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कूटनीतिक तनाव के बाद भारत का बड़ा कदम! 150 दिग्गज बिजनेसमैन को लेकर कनाडा जा रहे हैं पीयूष गोयल

कूटनीतिक तनाव के बाद भारत का बड़ा कदम! 150 दिग्गज बिजनेसमैन को लेकर कनाडा जा रहे हैं पीयूष गोयल

नई दिल्ली: भारत और कनाडा के बीच पिछले कुछ समय से जारी कूटनीतिक गतिरोध को पीछे छोड़ते हुए दोनों देशों ने अपने आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को एक नई गति देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल आगामी 25 मई से 27 मई तक कनाडा की एक बेहद महत्वपूर्ण आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं. इस उच्च-स्तरीय यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मंत्री गोयल के साथ भारत के लगभग 150 शीर्ष उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट लीडर्स का एक विशाल प्रतिनिधिमंडल (Business Delegation) भी कनाडा रवाना हो रहा है. शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित एक आधिकारिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पीयूष गोयल ने इस बात की पुष्टि की कि भारतीय डेलिगेशन कनाडा की राजधानी ओटावा और प्रमुख आर्थिक केंद्र टोरंटो में वहां के मंत्रियों, नीति निर्माताओं और बड़े वैश्विक व्यापारिक समूहों के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक वार्ताओं का नेतृत्व करेगा.

अगले 5 वर्षों में $50 बिलियन के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर टिकीं नजरें

इस मेगा विजिट के आर्थिक रोडमैप को साझा करते हुए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि भारत और कनाडा ने अगले पांच वर्षों के भीतर अपने द्विपक्षीय व्यापार को 50 बिलियन डॉलर (लगभग ₹4.15 लाख करोड़) के ऐतिहासिक आंकड़े तक पहुंचाने का साझा लक्ष्य निर्धारित किया है. दोनों देशों के बीच काफी समय से लंबित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (मुक्त व्यापार समझौता) की वार्ताओं को इस यात्रा के माध्यम से दोबारा जीवित (Revive) किया जाएगा. भारत को उम्मीद है कि इस आगामी समझौते के लागू होने से भारत के कपड़ा (Textiles) और चमड़ा (Leather) उद्योगों को कनाडाई बाजारों में बिना किसी सीमा शुल्क के सीधी पहुंच मिलेगी, जिससे भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़े पैमाने पर नए घरेलू रोजगार पैदा होंगे.

मार्क कार्नी की दिल्ली यात्रा के बाद आगे बढ़ी बात क्रिटिकल मिनरल्स और क्लीन एनर्जी मुख्य एजेंडा

राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, व्यापारिक वार्ताओं में यह तेजी इसी साल मार्च महीने में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) की नई दिल्ली यात्रा के बाद आई है. मार्च की द्विपक्षीय बैठक के दौरान ही दोनों देशों ने 'व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते' (CEPA) के लिए बातचीत की शर्तों (Terms of Reference) को अंतिम रूप देने पर सहमति जताई थी. वाणिज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि आगामी बैठकों में मुख्य ध्यान आधुनिक तकनीकों के हस्तांतरण, फूड प्रोसेसिंग (खाद्य प्रसंस्करण), क्लीन एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा) और सबसे महत्वपूर्ण 'क्रिटिकल मिनरल्स' (महत्वपूर्ण खनिजों जैसे कोबाल्ट और लिथियम) की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) स्थापित करने पर केंद्रित रहेगा, जो भारत के घरेलू सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं.

 कनाडा के पेंशन फंड्स का भारत में $100 बिलियन का भारी निवेश

भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों पर इस यात्रा का प्रभाव सीधे निवेश के आंकड़ों से समझा जा सकता है. वाणिज्य मंत्री गोयल ने खुलासा किया कि कनाडाई पेंशन फंड्स (Canadian Pension Funds) और निजी कंपनियों ने अब तक भारतीय बाजारों और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में लगभग 100 बिलियन डॉलर का भारी निवेश किया हुआ है. वर्तमान में करीब 600 कनाडाई कंपनियां भारत के भीतर सक्रिय रूप से अपना संचालन कर रही हैं. इस यात्रा का एक मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय कूटनीतिक और आर्थिक स्थिरता को बढ़ाना है ताकि भारत में काम करने वाली कनाडाई कंपनियों की संख्या को 600 से बढ़ाकर सीधे 1,000 के पार पहुंचाया जा सके. निवेश में इस बढ़ोतरी का सीधा असर भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, लॉजिस्टिक्स और टियर-2 शहरों में कॉर्पोरेट ऑफिसों के विस्तार के रूप में दिखेगा, जिससे देश के युवाओं और प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे.

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कृषि और शिक्षा क्षेत्र में पुरानी साझेदारी को मिलेगा नया जीवन

द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के अलावा दोनों देशों के बीच पारंपरिक रूप से मजबूत रहे कृषि (Agriculture), ऊर्जा और उच्च शिक्षा (Higher Education) के क्षेत्रों पर भी गहन चर्चा होगी. कनाडा भारतीय कृषि उत्पादों के लिए एक बड़ा बाजार रहा है, वहीं कनाडाई दालों और उर्वरकों की आपूर्ति भारतीय खाद्य सुरक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इसके अतिरिक्त, कनाडा में पढ़ने वाले लाखों भारतीय छात्रों और वहां काम करने वाले आईटी प्रोफेशनल्स के हितों को ध्यान में रखते हुए कूटनीतिक स्तर पर 'मोबिलिटी और प्रवासन' नियमों को अधिक सुगम बनाने पर भी बात हो सकती है, जो दोनों देशों के बीच पीपल-टू-पीपल कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा। 

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