कैलिफोर्निया/नई दिल्ली: फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) की पैरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta Platforms) ने अमेरिकी इतिहास में पहली बार एक स्कूल डिस्ट्रिक्ट के साथ अदालत के बाहर समझौता (Settlement) कर लिया है. यह मामला स्कूलों द्वारा सोशल मीडिया कंपनियों पर बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य संकट (Youth Mental Health Crisis) और सोशल मीडिया की लत को बढ़ावा देने के आरोप में दर्ज मुकदमों से जुड़ा है. कैलिफोर्निया के ऑकलैंड की संघीय अदालत में आगामी 15 जून से इस केस का मुख्य ट्रायल शुरू होने वाला था, लेकिन कानूनी शिकंजे से बचने के लिए मेटा ने कोर्ट फाइलिंग के जरिए इस मुकदमे को आपसी सहमति से सुलझा लिया है.
यह समझौता पूर्वी केंटकी के ग्रामीण इलाके में स्थित 'ब्रेथिट काउंटी स्कूल डिस्ट्रिक्ट' (Breathitt County School District) द्वारा दायर मुकदमे को पूरी तरह से समाप्त करता है. गौरतलब है कि इस मामले में सह-आरोपी रहीं अन्य दिग्गज टेक कंपनियों—गूगल के यूट्यूब (YouTube), स्नैपचैट (Snap) और टिकटॉक (TikTok)—ने भी इसी सप्ताह की शुरुआत में इस स्कूल डिस्ट्रिक्ट के साथ अदालत के बाहर गोपनीय समझौता कर लिया था. मेटा इस मुकदमे में अकेली बची हुई कंपनी थी, जिसने अब अंततः घुटने टेकते हुए सेटलमेंट का रास्ता चुना है.
क्या था पूरा विवाद और क्यों बेहद खास है यह बेलवेदर टेस्ट केस?
केंटकी के इस छोटे से ग्रामीण स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने अपनी याचिका में टेक दिग्गजों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए थे. मुकदमे में कहा गया था कि इन कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम को इस तरह से डिजाइन किया है जिससे कम उम्र के यूजर इसके आदी (Hooked) हो जाएं. इस लत के कारण छात्रों में अत्यधिक तनाव, अवसाद (Depression) और खुद को नुकसान पहुंचाने (Self-harm) की प्रवृत्तियां तेजी से बढ़ी हैं. इस मानसिक संकट से निपटने और छात्रों की काउंसलिंग व सुरक्षा के लिए स्कूलों को अपनी जेब से भारी संसाधन और फंड खर्च करने पड़ रहे हैं, जिसकी भरपाई इन टेक कंपनियों को करनी चाहिए.
कानूनी भाषा में ब्रेथिट काउंटी के इस मुकदमे को 'बेलवेदर केस' (Bellwether Case) यानी एक टेस्ट केस के रूप में चुना गया था. अमेरिका भर के लगभग 1,200 स्कूल डिस्ट्रिक्ट ने सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ इसी तरह के दावे पेश किए हैं. इस पहले टेस्ट केस के नतीजों और सेटलमेंट के आधार पर ही अब बाकी बचे हुए 1,200 स्कूलों के मुकदमों का भविष्य और उनका हर्जाना तय किया जाएगा. ब्रेथिट काउंटी स्कूल ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने और 15 साल का एक विशेष प्रोग्राम चलाने के लिए 60 मिलियन डॉलर (लगभग 500 करोड़ रुपये) से अधिक के मुआवजे की मांग की थी.
अदालती फैसलों का दबाव और टेक कंपनियों पर देशव्यापी कानूनी संकट
मेटा और यूट्यूब द्वारा ट्रायल से ऐन पहले समझौता करने की सबसे बड़ी वजह हाल ही में अमेरिकी अदालतों में उन्हें मिले झटके हैं. इसी साल 25 मार्च को लॉस एंजिल्स की एक जूरी ने मेटा और गूगल को बच्चों के लिए नुकसानदेह प्लेटफॉर्म डिजाइन करने और लापरवाही बरतने का दोषी पाया था, जहां एक 20 वर्षीय युवती को सोशल मीडिया की लत लगने के एवज में 6 मिलियन डॉलर का संयुक्त मुआवजा देने का आदेश दिया गया था. इसके अलावा न्यू मैक्सिको में भी एक जूरी ने बच्चों की सुरक्षा में विफल रहने पर मेटा को भारी हर्जाना भरने का फैसला सुनाया था.
कंपनियों को डर था कि अगर केंटकी स्कूल डिस्ट्रिक्ट का मामला जून में जूरी के सामने खुली अदालत में जाता, तो उनके आंतरिक दस्तावेज और सीक्रेट एल्गोरिदम से जुड़े रिकॉर्ड्स सार्वजनिक हो सकते थे, जो उनके बिजनेस मॉडल को भारी नुकसान पहुंचाते. वर्तमान में कैलिफोर्निया की राज्य अदालतों में सोशल मीडिया की लत से नुकसान के दावों वाले 3,300 से अधिक मुकदमे लंबित हैं, जबकि संघीय अदालत में स्कूल डिस्ट्रिक्ट्स, नगर पालिकाओं और विभिन्न राज्यों द्वारा दर्ज करीब 2,400 मामले एक साथ चल रहे हैं. इसके अलावा 30 से अधिक अमेरिकी राज्यों ने भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर मेटा पर एक अलग बड़ा केस कर रखा है जिसका ट्रायल अगस्त में होने की उम्मीद है.
बच्चों की सुरक्षा के लिए टेक कंपनियों के नए दावे
इस ऐतिहासिक समझौते के बाद मेटा के प्रवक्ता ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि हमने इस मामले को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया है. कंपनी का पूरा ध्यान अब 'टीन अकाउंट्स' (Teen Accounts) जैसे फीचर्स को और मजबूत करने पर है, ताकि किशोर ऑनलाइन सुरक्षित रह सकें और माता-पिता को अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए सरल कंट्रोल्स मिल सकें. यूट्यूब ने भी कहा है कि वे पिछले एक दशक से शिक्षकों और अभिभावकों के साथ मिलकर बच्चों के लिए उम्र के अनुकूल सुरक्षित डिजिटल माहौल बनाने पर काम कर रहे हैं.
दूसरी तरफ, पीड़ित पक्षों और स्कूलों की पैरवी करने वाले वकीलों का कहना है कि ब्रेथिट काउंटी के दावों का निपटारा तो हो गया है, लेकिन उनकी लड़ाई अभी थमी नहीं है. उनका मुख्य फोकस अब देश के उन बाकी बचे 1,200 स्कूल डिस्ट्रिक्ट्स को न्याय और भारी मुआवजा दिलाना है जो इस मानसिक स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे हैं. इसमें जॉर्जिया का डिकॉलब काउंटी (DeKalb County) जैसा बड़ा स्कूल डिस्ट्रिक्ट भी शामिल है जिसने भविष्य के मेंटल हेल्थ खर्चों के लिए अकेले ही 4.3 बिलियन डॉलर के मुआवजे का दावा ठोका हुआ है. साफ है कि आने वाले दिनों में टेक कंपनियों को एल्गोरिदम में बड़े बदलाव करने ही होंगे.