भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक बहुत बड़ी क्रांति आने वाली है जिससे आम आदमी की रसोई का बजट और सुरक्षा दोनों ही बदलने वाले हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड यानी PNGRB ने एक ऐसा मेगा मास्टर प्लान तैयार किया है जो 2030 तक भारत की सड़कों का नक्शा ही बदल देगा। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में रसोई गैस यानी LPG की सप्लाई के लिए सड़कों पर दौड़ने वाले टैंकरों को पूरी तरह से हटा दिया जाए और उनकी जगह जमीन के नीचे पाइपलाइन का एक सुरक्षित जाल बिछाया जाए।
भारत का मेगा गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट और भारी निवेश
केंद्र सरकार इस विजन को पूरा करने के लिए लगभग 12,500 करोड़ रुपये का भारी भरकम निवेश करने जा रही है। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य देश के कोने-कोने तक 2500 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाना है। इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 9 प्रमुख रूटों की पहचान की गई है जिन पर काम शुरू हो चुका है। सरकार का मानना है कि इस सिस्टम के आने से गैस की बर्बादी कम होगी और सप्लाई चेन पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाएगी। यह सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं है बल्कि यह न्यू इंडिया का एनर्जी प्लान है जो हमारी अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा।
इन 4 बड़े रूटों पर सबसे पहले दौड़ेगी गैस पाइपलाइन
शुरुआती चरण में सरकार ने 4 मुख्य पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स को अंतिम रूप दिया है जिनकी बोली प्रक्रिया अब अपने आखिरी चरण में पहुंच चुकी है। ये रूट भारत के अलग-अलग हिस्सों को रिफाइनरी से सीधे जोड़ेंगे।
1 चेरलपल्ली से नागपुर तक का नेटवर्क जो दक्षिण भारत को कवर करेगा
2 शिक्रापुर से हुबली और गोवा तक की पाइपलाइन जो पश्चिमी भारत के लिए होगी
3 पारादीप से रायपुर तक का रूट जो पूर्वी भारत में गैस सप्लाई सुनिश्चित करेगा
4 झांसी से सितारगंज तक की पाइपलाइन जो उत्तर भारत के राज्यों को फायदा पहुंचाएगी
सड़कों से टैंकर हटने के बड़े फायदे और सुरक्षा
वर्तमान में LPG की सप्लाई मुख्य रूप से सड़कों पर चलने वाले बड़े टैंकरों के जरिए होती है। इस पुराने सिस्टम में कई बड़े जोखिम और नुकसान शामिल हैं जिन्हें पाइपलाइन सिस्टम पूरी तरह खत्म कर देगा।
सड़क हादसों में कमी आना एक सबसे बड़ा कारण है। गैस टैंकरों के पलटने से अक्सर बड़े धमाके और आग लगने की घटनाएं होती हैं जिससे जान और माल का भारी नुकसान होता है। पाइपलाइन जमीन के नीचे होगी इसलिए सड़क हादसों का डर खत्म हो जाएगा।
सप्लाई की रफ्तार में सुधार होगा। अक्सर ट्रैफिक जाम या खराब मौसम की वजह से सिलेंडर की डिलीवरी में देरी हो जाती है। पाइपलाइन से गैस की सप्लाई 24 घंटे बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।
गैस चोरी और लीकेज पर लगाम लगेगी। टैंकरों से सप्लाई के दौरान गैस की चोरी और लीकेज की संभावनाएं रहती हैं लेकिन पाइपलाइन सिस्टम में ऑटोमैटिक सेंसर लगे होंगे जो किसी भी लीकेज का तुरंत पता लगा लेंगे।
पर्यावरण पर सकारात्मक असर और क्लीन एनर्जी
भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्बन उत्सर्जन कम करने का वादा कर चुकी है। जब सड़कों से हजारों डीजल टैंकर हटेंगे तो हर साल लाखों लीटर डीजल की बचत होगी। इससे हवा में घुलने वाला जहरीला धुआं कम होगा और पर्यावरण को फायदा पहुंचेगा। यह प्रोजेक्ट सीधे तौर पर भारत के जलवायु लक्ष्यों को सपोर्ट करता है और देश को क्लीन एनर्जी सिस्टम की ओर ले जाता है। आने वाली पीढ़ियों के लिए यह एक बहुत ही सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त कदम साबित होगा।
आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा और क्या सस्ता होगा सिलेंडर
जब गैस सप्लाई का लॉजिस्टिक खर्च कम होगा तो इसका सीधा असर भविष्य की कीमतों पर पड़ सकता है। फिलहाल गैस की कीमत में एक बड़ा हिस्सा ट्रांसपोर्टेशन और हैंडलिंग चार्ज का होता है। पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंचाना टैंकरों के मुकाबले काफी सस्ता पड़ता है। जब कंपनियों की लागत घटेगी तो लंबे समय में उपभोक्ताओं को इसका फायदा मिल सकता है। इसके अलावा सप्लाई स्थिर होने से त्यौहारों के समय होने वाली गैस की किल्लत और ब्लैक मार्केटिंग भी बंद हो जाएगी।
2030 तक का विजन और रोजगार के नए अवसर
सरकार का विजन है कि 2030 तक भारत की एनर्जी बास्केट में गैस की हिस्सेदारी को बढ़ाया जाए। इस 12,500 करोड़ रुपये के निवेश से हजारों कुशल और अकुशल श्रमिकों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। जिन इलाकों से ये पाइपलाइन गुजरेगी वहां नए इंडस्ट्रियल हब विकसित होंगे। छोटे उद्योगों को सस्ती और आसान गैस मिलने से स्थानीय स्तर पर विकास की गति तेज होगी। यह प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
यह बदलाव भविष्य की जरूरत है। जैसे-जैसे देश की आबादी और गैस की मांग बढ़ रही है वैसे-वैसे पुराना सिस्टम अब नाकाफी साबित हो रहा है। पाइपलाइन से LPG की सप्लाई भारत को विकसित देशों की कतार में खड़ा कर देगी। उपभोक्ताओं को अब सिलेंडर की बुकिंग के बाद हफ्तों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह तकनीकी बदलाव हमारी सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए गेम चेंजर साबित होगा।