाकाबंदी के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें अनियंत्रित होने का खतरा मंडरा रहा है.
यूरोप पर प्रभाव: यूरोपीय देशों के लिए यह संकट सीधे तौर पर उनकी ऊर्जा और व्यापार सुरक्षा से जुड़ा है. यदि होर्मुज पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण हो जाता है, तो यूरोप को होने वाली एलएनजी (LNG) और तेल की आपूर्ति ठप हो सकती है, जिससे वहां मुद्रास्फीति और बिजली संकट बढ़ सकता है.
यूएई और खाड़ी देश: ईरान के हालिया हमलों के दौरान यूएई पर लगभग 3,300 ड्रोन और मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से हालांकि सुरक्षा प्रणालियों ने 96% हमलों को हवा में ही नाकाम कर दिया. इस भू-राजनीतिक जोखिम से बचने के लिए अब यूएई ने फुजैराह बंदरगाह के माध्यम से होर्मुज जलमार्ग को पूरी तरह बाईपास करने वाली एक नई तेल पाइपलाइन के निर्माण को युद्धस्तर पर तेज कर दिया है.
आम जनता और वैश्विक उपभोक्ताओं पर सीधा असर
इस समुद्री विवाद का सीधा असर दुनिया भर की आम जनता की जेब पर पड़ने लगा है. होर्मुज जलमार्ग के बाधित होने से जहाजों को अफ्रीका के चक्कर लगाकर लंबे रास्तों से जाना पड़ रहा है, जिससे समुद्री माल ढुलाई की लागत (Freight Rates) में 300% तक का भारी उछाल आया है. इसके परिणामस्वरूप पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक सामानों, दवाओं और खाद्यान्न की वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. आम उपभोक्ताओं के लिए रोजमर्रा की जरूरत की चीजें महंगी हो रही हैं. इसके अतिरिक्त, खाड़ी क्षेत्र में सबसी (समुद्र के भीतर) बिछाई गई इंटरनेट और संचार केबलों की मरम्मत का काम भी रुक गया है, क्योंकि ईरान ने उन केबल सुधारने वाले जहाजों से भी 'प्रोटेक्शन फीस' की मांग की है, जिससे वैश्विक डिजिटल कनेक्टिविटी और इंटरनेट स्पीड प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है.
आगे की राह
आने वाले दिनों में यदि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किसी अंतिम तार्किक निष्कर्ष पर नहीं पहुंचती है, तो खाड़ी क्षेत्र में दोबारा भीषण युद्ध (Second Round of Fighting) छिड़ने की पूरी आशंका है, जो वैश्विक सुरक्षा को पूरी तरह संकट में डाल देगा. यूएई और अन्य खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों के लिए अब ईरान का परमाणु कार्यक्रम दूसरी या तीसरी चिंता नहीं, बल्कि नंबर वन चिंता बन चुका है, क्योंकि तेहरान अंतरराष्ट्रीय नियमों को ताक पर रखकर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर रहा है.
आगे का रास्ता यही है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बिना किसी शर्त के पुरानी स्थिति (Status Quo Ante) में बहाल किया जाए और इसे पूरी तरह से एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग घोषित रखा जाए. अमेरिका, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र को मिलकर एक ऐसी सामूहिक सुरक्षा प्रणाली तैयार करनी होगी जो स्वतंत्र नौवहन (Freedom of Navigation) की रक्षा कर सके. जब तक ईरान अपने नए नक्शे और अवैध टोल वसूलने की जिद को पीछे नहीं खींचता, तब तक वैश्विक ऊर्जा बाजार और खाड़ी देशों के बीच स्थायी शांति की स्थापना होना असंभव प्रतीत होता है.