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Delhi Liquor Crisis शराब के शौकीनों को बड़ा झटका! हाई कोर्ट के इस एक फैसले से दिल्ली में नहीं मिलेंगी Chivas Regal और Absolut जानें पूरा मामला

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दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने आबकारी विभाग के तर्कों को स्वीकार करते हुए कहा कि कंपनी के खिलाफ जारी मौजूदा जांचों का मतलब दिल्ली शहर के नियमों के तहत 'आपराधिक पृष्ठभूमि' (Criminal Background) है। नियमों के अनुसार, ऐसी स्थिति में कोई भी इकाई लाइसेंस के लिए 'अपात्र' (Ineligible) हो जाती है। इसके विपरीत, पेरोनड रिकॉर्ड ने अदालत में लगातार यह तर्क दिया था कि उन्हें किसी भी मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है, इसलिए केवल जांच लंबित होने के आधार पर तीन साल तक लाइसेंस रोकने से उनका व्यवसाय "पूरी तरह से पंगु" (Hopelessly Fettered) हो गया है।

अदालत में कानूनी तनाव: पेरोनड रिकॉर्ड ने दलील दी कि बिना किसी दोषसिद्धि (Conviction) के व्यापारिक अधिकार रोकना अनुचित है। हालांकि, दिल्ली अधिकारियों का रुख सख्त रहा कि आबकारी नीति से जुड़ी जांच के लंबित रहते नियमों में कोई ढील नहीं दी जा सकती। अदालत ने अंततः विनियामक कड़ाई के पक्ष में फैसला सुनाया।

 वैश्विक मुनाफे और लोकल बाजार का गणित

रॉयटर्स द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मात्रा (Volume) के हिसाब से भारत पेरोनड रिकॉर्ड के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। पिछले वित्तीय वर्ष में कंपनी ने भारतीय बाजार से 2.9 बिलियन डॉलर (लगभग 24,000 करोड़ रुपये) की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की थी। इस वैश्विक व्यापार में दिल्ली की हिस्सेदारी और उसके नुकसान का आर्थिक विवरण इस प्रकार है:

बाजार संकेतक आधिकारिक आंकड़े (फैक्ट्स) व्यावसायिक एवं वित्तीय प्रभाव
कुल भारतीय शराब बाजार $65 बिलियन (₹5.4 लाख करोड़) दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक, जहां प्रीमियम ब्रांड्स की मांग सबसे अधिक है।
पेरोनड की कुल भारतीय बिक्री $2.9 बिलियन (₹24,000 करोड़) वैश्विक स्तर पर कंपनी के कुल लिक्विड वॉल्यूम में भारत शीर्ष स्थान पर बना हुआ है।
दिल्ली बाजार की हिस्सेदारी पेरोनड की कुल घरेलू बिक्री का 5% यह लगभग $145 मिलियन (₹1,200+ करोड़) सालाना का बाजार है, जो पिछले तीन साल से कंपनी के लिए शून्य बना हुआ है।
अतिरिक्त वित्तीय देनदारी $314 मिलियन (₹2,600 करोड़) भारतीय कर अधिकारियों द्वारा स्कॉच आयात पर कम सीमा शुल्क चुकाने (उम्र और संरचना छुपाने) के आरोप में लंबित मांग।

 उपभोक्ताओं की जेब और दिल्ली के राजस्व पर सीधा असर

इस अदालती गतिरोध का सीधा असर दिल्ली की जनता और सरकार के राजस्व पर भी देखा जा रहा है। बाजार विश्लेषकों और आबकारी आंकड़ों के अनुसार, इस प्रतिबंध ने दिल्ली-एनसीआर के शराब व्यापार के समीकरण बदल दिए हैं:

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  • बॉर्डर शिफ्टिंग और गुरुग्राम का मुनाफा: चिवस रीगल, द ग्लेनलि्वेट, एब्सोल्यूट वोदका और जेमिसन जैसे प्रीमियम ब्रांड्स दिल्ली की सरकारी दुकानों पर न मिलने के कारण उपभोक्ता भारी मात्रा में पड़ोसी शहरों जैसे गुरुग्राम (हरियाणा) और नोएडा (उत्तर प्रदेश) का रुख कर रहे हैं।
  • राजस्व का नुकसान: दिल्ली के उपभोक्ताओं द्वारा पड़ोसी राज्यों से खरीदारी करने के कारण दिल्ली सरकार को मिलने वाले मूल्य वर्धित कर (VAT) और उत्पाद शुल्क (Excise Duty) का एक बड़ा हिस्सा हरियाणा और यूपी के खातों में ट्रांसफर हो रहा है।
  • होस्पिटैलिटी सेक्टर पर प्रभाव: दिल्ली के पांच सितारा होटलों, क्लबों और प्रीमियम रेस्तरां को अपने अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए इन विशिष्ट ब्रांड्स की आपूर्ति सुनिश्चित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे पर्यटन और नाइटलाइफ़ से जुड़े व्यवसाय प्रभावित हुए हैं।

पुराना डेटा और इतिहास 2021 की नीति से 2026 के अदालती आदेश तक

यह पूरा विवाद अचानक उत्पन्न नहीं हुआ है, बल्कि इसकी शुरुआत दिल्ली सरकार की पुरानी नीतियों और विनियामक बदलावों से जुड़ी है। इस व्यापारिक संकट की ऐतिहासिक समयरेखा निम्नलिखित है:

नवंबर 2021 (पुरानी नीति का दौर)

दिल्ली सरकार ने एक नई आबकारी नीति लागू की, जिसके तहत खुदरा व्यापार को पूरी तरह से निजी हाथों में सौंप दिया गया। पेरोनड रिकॉर्ड ने इस नीति के तहत बाजार में अपनी उपस्थिति का विस्तार किया।

वर्ष 2022 (विवाद और जांच की शुरुआत)

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नीति में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच के आदेश दिए। इसके बाद दिल्ली सरकार ने नई नीति वापस ले ली और पुरानी सरकारी नियंत्रण वाली व्यवस्था बहाल कर दी। इसी वर्ष प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू की।

वर्ष 2023 (दिल्ली बाजार से बेदखली)

चल रही आपराधिक जांचों के आधार पर दिल्ली के आबकारी अधिकारियों ने पेरोनड रिकॉर्ड के थोक व्यापार लाइसेंस (L-1) के नवीनीकरण पर रोक लगा दी। तब से कंपनी के उत्पाद दिल्ली में आधिकारिक रूप से प्रतिबंधित हैं।

फरवरी 2025 (प्रशासनिक इनकार)

कंपनी के कई आवेदनों और अपीलों के बाद, दिल्ली के अधिकारियों ने फरवरी में उनके लाइसेंस अनुरोध को अंतिम रूप से खारिज कर दिया, जिसके बाद कंपनी ने हाई कोर्ट में समीक्षा याचिका दायर की।

29 मई 2026 (वर्तमान अदालती आदेश)

दिल्ली हाई कोर्ट ने अधिकारियों के 'अपात्रता' संबंधी तर्कों को सही ठहराते हुए पेरोनड की याचिका खारिज कर दी, जिससे पिछले तीन साल से जारी व्यावसायिक गतिरोध आगे भी बरकरार रहेगा।

आगे का कानूनी रास्ता

रॉयटर्स के अनुसार, पेरोनड रिकॉर्ड ने इस अदालती फैसले पर तुरंत कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या टिप्पणी नहीं दी है। हालांकि, विनियामक नियमों के तहत कंपनी के पास अभी भी दो विकल्प खुले हैं। वह इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट की ही एक बड़ी खंडपीठ (Double Bench) के समक्ष अपील दायर कर सकती है या फिर सीधे भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में इस आदेश को चुनौती दे सकती है। भारत में कंपनी के बड़े वित्तीय हितों को देखते हुए, विशेषज्ञ एक और दौर की कानूनी लड़ाई की संभावना जता रहे हैं।

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