अहमदाबाद: भारत की सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन शारीरिक-मानसिक विधा 'योग' को वैश्विक खेल मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को गुजरात के अहमदाबाद शहर में आयोजित देश की पहली और ऐतिहासिक 'विश्व योगासन चैंपियनशिप' (World Yogasana Championship) का भव्य उद्घाटन किया। इस अभूतपूर्व वैश्विक खेल महाकुंभ के शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग के प्रचार-प्रसार को एक नया आयाम देते हुए आयुष मंत्रालय के महत्वाकांक्षी अभियान 'योग 365' (Yoga 365) का औपचारिक शंखनाद किया। इस दौरान उन्होंने प्रतियोगिता में भाग ले रहे दुनिया भर के शीर्ष एथलीटों से अपील की कि वे जब अपने गृह देशों को लौटें, तो इस आंदोलन के वैश्विक राजदूत (Global Ambassadors) के रूप में कार्य करें।
अहमदाबाद में आयोजित इस भव्य उद्घाटन समारोह में डिजिटल माध्यम से जुड़े और उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि योग केवल भारत की प्राचीन धरोहर मात्र नहीं है, बल्कि संपूर्ण मानवता को मिला एक ऐसा अमूल्य उपहार है जो वैश्विक कल्याण और एकात्मता का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने रेखांकित किया कि 'योग 365' अभियान का मुख्य उद्देश्य योग को केवल किसी एक विशेष दिन या अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उत्सव तक सीमित न रखकर मानव जीवन के दैनिक अनुशासन का हिस्सा बनाना है। इस दूरदर्शी अभियान के तहत लोगों को वर्ष के पूरे 365 दिन योग से जुड़ने और समुदायों के भीतर एक समग्र व स्वस्थ जीवन शैली को संस्थागत रूप देने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
योग 365 अभियान निरंतर स्वास्थ्य और वैश्विक एकजुटता का नया विज़न
अपने व्यापक और प्रेरणादायी संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर विशेष बल दिया कि आयुष मंत्रालय (Ministry of AYUSH) द्वारा परिकल्पित 'योग 365' अभियान का समय और प्रासंगिकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस अभियान को आगामी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की आधिकारिक थीम "Yoga for Healthy Ageing" (स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग) के साथ एकीकृत किया। पीएम मोदी ने कहा कि आधुनिक दुनिया में जहां जीवन प्रत्याशा तो बढ़ रही है, लेकिन खराब जीवनशैली के कारण बीमारियां भी उतनी ही तेजी से पैर पसार रही हैं, ऐसे में योग बुजुर्गों और युवाओं दोनों के लिए सक्रिय और रोगमुक्त जीवन का सबसे सुलभ और वैज्ञानिक माध्यम बनकर उभरता है।
"जब आप सभी एथलीट इस प्रतियोगिता के समापन के पश्चात अपने-अपने देशों में वापस जाएं, तो केवल पदक या स्मृतियां लेकर न जाएं, बल्कि योग के इस सार्वभौमिक संदेश को भी अपने साथ लेकर जाएं। आप सभी अपने मूल देशों में 'योग 365' अभियान के मशालची और वैश्विक राजदूत बन सकते हैं। आपका व्यक्तिगत अनुभव, आपकी साधना और योग के प्रति आपका अटूट विश्वास पूरी दुनिया को इस कल्याणकारी आंदोलन से जोड़ने की क्षमता रखता है।"
प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय एथलीटों को संबोधित करते हुए कहा कि खिलाड़ी के रूप में उनकी बात समाज में गहरे तक सुनी और मानी जाती है। उनकी शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता को देखकर उनके देशों की युवा पीढ़ी प्रेरित होती है। इसलिए, यदि ये खिलाड़ी दैनिक जीवन में योग के अभ्यासों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देंगे, तो यह वैश्विक स्वास्थ्य क्रांति को गति देने में उत्प्रेरक का कार्य करेगा।
विश्व योगासन चैंपियनशिप 2026: मुख्य बिंदु और आंकड़े
- आयोजन स्थल: अहमदाबाद, गुजरात (भारत)
- आयोजन की अवधि: 4 जून से 8 जून 2026 तक पांच दिवसीय वैश्विक स्पर्धा
- वैश्विक भागीदारी: दुनिया के 60 से अधिक देशों के शीर्ष खिलाड़ियों का जमावड़ा
- प्रतिभागियों की संख्या: 400 से अधिक पेशेवर योगासन एथलीट ले रहे हैं हिस्सा
- मुख्य संरक्षक: आयुष मंत्रालय (भारत सरकार), भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और अंतरराष्ट्रीय योगासन खेल महासंघ
- केंद्रीय फोकस: योगासन को ओलंपिक और अन्य बहु-खेल प्रतियोगिताओं में एक संरचित अंतरराष्ट्रीय खेल के रूप में स्थापित करना।
अहमदाबाद में वैश्विक इतिहास का निर्माण एक खेल के रूप में योगासन का उदय
यह पहला अवसर है जब भारत 'विश्व योगासन चैंपियनशिप' की मेजबानी कर रहा है, जिसे खेल इतिहास में एक युगांतकारी घटना माना जा रहा है। 4 जून से शुरू होकर 8 जून 2026 तक चलने वाली इस पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप को योगासन को एक औपचारिक, नियमबद्ध और संरचित अंतरराष्ट्रीय खेल (Structured International Sport) के रूप में विकसित करने के एक बहुत बड़े और सुनियोजित प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। अब तक योग को मुख्य रूप से एक आध्यात्मिक या शारीरिक व्यायाम पद्धति माना जाता रहा है, परंतु इस चैंपियनशिप के माध्यम से इसे दुनिया के सामने एक प्रतिस्पर्धी खेल विधा के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
