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12 राज्यों के लिए 10,021 करोड़ की भारी मंजूरी पर इस एक वजह से अटक सकता है अगली किश्तों का काम

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नई दिल्ली: भारत सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण और निर्धन परिवारों को स्थायी आवास उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक उच्च स्तरीय वर्चुअल कांफ्रेंस के माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत देश के 12 राज्यों के लिए 10,021.42 करोड़ रुपए की 'मूल स्वीकृति' (Original Sanction) आधिकारिक रूप से जारी कर दी है। यह वित्तीय आवंटन केंद्र सरकार के उस वृहद लक्ष्य का हिस्सा है, जिसके तहत मार्च 2029 तक देश के प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को पक्का मकान उपलब्ध कराने यानी 'सभी के लिए आवास' (Housing for All) के संकल्प को पूर्ण किया जाना है।

इस आधिकारिक प्रशासनिक एवं वित्तीय मंजूरी के दायरे में देश के 12 प्रमुख राज्यों को शामिल किया गया है, जिनमें असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, पंजाब, राजस्थान,नाडू और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने न केवल वित्तीय समीक्षा की, बल्कि राज्यों के प्रदर्शन का सांख्यिकीय मूल्यांकन करते हुए उन राज्यों को कड़े निर्देश भी जारी किए जो पिछले वित्तीय वर्षों के लक्ष्यों को प्राप्त करने में पीछे चल रहे हैं।

आवास योजना का सांख्यिकीय ढांचा: लक्ष्य बनाम वास्तविक पूर्णता की स्थिति

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत देश भर में कुल 4.95 करोड़ ग्रामीण आवासों के निर्माण का व्यापक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष, मंत्रालय अब तक कुल 3.91 करोड़ घरों के लिए प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी प्रदान कर चुका है। निर्माण कार्यों की भौतिक प्रगति का विश्लेषण करें तो अब तक देश के विभिन्न ग्रामीण अंचलों में 3.05 करोड़ से अधिक पक्के मकानों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है, जबकि शेष स्वीकृत मकान निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं।

मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने इस अवसर पर चालू वित्तीय वर्ष के बजटीय आवंटन की तकनीकी जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा 11,121 करोड़ रुपए की प्रारंभिक वित्तीय मंजूरी पहले ही राज्यों को हस्तांतरित की जा चुकी है। अब जारी की गई 10,021.42 करोड़ रुपए की राशि एक अतिरिक्त बजटीय आवंटन है, जो राज्यों में निर्माण कार्यों की गति को बाधित होने से रोकेगी। इस प्रकार, चालू वर्ष में वित्तीय और भौतिक प्रगति का स्तर पिछले वर्ष की तुलना में सांख्यिकीय रूप से तीन गुना अधिक है, जो इस योजना के क्रियान्वयन में आई अभूतपूर्व तेजी को प्रदर्शित करता है।

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बहु-योजना अभिसरण (Convergence) केवल निर्माण नहीं, बुनियादी सुविधाओं का एकीकरण

नीतिगत दृष्टिकोण से, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण अब केवल एक सिविल कंस्ट्रक्शन या नागरिक निर्माण परियोजना मात्र नहीं रह गई है। केंद्र सरकार की नई नियमावली के अनुसार, इस योजना को 'बहु-योजना अभिसरण' (Multi-Scheme Convergence) मॉडल पर संचालित किया जा रहा है। इसका तात्पर्य यह है कि स्वीकृत किए जा रहे पक्के मकानों के साथ-साथ लाभार्थियों को अन्य केंद्रीय योजनाओं का लाभ भी अनिवार्य रूप से प्रदान किया जा रहा है।

इसके अंतर्गत निर्मित होने वाले प्रत्येक आवास को निम्नलिखित बुनियादी सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है:

