दिल्ली। करोड़ों हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र कैलाश मानसरोवर यात्रा इस वर्ष फिर से होने जा रही है। विदेश मंत्रालय ने 30 अप्रैल 2026 को आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि यह यात्रा जून से अगस्त 2026 के बीच आयोजित की जाएगी। इस बार कुल 1,000 यात्री दो अलग-अलग मार्गों से भगवान शिव के पवित्र धाम तक पहुंचेंगे। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक श्रद्धालु 19 मई 2026 तक kmy.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
क्या है कैलाश मानसरोवर यात्रा ?
तिब्बत में स्थित माउंट कैलाश और मानसरोवर झील दुनिया के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में गिने जाते हैं। 6,638 मीटर यानी करीब 21,778 फीट ऊंचे माउंट कैलाश को हिंदू धर्म में भगवान शिव का निवास माना जाता है। यही कारण है कि लाखों श्रद्धालु जीवन में एक बार इस यात्रा को करने का सपना देखते हैं।
केवल हिंदू ही नहीं, बौद्ध धर्म में भी इस पर्वत को "माउंट मेरु" कहकर आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। जैन धर्म में इसे "अष्टापद" कहते हैं जहाँ उनके प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव ने मोक्ष प्राप्त किया था। तिब्बती बॉन परंपरा भी इस पर्वत को उतना ही पवित्र मानती है। यही वजह है कि चीन सरकार ने 2001 में इस पर्वत पर चढ़ाई पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था ताकि विभिन्न धर्मों की भावनाओं का सम्मान हो सके।
5 साल बाद लगातार दूसरी बार
यह यात्रा 2020 में कोरोना महामारी की वजह से बंद हो गई थी। इसके बाद गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुई सीमा झड़प ने इस यात्रा को और लंबे समय तक रोके रखा। लाखों श्रद्धालु वर्षों तक इंतज़ार करते रहे।
जब 2025 में भारत-चीन सीमा पर सैनिकों की वापसी पूरी हुई और दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य होने लगे तब यह यात्रा दोबारा शुरू हुई। 2026 में यह लगातार दूसरी बार आयोजित हो रही है। इसे दोनों देशों के बीच बेहतर होते संबंधों की एक अहम कड़ी माना जा रहा है।
चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने इस यात्रा के फिर से शुरू होने पर खुशी जताते हुए कहा
हम इस वर्ष 1,000 भारतीय तीर्थयात्रियों की यात्रा को सुगम बनाने में प्रसन्न हैं। यह यात्रा दोनों महान सभ्यताओं के बीच आस्था, मित्रता और जन-जन के बीच संबंधों का सेतु बने।
दो मार्ग, 20 जत्थे, 1000 यात्री
इस वर्ष यात्रा के लिए दो मुख्य मार्ग तय किए गए हैं। दोनों मार्गों पर 10-10 जत्थे जाएंगे और हर जत्थे में 50 यात्री होंगे।
पहला मार्ग — लिपुलेख दर्रा उत्तराखंड
यह मार्ग उत्तराखंड के पहाड़ों से होकर लिपुलेख दर्रे के रास्ते चीन तक जाता है। यहाँ से यात्रा की शुरुआत दिल्ली या धारचूला से होगी। उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़, घने जंगल और बर्फीले रास्ते इस मार्ग को खास बनाते हैं। यह रास्ता शारीरिक रूप से अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है लेकिन प्राकृतिक सौंदर्य भी उतना ही अद्भुत है।
दूसरा मार्ग — नाथू ला दर्रा, सिक्किम
यह मार्ग सिक्किम के मनोरम दृश्यों से होकर नाथू ला दर्रे के रास्ते चीन में प्रवेश करता है। यात्रा की शुरुआत दिल्ली या गंगटोक से होगी। सिक्किम के हरे-भरे पहाड़ और साफ मौसम इस रास्ते को थोड़ा सुलभ बनाते हैं। हालांकि यह भी एक कठिन यात्रा है जिसके लिए अच्छी शारीरिक तैयारी जरूरी है।
आवेदक दोनों में से कोई एक या दोनों मार्ग चुन सकते हैं। दोनों चुनने पर प्राथमिकता बतानी होगी।
हर जत्थे में क्या होती है व्यवस्था ?
