नई दिल्ली: देश में इस वक्त पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक अजीब सा डर का माहौल बना हुआ है। सोशल मीडिया पर एक खबर आग की तरह फैल रही है कि चुनाव खत्म होते ही तेल की कीमतों में 25 से 28 रुपये तक का बड़ा इजाफा होने वाला है। इस अफवाह ने आम जनता को इतना डरा दिया है कि पेट्रोल पंपों पर 'पैनिक बाइंग' शुरू हो गई है। लोग इस डर से अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल करवा रहे हैं कि कहीं कल जेब पर भारी बोझ न पड़ जाए।
सेल में 13% का जबरदस्त उछाल
हालिया आंकड़ों के मुताबिक, इस डर का सीधा असर तेल की बिक्री पर दिखने लगा है। अप्रैल 2026 के शुरुआती तीन हफ्तों (1 से 21 अप्रैल) के दौरान पेट्रोल और डीजल की रिटेल सेल में 13 फीसदी से ज्यादा की रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई है। इंडियन ऑयल (IOC) के पेट्रोल पंपों पर लोगों की ऐसी भीड़ देखी गई जो आमतौर पर दिवाली जैसे त्योहारों के समय ही नजर आती है।
लोग न केवल गाड़ियों में तेल भरवा रहे हैं, बल्कि कई जगहों से ऐसी खबरें भी आई हैं कि लोग ड्रम और बोतलों में भी स्टॉक जमा करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, प्रशासन इसे खतरनाक बता रहा है, लेकिन सोशल मीडिया के दावों ने लोगों के बीच बेचैनी पैदा कर दी है।
आखिर क्यों फैल रही है ऐसी अफवाह ?
इस अफवाह के पीछे कुछ आर्थिक तर्क भी दिए जा रहे हैं, जिन्हें लोग सच मान बैठे हैं। दरअसल, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार दबाव में हैं। ईरान-इजरायल युद्ध के बीच ब्रेंट क्रूड का भाव $119 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि तेल कंपनियां फिलहाल भारी घाटे में चल रही हैं। अनुमान है कि कंपनियों को डीजल पर प्रति लीटर ₹100 और पेट्रोल पर ₹20 का नुकसान हो रहा है। इसी घाटे को आधार बनाकर सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि सरकार चुनाव के बाद कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी को मंजूरी दे सकती है।
सरकार ने क्या कहा ?
बढ़ती भीड़ और पैनिक को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की है। मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि तेल की कीमतों में ₹25-28 की बढ़ोतरी की खबरें पूरी तरह से भ्रामक और निराधार हैं।
मंत्रालय ने साफ किया कि फिलहाल सरकार के पास कीमतों को बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार ने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में जब पूरी दुनिया में तेल के दाम दोगुने तक हो गए, तब भी भारत ने अपने नागरिकों को स्थिर कीमतों का लाभ दिया है।
दुनिया के मुकाबले भारत की स्थिति
अगर वैश्विक स्तर पर देखें, तो तेल की महंगाई ने कई देशों की कमर तोड़ दी है। म्यांमार में तेल की कीमतें 161% तक बढ़ गई हैं, वहीं पड़ोसी देश नेपाल में भी डीजल 67% महंगा हुआ है। अमेरिका जैसे विकसित देश में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 40% तक का उछाल आया है। इसकी तुलना में भारत में कीमतें लंबे समय से स्थिर बनी हुई हैं, जिसे सरकार अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है।
क्या सच में बढ़ेंगे दाम ?
बाजार के जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम $120 के करीब होना तेल कंपनियों के लिए खतरे की घंटी है। कंपनियां लंबे समय तक घाटा नहीं सह सकतीं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एक झटके में ₹28 बढ़ा दिए जाएंगे। अगर भविष्य में दाम बढ़ते भी हैं, तो वे बहुत ही कम अंतराल (जैसे कुछ पैसे रोजाना) में बढ़ सकते हैं, जैसा कि पहले होता आया है।
पाठकों के लिए काम की बात
अगर आप भी सोशल मीडिया पर आ रहे ऐसे मैसेज देखकर परेशान हैं, तो ध्यान रखें कि तेल कंपनियां या सरकार कभी भी एक साथ इतनी बड़ी बढ़ोतरी नहीं करतीं। पैनिक बाइंग करने से केवल पेट्रोल पंपों पर अव्यवस्था फैलती है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है। किसी भी जानकारी के लिए सरकार के आधिकारिक हैंडल या विश्वसनीय न्यूज़ पोर्टल्स पर ही भरोसा करें।
अफवाह: चुनाव बाद ₹28 तक महंगा होगा पेट्रोल।
असर: सेल में 13% की बढ़ोत्तरी, पंपों पर लंबी लाइन।
हकीकत: मंत्रालय ने कहा- कोई दाम नहीं बढ़ रहे, अफवाहों से बचें।