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रिलायंस के नतीजे: जियो और रिटेल की रफ़्तार बरकरार, लेकिन मुनाफे पर पड़ी 'ग्लोबल टेंशन' की मार

रिलायंस के नतीजे: जियो और रिटेल की रफ़्तार बरकरार, लेकिन मुनाफे पर पड़ी 'ग्लोबल टेंशन' की मार

मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। जहां जियो और रिटेल सेक्टर में कंपनी का प्रदर्शन शानदार रहा, वहीं पश्चिम एशिया के तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने शुद्ध मुनाफे पर दबाव डाला है।

मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने शुक्रवार को अपने चौथी तिमाही (Q4 FY26) के वित्तीय परिणाम घोषित किए। इस बार के नतीजे मिले-जुले रहे हैं। एक तरफ जहां कंपनी का कुल रेवेन्यू (राजस्व) पिछले साल के मुकाबले 13% बढ़कर 2.98 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, वहीं नेट प्रॉफिट (शुद्ध लाभ) में 13% की गिरावट दर्ज की गई है। इस तिमाही में कंपनी को 16,971 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ, जो पिछले साल इसी दौरान 19,407 करोड़ रुपये था।

हालांकि, मुनाफे में इस गिरावट के पीछे तेल की कीमतों में अस्थिरता और ग्लोबल सप्लाई चेन में आई रुकावटों को बड़ा कारण माना जा रहा है। कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए 6 रुपये प्रति शेयर के डिविडेंड (लाभांश) की भी सिफारिश की है।

क्या है पूरा मामला

रिलायंस का बिजनेस मॉडल बेहद फैला हुआ है, जिसे मोटे तौर पर तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है— तेल और केमिकल (O2C), टेलिकॉम (Jio), और रिटेल। इस तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि रिलायंस अब पूरी तरह से एक 'कंज्यूमर-ड्रिवन' कंपनी बनती जा रही है।

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जहां रिलायंस जियो का नेट प्रॉफिट 13% बढ़कर 7,935 करोड़ रुपये रहा, वहीं रिलायंस रिटेल का प्रदर्शन भी स्थिर रहा। असल चुनौती O2C (Oil-to-Chemical) सेगमेंट में देखने को मिली, जहां रेवेन्यू तो बढ़ा लेकिन मार्जिन में कमी आई। मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में चल रहे तनाव की वजह से कच्चे तेल के शिपमेंट पर माल ढुलाई (Freight) और बीमा लागत बढ़ गई, जिसका सीधा असर कंपनी के बॉटम लाइन पर पड़ा।

रिलायंस जियो डिजिटल इंडिया

जियो के लिए यह तिमाही किसी जीत से कम नहीं रही। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 44,928 करोड़ रुपये रहा। सबसे बड़ी खबर यह है कि जियो का ARPU (प्रति यूजर औसत कमाई) बढ़कर 214 रुपये हो गया है। यह आंकड़ा इस बात का सबूत है कि लोग अब महंगे प्लान और ज्यादा डेटा का इस्तेमाल कर रहे हैं।

जियो ने इस तिमाही में 91 लाख नए ग्राहक जोड़े हैं। दिलचस्प बात यह है कि डेटा की खपत में जबरदस्त उछाल देखा गया है। अब एक औसत जियो यूजर महीने भर में लगभग 42.3 GB डेटा इस्तेमाल कर रहा है। मुकेश अंबानी ने संकेतों में यह भी कहा कि 'जियो प्लेटफॉर्म्स' की शेयर बाजार में लिस्टिंग (IPO) की दिशा में काम तेजी से चल रहा है, जो आने वाले समय में निवेशकों के लिए बड़ा मौका हो सकता है।