  • स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण): प्रत्येक स्वीकृत आवास के साथ एक कार्यात्मक शौचालय का निर्माण अनिवार्य है।
  • जल जीवन मिशन: प्रत्येक घर तक 'हर घर जल' पहल के माध्यम से सुरक्षित पेयजल का कनेक्शन पहुंचाना।
  • सौभाग्य योजना / दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना: प्रत्येक निर्मित आवास का पूर्ण विद्युतीकरण सुनिश्चित करना।
  • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना: लाभार्थी परिवार को धुएँ से मुक्त रसोई प्रदान करने के लिए एलपीजी गैस कनेक्शन का आवंटन।
  • मनरेगा (MGNREGA): आवास निर्माण प्रक्रिया के दौरान लाभार्थी को अकुशल श्रम के लिए नियमानुसार निर्धारित दिनों की मजदूरी का भुगतान।

प्रशासनिक अड़चनें और राज्यों को 30 जून 2026 तक का कड़ा अल्टीमेटम

इस वित्तीय आवंटन के साथ ही केंद्र सरकार ने राज्यों की प्रशासनिक शिथिलता पर भी गंभीर रुख अपनाया है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समीक्षा के दौरान यह रेखांकित किया कि देश के कुछ राज्य अभी भी वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए निर्धारित किए गए आवास लक्ष्यों के अनुरूप अपनी आधारभूत और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूर्ण करने में विफल रहे हैं।

सदन की वित्तीय शुचिता और समयबद्धता को बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने इन राज्यों को 30 जून, 2026 तक की अंतिम समय-सीमा (Deadline) प्रदान की है। राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे आवंटन प्रतिबंधों का समय पर निपटान करें, पूर्व में स्वीकृत और लंबित पड़े मकानों (Silted Houses) के निर्माण कार्य में तेजी लाएं और जारी की गई धनराशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) शीघ्रता से प्रस्तुत करें। यदि नियत तिथि तक प्रक्रियाएं पूर्ण नहीं की जाती हैं, तो आगामी वित्तीय किश्तों की समीक्षा की जा सकती है।

भूमिहीन परिवारों की समस्या और राज्यों से विशेष पहल का आग्रह

योजना के क्रियान्वयन में आने वाली सबसे बड़ी व्यावहारिक और विनियामक बाधाओं में से एक 'भूमिहीन गरीब परिवारों' की पहचान और उन्हें आवास स्थल उपलब्ध कराना है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के विश्लेषण में यह तथ्य सामने आया है कि कई अत्यंत निर्धन परिवार योजना के लिए पात्र होने के बावजूद केवल इसलिए पक्के मकान से वंचित रह जाते हैं क्योंकि उनके पास स्वयं की कोई कृषि या आवासीय भूमि उपलब्ध नहीं होती है।

इस विनियामक समस्या के समाधान के लिए, केंद्रीय मंत्री ने सभी राज्य सरकारों और उनके राजस्व विभागों से आग्रह किया है कि वे ऐसे भूमिहीन पात्र परिवारों को चिन्हित कर उन्हें सरकारी भूमि आवंटित करने या भूमि क्रय करने के लिए विशेष वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु राज्य स्तर पर एक विशेष टास्क फोर्स या पहल की शुरुआत करें, ताकि मार्च 2029 के अंतिम लक्ष्य को शत-प्रतिशत प्राप्त किया जा सके।

महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा का सांख्यिकीय प्रमाण

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के सामाजिक और लैंगिक प्रभावों का मूल्यांकन करें, तो यह योजना ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण के एक प्रमुख संवाहक के रूप में उभरी है। आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि इस योजना के अंतर्गत देश भर में स्वीकृत किए गए कुल आवासों में से लगभग 75 प्रतिशत आवास या तो सीधे तौर पर महिलाओं के नाम पर पंजीकृत हैं या फिर उन्हें पति-पत्नी के संयुक्त स्वामित्व (Joint Ownership) के तहत स्वीकृत किया गया है।

यह सांख्यिकीय समावेशन ग्रामीण महिलाओं को न केवल वित्तीय परिसंपत्तियों पर कानूनी अधिकार प्रदान करता है, बल्कि उनकी सामाजिक सुरक्षा, गरिमा और परिवार के भीतर उनकी निर्णय लेने की क्षमता (Decision-making power) को भी संस्थागत रूप से सुदृढ़ करता है।