इस चैंपियनशिप में कलात्मक योगासन (Artistic Yogasana), लयबद्ध योगासन (Rhythmic Yogasana) और पारंपरिक योगासन जैसी विभिन्न श्रेणियों में कड़े मुकाबले देखने को मिलेंगे। खेल विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से योगासन को भविष्य में एशियाई खेलों और अंततः ओलंपिक खेलों में एक आधिकारिक खेल के रूप में शामिल कराने के भारत के दावों को भारी मजबूती मिलेगी। अहमदाबाद का अत्याधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स इस वैश्विक आयोजन का गवाह बन रहा है, जहाँ 60 से अधिक देशों के 400 से अधिक चुनिंदा एथलीट अपनी शारीरिक लचीलेपन, मानसिक एकाग्रता और संतुलन का प्रदर्शन कर रहे हैं
न्यूनतम बजट में प्रिवेंटिव हेल्थकेयर का सबसे सशक्त माध्यम
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण के दौरान योग के आर्थिक और सामाजिक पहलुओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने वैश्विक नेताओं और नीति निर्माताओं का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि वर्तमान में दुनिया भर की सरकारें स्वास्थ्य ढांचों (Healthcare Infrastructure) और चिकित्सा पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद बीमारियां कम नहीं हो रही हैं। इस समस्या का समाधान बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि योग 'प्रिवेंटिव हेल्थ' (बीमारियों से बचाव) का एक अत्यंत व्यावहारिक और प्राचीन दृष्टिकोण प्रदान करता है।
उन्होंने कहा, "योग व्यक्ति को केवल भोग से ही मुक्त नहीं करता, बल्कि वह उसे भयानक रोगों से भी मुक्ति प्रदान करता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आधुनिक युग में जब स्वास्थ्य सुविधाएं अत्यंत खर्चीली हो चुकी हैं, योग न्यूनतम बजट में, या यूं कहें कि शून्य बजट में एक उत्कृष्ट और स्वस्थ जीवन शैली को बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है।" प्रधानमंत्री का यह संदेश सीधे तौर पर इस बात की पुष्टि करता है कि यदि समाज का हर वर्ग दैनिक रूप से योग को अपनाता है, तो इससे न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी काफी हद तक कम हो जाएगा।
आयुष मंत्रालय की वैश्विक कूटनीति और सॉफ्ट पावर का विस्तार
विगत कुछ वर्षों में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग की पहुंच को व्यापक बनाने के लिए कई अभूतपूर्व नीतिगत कदम उठाए हैं। 'विश्व योगासन चैंपियनशिप' का यह भव्य आयोजन भी आयुष मंत्रालय की इसी निरंतर कूटनीतिक और सांस्कृतिक रणनीति का हिस्सा है। मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय योगासन खेल शासी निकायों और विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खेल प्राधिकरणों के साथ समन्वय स्थापित करके इस खेल को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, योग भारत की 'सॉफ्ट पावर' (Soft Power) का एक अत्यंत शक्तिशाली प्रतीक बन चुका है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किए जाने के बाद से लेकर आज 'योग 365' अभियान की शुरुआत तक, भारत ने दुनिया को एक सूत्र में पिरोने के लिए योग का निरंतर उपयोग किया है। आयुष मंत्रालय इस अभियान के तहत वैश्विक स्तर पर योग गुरुओं के प्रशिक्षण, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से योग कक्षाओं के संचालन और अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों के साथ मिलकर योग के वैज्ञानिक लाभों के प्रमाणीकरण पर व्यापक कार्य कर रहा है।
वैश्विक प्रतिक्रिया और भविष्य की रूपरेखा
अहमदाबाद में उपस्थित विभिन्न देशों के खेल प्रतिनिधियों और अंतरराष्ट्रीय एथलीटों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस आह्वान का अभूतपूर्व उत्साह के साथ स्वागत किया है। उद्घाटन सत्र के बाद कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भारत आकर और इस विश्व चैंपियनशिप का हिस्सा बनकर वे खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने 'योग 365' अभियान की सराहना करते हुए कहा कि साल भर योग के अभ्यास को बढ़ावा देने का यह विचार उनके संबंधित देशों में भी स्वास्थ्य के प्रति एक नई चेतना जागृत करेगा।
| अभियान/आयोजन का नाम | नोडल एजेंसी/मंत्रालय | मुख्य उद्देश्य एवं वैश्विक प्रभाव |
|---|---|---|
| योग 365 (Yoga 365) | आयुष मंत्रालय, भारत सरकार | साल के पूरे 365 दिन योग को बढ़ावा देना, दैनिक जीवन शैली में सुधार और वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य चेतना का प्रसार। |
| विश्व योगासन चैंपियनशिप | अंतरराष्ट्रीय खेल निकाय एवं आयुष मंत्रालय | योगासन को ओलंपिक स्तर के एक संरचित और पेशेवर खेल के रूप में स्थापित करना और वैश्विक एथलीटों को मंच प्रदान करना। |
| अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 थीम | संयुक्त राष्ट्र एवं आयुष मंत्रालय | "Yoga for Healthy Ageing" (स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग) - वृद्धजनों के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखना। |
प्रधानमंत्री ने अंत में सभी आयोजकों, निर्णायक मंडलों और दुनिया भर से आए खिलाड़ियों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि खिलाड़ियों की यह प्रतिबद्धता और योग के प्रति उनका अटूट समर्पण आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग से जुड़ी विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी पहलों को एक नई ऊर्जा और गति प्रदान करेगा। यह चैंपियनशिप केवल खेल के मैदान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह मानवता को एक स्वस्थ और शांतिपूर्ण भविष्य की ओर ले जाने वाला एक महा-अभियान साबित होगी।