रिलायंस रिटेल गांव-शहर तक मजबूत पकड़

रिटेल सेक्टर में रिलायंस की बादशाहत कम होने का नाम नहीं ले रही। रिलायंस रिटेल का रेवेन्यू 11% बढ़कर 87,344 करोड़ रुपये हो गया है। कंपनी ने इस तिमाही में 333 नए स्टोर खोले, जिससे अब उनके कुल स्टोर्स की संख्या 20,160 हो गई है।

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रिलायंस का ध्यान अब सिर्फ किराना तक सीमित नहीं है। उनका 'न्यू कॉमर्स' बिजनेस यानी जियोमार्ट (JioMart) और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स अब 1200 से ज्यादा शहरों में फैल चुके हैं। रिटेल सेक्टर के मुनाफे में 0.5% की मामूली बढ़त हुई है, लेकिन जानकारों का कहना है कि नए स्टोर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च की वजह से मुनाफा अभी स्थिर दिख रहा है, जो लॉन्ग टर्म में बड़ा रिटर्न देगा।

O2C सेगमेंट ग्लोबल संकट का सीधा असर

रिलायंस का सबसे पुराना और बड़ा बिजनेस 'Oil-to-Chemical' (O2C) इस बार चुनौतियों से घिरा रहा। इसका रेवेन्यू 12% जरूर बढ़ा, लेकिन EBITDA में 4% की गिरावट आई। असल में, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और रेड सी (लाल सागर) के रूट में आ रही परेशानियों ने रिलायंस जैसी कंपनियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव के बावजूद, रिलायंस ने घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति को प्राथमिकता दी। कंपनी ने बताया कि देशहित में उन्होंने अपनी गैस और तेल की सप्लाई को डोमेस्टिक मार्केट की तरफ डायवर्ट किया, ताकि भारत में ईंधन की कमी न हो।

जियोस्टार और मीडिया

मीडिया और मनोरंजन के क्षेत्र में 'जियोस्टार' एक पावरहाउस बनकर उभरा है। इस तिमाही में इसका रेवेन्यू 9,784 करोड़ रुपये रहा। टी20 वर्ल्ड कप के दौरान 'जियोहॉटस्टार' ने 7.25 करोड़ यूजर्स की पीक कॉन्करेंसी का रिकॉर्ड बनाया, जो पूरी दुनिया में किसी भी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

रिलायंस की कुल टीवी व्यूअरशिप शेयर अब 34.2% है, जिसका मतलब है कि देश के हर तीन टीवी देखने वालों में से एक रिलायंस के नेटवर्क का कंटेंट देख रहा है। इसके अलावा, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का पानी का बिजनेस भी तेजी से बढ़ रहा है और कंपनी अब देश की तीसरी सबसे बड़ी पानी विक्रेता बन गई है।

मुकेश अंबानी का विजन आगे क्या हो सकता है ?

नतीजों पर टिप्पणी करते हुए मुकेश अंबानी ने कहा कि रिलायंस का डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने साफ कर दिया कि दुनिया में चाहे कितनी भी अस्थिरता हो, रिलायंस भारत की ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल क्रांति के प्रति प्रतिबद्ध है।

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मार्केट और निवेशकों पर असर

नतीजों की घोषणा से पहले शुक्रवार को रिलायंस का शेयर करीब 1.16% गिरकर 1,327.80 रुपये पर बंद हुआ। निवेशकों को शायद मुनाफे में थोड़ी ज्यादा उम्मीद थी। हालांकि, पिछले एक साल में शेयर ने स्थिर रिटर्न दिया है। रिलायंस अभी भी 18 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के मार्केट कैप के साथ भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है।

कुल मिलाकर, रिलायंस के नतीजे बताते हैं कि कंपनी अब अपनी पुरानी तेल पहचान को पीछे छोड़ते हुए पूरी तरह से टेक्नोलॉजी और रिटेल दिग्गज बनने की दिशा में मुड़ चुकी है। हालांकि ग्लोबल परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन रिलायंस के पास उनसे निपटने का मजबूत अनुभव और कैश रिजर्व है।

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