राज्यों द्वारा नवाचार और पर्यावरण संरक्षण की नई कड़ियां

मंत्रालय ने देश के विभिन्न राज्यों द्वारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अपनाए जा रहे तकनीकी और प्रशासनिक नवाचारों (Innovations) की सराहना की है। कई राज्यों ने मानसून के मौसम को ध्यान में रखते हुए विशेष 'मानसून पहल' की शुरुआत की है, जिसके तहत निम्नलिखित प्रणालियों को सुदृढ़ किया गया है:

  • शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal System): लाभार्थियों की समस्याओं के त्वरित निपटान के लिए समर्पित हेल्पलाइन।
  • वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting): नए निर्मित होने वाले ग्रामीण घरों में जल संरक्षण की प्रणालियों का एकीकरण।
  • आजीविका संवर्धन (Livelihood Promotion): स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से लाभार्थियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना।
  • राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम (Rural Mason Training): ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को राजमिस्त्री का व्यावसायिक प्रशिक्षण देना, जिससे निर्माण की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

इसके अतिरिक्त, योजना को पर्यावरण संरक्षण के वैश्विक अभियान से जोड़ते हुए, केंद्रीय मंत्री ने प्रत्येक लाभार्थी से अपील की है कि वे आगामी 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर केंद्र सरकार के 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत अपने नवनिर्मित या निर्माणाधीन आवास परिसर में कम से कम एक पौधे का रोपण अवश्य करें और उसकी सुरक्षा का दायित्व संभालें।


PMAY-G: योजना की वर्तमान प्रगति और वित्तीय संरचना का तुलनात्मक विवरण

नीतिगत प्रगति और सांख्यिकीय स्थिति को स्पष्ट रूप से समझने के लिए नीचे दी गई तालिका में योजना के प्रमुख संकेतकों का विवरण दिया गया है:

क्र.सं. प्रमुख योजना संकेतक (Key Indicators) सांख्यिकीय आंकड़े / निर्धारित लक्ष्य वर्तमान स्थिति एवं प्रशासनिक प्रभाव
1 कुल निर्धारित राष्ट्रीय लक्ष्य 4.95 करोड़ आवास मार्च 2029 तक संपूर्ण भारत में पूरा करने का अंतिम लक्ष्य।
2 अब तक स्वीकृत कुल आवास 3.91 करोड़ आवास कुल लक्ष्य का लगभग 79% प्रशासनिक रूप से स्वीकृत।
3 भौतिक रूप से पूर्ण हो चुके आवास 3.05 करोड़ से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में लाभार्थी परिवारों को पक्के मकान हस्तांतरित।
4 वित्त वर्ष 2026-27 प्रारंभिक आवंटन 11,121 करोड़ रुपए चालू वित्तीय वर्ष की शुरुआत में राज्यों को जारी की गई राशि।
5 नवीन अतिरिक्त वित्तीय स्वीकृति 10,021.42 करोड़ रुपए 12 राज्यों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए जारी अतिरिक्त फंड।
6 महिला स्वामित्व का प्रतिशत लगभग 75 प्रतिशत एकल या संयुक्त स्वामित्व के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा सुदृढ़।
7 लंबित प्रक्रियाओं की अंतिम तिथि 30 जून, 2026 पिछड़ रहे राज्यों के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करने की समय-सीमा।

केंद्र सरकार द्वारा जारी इस भारी-भरकम बजट और कड़े विनियामक दिशानिर्देशों से स्पष्ट है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय समयबद्ध तरीके से देश के बुनियादी ढांचे का कायाकल्प करने के प्रति गंभीर है। 30 जून 2026 की समय-सीमा के भीतर राज्यों का प्रदर्शन यह तय करेगा कि आगामी किश्तों का प्रवाह किस गति से होता है और ग्रामीण भारत में 'सभी के लिए पक्के मकान' का सपना कितनी जल्दी धरातल पर पूरी तरह साकार होता है।

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