प्रत्येक जत्थे में केवल 50 तीर्थयात्री ही नहीं होते। उनके साथ दो सरकारी संपर्क अधिकारी भी होते हैं। इसके अलावा दो से चार रसोइए और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस का एक चिकित्सा अधिकारी भी साथ जाता है। यह पूरी व्यवस्था यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए की जाती है क्योंकि यात्रा 4,590 मीटर से भी अधिक ऊंचाई पर होती है जहाँ ऑक्सीजन की कमी और अचानक बदलता मौसम किसी के लिए भी मुश्किल खड़ी कर सकता है।
आवेदन कैसे करें ?
विदेश मंत्रालय ने पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और कम्प्यूटरीकृत कर दी है। आवेदन के लिए कहीं जाने या कोई पत्र भेजने की जरूरत नहीं है।
आवेदन की प्रक्रिया चार चरणों में होती है:
पहले चरण में kmy.gov.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होता है और ऑनलाइन आवेदन भरना होता है। दूसरे चरण में कम्प्यूटर द्वारा लकी ड्रॉ यानी यादृच्छिक चयन होता है जो पूरी तरह निष्पक्ष और लैंगिक संतुलन वाला होता है। तीसरे चरण में चयनित यात्रियों को सूचना दी जाती है। चौथे और अंतिम चरण में यात्रा शुल्क का भुगतान करना होता है।
यात्रा शुल्क दोनों मार्गों के लिए ₹5,000 रखा गया है।
आवेदन की अंतिम तारीख: 19 मई 2026
कौन कर सकता है आवेदन ?
यह यात्रा केवल उन भारतीय नागरिकों के लिए है जिनके पास वैध भारतीय पासपोर्ट हो और जो धार्मिक उद्देश्य से यात्रा करना चाहते हों। यात्रा शारीरिक रूप से बेहद कठिन है इसलिए स्वास्थ्य संबंधी शर्तें भी पूरी करनी होती हैं।
कौन से दस्तावेज़ जरूरी हैं ?
यात्रा के लिए आवेदन करने से पहले ये दस्तावेज़ तैयार रखें।
वैध भारतीय पासपोर्ट जिसकी वैधता 1 सितंबर 2026 तक कम से कम छह महीने बची हो। पासपोर्ट के आगे और पीछे के पेज की फोटोकॉपी एक ही शीट पर होनी चाहिए। छह पासपोर्ट साइज फोटो भी देनी होंगी। ₹100 के नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर मजिस्ट्रेट या नोटरी द्वारा प्रमाणित क्षतिपूर्ति बांड भरना होगा जिसमें यात्री यह स्वीकार करता है कि वह यात्रा अपने जोखिम पर कर रहा है। आपातकालीन स्थिति में हेलीकॉप्टर से निकासी के लिए सहमति पत्र भी जरूरी है। इसके अलावा एक अत्यंत संवेदनशील दस्तावेज़ भी देना होता है जिसमें यदि चीनी सीमा पर किसी यात्री की मृत्यु हो जाए तो वहीं अंतिम संस्कार की सहमति दी जाती है।
ये दस्तावेज़ यात्रा की गंभीरता और कठिनाई को दर्शाते हैं। इसीलिए इस यात्रा को करने से पहले पूरी मानसिक और शारीरिक तैयारी जरूरी है।
क्यों है यह यात्रा इतनी खास ?
कैलाश मानसरोवर यात्रा दुनिया की सबसे कठिन तीर्थयात्राओं में से एक है। 4,590 मीटर से अधिक की ऊंचाई, कम ऑक्सीजन, तेज़ ठंड और बदलता मौसम यह सब मिलकर इस यात्रा को एक असाधारण अनुभव बनाते हैं। जो श्रद्धालु इस यात्रा को पूरा कर लेते हैं वे इसे जीवन का सबसे अविस्मरणीय और आत्मिक अनुभव बताते हैं।
माउंट कैलाश आज तक किसी आधुनिक पर्वतारोही ने नहीं फतह किया। यह पर्वत अपनी दिव्यता और रहस्य को आज भी अपने भीतर समेटे हुआ है।
आवेदन में न करें देरी
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आवेदन की अंतिम तारीख 19 मई 2026 है। इसके बाद कोई आवेदन स्वीकार नहीं होगा। सीटें सीमित हैं और यात्री लाखों में हैं। इसलिए जो भी इस पवित्र यात्रा का हिस्सा बनना चाहते हैं वे बिना देर किए kmy.gov.in पर जाकर आवेदन करें।