नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को केंद्र सरकार के देशव्यापी रोजगार सृजन अभियान के तहत 19वें 'रोजगार मेला' (Rozgar Mela) का नेतृत्व करते हुए देश भर के 47 स्थानों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 51,000 से अधिक नवनियुक्त अभ्यर्थियों को सरकारी सेवा के आधिकारिक नियुक्ति पत्र वितरित किए. इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री ने अपनी हालिया पांच देशों की रणनीतिक कूटनीतिक यात्रा के आर्थिक इनपुट्स को सीधे देश के विनिर्माण और रोजगार ढांचे से जोड़कर पेश किया. सरकारी आंकड़ों के
मुताबिक, इस अभियान की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 18 रोजगार मेलों के माध्यम से लगभग 12 लाख युवाओं को विभिन्न मंत्रालयों में नियुक्त किया जा चुका है. इस बार की घोषणाएं केवल प्रशासनिक नियुक्तियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसमें डच सेमीकंडक्टर कंपनी ASML, स्वीडन और यूएई के साथ हुए समझौतों के जरिए भारतीय बाजार पर पड़ने वाले व्यापक आर्थिक और सार्वजनिक प्रभावों (Public Impact) का पूरा रोडमैप शामिल है.
पब्लिक इम्पैक्ट (जनता पर असर) कैसे आम नागरिक के जीवन और क्रय शक्ति को बदलेगा यह मेगा निवेश?
इस बड़े विनिर्माण और प्रशासनिक बदलाव का सीधा असर देश की आम जनता की आर्थिक स्थिति पर पड़ने जा रहा है. पहली बार, भारत की घरेलू नीतियों को इस प्रकार तैयार किया गया है कि वैश्विक विनिर्माण का लाभ सीधे टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिले. जब टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डच कंपनी ASML जैसी वैश्विक दिग्गज कंपनियां गुजरात के धोलेरा जैसे क्षेत्रों में भारत का पहला कमर्शियल सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट स्थापित करेंगी, तो इसका सीधा असर लॉजिस्टिक्स, स्थानीय रियल एस्टेट और एमएसएमई (MSME) सेक्टर पर पड़ेगा. विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार बढ़ने से मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति (Purchasing Power) में वृद्धि होगी, जिससे घरेलू बाजारों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, ऑटोमोबाइल और दैनिक उपभोग की वस्तुओं (FMCG) की मांग बढ़ेगी, जो अंततः देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की विकास दर को गति देगी.
ग्लोबल कूटनीति से जमीनी बदलाव: टाटा-ASML और यूएई के साथ सुपरकंप्यूटिंग समझौतों का आधार
प्रधानमंत्री ने साझा किया कि नीदरलैंड की प्रमुख सेमीकंडक्टर उपकरण निर्माता कंपनी ASML और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच हुआ उन्नत लिथोग्राफी टूल्स (Advanced Lithography Tools) की आपूर्ति का समझौता वैश्विक तकनीकी बाजार में एक दुर्लभ घटनाक्रम है. इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ सुपरकंप्यूटिंग (Supercomputing) और स्वीडन के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को अंतिम रूप दिया गया है. इन वैश्विक समझौतों का सीधा तकनीकी प्रभाव यह होगा कि भारत आने वाले वर्षों में अगली पीढ़ी की तकनीकों (Next-Gen Tech) के मामले में आयात पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं एक प्रमुख निर्यातक बनकर उभरेगा, जिससे तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवाओं के लिए देश के भीतर ही उच्च वेतन वाले पदों का सृजन होगा.
कोर औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ा बदलाव: शिपबिल्डिंग और विमानन क्षेत्र में ₹75,000 करोड़ का निवेश
औद्योगिक बुनियादी ढांचे को लेकर प्रधानमंत्री ने बताया कि देश के भीतर समुद्री और एयरोस्पेस इकोसिस्टम को पूरी तरह आधुनिक बनाने के लिए जहाज निर्माण (Shipbuilding), जहाज मरम्मत (Ship Repair) और विमानन रखरखाव (MRO - मेंटेनेंस, ओवरहॉल और रिपेयर) क्षेत्र में लगभग 75,000 करोड़ रुपये का एकीकृत निवेश किया जा रहा है. यूएई और नॉर्वे के सहयोग से विकसित हो रहा यह इकोसिस्टम सीधे तौर पर देश के कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों, आईटीआई (ITI) सर्टिफिकेट धारकों और इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारकों को विनिर्माण की मुख्य मूल्य श्रृंखला (Value Chain) में शामिल करेगा. इसका सीधा जनता पर प्रभाव यह होगा कि अब तक जो भारी पूंजी जहाजों और विमानों की मरम्मत के लिए विदेशों में जाती थी, वह अब देश के भीतर ही रहेगी, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था का कायाकल्प: कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा कल्याण योजनाओं का समन्वय
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि पिछले 12 वर्षों के दौरान सड़कों, रेलवे, हवाई अड्डों, आधुनिक लॉजिस्टिक्स और डिजिटल नेटवर्क (Digital Networks) में किए गए व्यापक पूंजीगत व्यय के कारण ग्रामीण भारत में एक मूक क्रांति आई है. बेहतर भौतिक और डिजिटल कनेक्टिविटी ने गांवों के छोटे किसानों, पारंपरिक कारीगरों और टियर-3 शहरों के छात्रों के लिए राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों तक सीधी पहुंच स्थापित कर दी है. इसके साथ ही, प्रधानमंत्री आवास योजना, हर घर बिजली, नल से जल और उन्नत स्वच्छता अभियानों जैसे बुनियादी ढांचे से जुड़े कल्याणकारी कार्यक्रमों ने ग्रामीण क्षेत्रों में आम नागरिकों के जीवन स्तर (Quality of Life) को गुणात्मक रूप से ऊपर उठाया है, जिससे शहरी और ग्रामीण विभाजन कम हो रहा है.
भविष्य का रोडमैप 2.3 लाख स्टार्टअप्स और विकसित भारत @2047 का युवा नेतृत्व
भविष्य की तैयारियों का ब्योरा देते हुए लेख में रेखांकित किया गया है कि भारत आज 2.3 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स के साथ वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है. मुद्रा योजना और पीएम स्वनिधि (PM SVANidhi) के वित्तीय सहयोग से महिला उद्यमियों और छोटे शहरों के युवाओं की भागीदारी आर्थिक विकास में मुख्य स्तंभ बनकर उभरी है. 18 से 35 वर्ष के आयु वर्ग के युवाओं को ध्यान में रखकर चलाए जा रहे इस देशव्यापी रोजगार अभियान के तहत नवनियुक्त कर्मचारियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने एक महत्वपूर्ण भविष्यवादी विजन दिया. उन्होंने कहा कि रेलवे, रक्षा, गृह मंत्रालय, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल हो रहे 51,000 से अधिक कर्मियों को सहानुभूति (Empathy) और निरंतर सीखने की क्षमता के साथ काम करना होगा, क्योंकि साल 2047 तक 'विकसित भारत' (Viksit Bharat) का लक्ष्य केवल प्रशासनिक नीतियों से नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवा में लगे युवाओं के समर्पित प्रयासों से ही पूरा होगा.
Input: DDNEWS