वाशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे व्यापक भू-राजनीतिक गतिरोध के बीच वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर एक नया और गंभीर तनाव उभर कर सामने आया है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब क्षेत्र के अन्य तटस्थ देशों को भी प्रभावित करने लगा है। इस सिलसिले में एक महत्वपूर्ण राजनयिक घटनाक्रम के तहत, मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार (Ishaq Dar) वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) से मुलाकात करने पहुंचे हैं। हालांकि, राजनयिक हलकों में इस यात्रा के वास्तविक एजेंडे और इसके दूरगामी परिणामों को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है।
यह कूटनीतिक हलचल ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मार्च के मध्य से ही निरंतर यह दावा कर रहे हैं कि दोनों पक्षों के बीच युद्ध की समाप्ति निकट है। इसके विपरीत, धरातल पर अमेरिका और ईरान दोनों ही पक्षों की ओर से अपने सार्वजनिक रुख में कोई लचीलापन या सामान्य सहमति की दिशा में प्रगति नहीं देखी गई है। ईरान ने वार्ता के लिए अमेरिका के समक्ष अपनी प्रारंभिक शर्तें रखी हैं, जिनमें उसके ऊपर लगाए गए कूटनीतिक और आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना, विदेशी बैंकों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को बहाल करना और मध्य पूर्व क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की पूर्ण वापसी शामिल है। वहीं, दूसरी ओर वाशिंगटन ने अपना पुराना रुख दोहराते हुए ईरान से अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करने की मांग की है, जिसे तेहरान लगातार शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए संचालित होने का दावा करता रहा है।
ओमान को सैन्य कार्रवाई की धमकी: होर्मुज जलडमरूमध्य में टोल टैक्स का विवाद
इस पूरे रणनीतिक गतिरोध में सबसे अप्रत्याशित और गंभीर मोड़ तब आया जब अमेरिका ने ओमान को एक कड़ा आधिकारिक कूटनीतिक अल्टीमेटम जारी कर दिया। वाशिंगटन ने ओमान को चेतावनी दी है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में किसी भी प्रकार का टोल टैक्स या शुल्क लगाने के ईरानी प्रयासों में शामिल न हो। राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को एक कड़ा रुख अपनाते हुए ओमान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई (बमबारी) तक की धमकी दे डाली है। अमेरिका का यह आक्रामक बयान इस दृष्टिकोण से विश्लेषकों को चौंका रहा है क्योंकि अमेरिका और ओमान के बीच एक लंबा आर्थिक और सैन्य सहयोग का इतिहास रहा है।
इस सैन्य धमकी के बाद उपजे तनाव को नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास शुरू हो गए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री (Treasury Secretary) स्कॉट बेसेन्ट (Scott Bessent) ने इस संदर्भ में एक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि ओमान के राजदूत ने उनसे व्यक्तिगत मुलाकात कर यह आश्वासन दिया है कि ओमान की ऐसी किसी भी प्रकार की टोल टैक्स प्रणाली को लागू करने की कोई योजना नहीं है। ओमान सरकार ने आधिकारिक तौर पर ईरान के साथ जलडमरूमध्य के संयुक्त नियंत्रण के विचार पर कोई सार्वजनिक वक्तव्य जारी नहीं किया है। ओमान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, तेहरान के साथ उनकी बातचीत केवल अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप 'नौवहन की स्वतंत्रता' (Freedom of Navigation) को बनाए रखने तक सीमित थी। इस बीच, तेहरान ने अमेरिकी अधिकारियों द्वारा दी गई धमकियों की कड़ी निंदा करते हुए ओमान के प्रति अपनी पूर्ण कूटनीतिक एकजुटता व्यक्त की है।
लेबनान संकट: शांति समझौते की राह में सबसे बड़ा विनियामक गतिरोध
ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी संभावित शांति समझौते के मार्ग में लेबनान और इजरायल के बीच जारी सैन्य संघर्ष इस समय सबसे बड़ी व्यावहारिक बाधा बना हुआ है। ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी कूटनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर करने से पूर्व उसके क्षेत्रीय सहयोगी देश लेबनान पर इजरायल द्वारा किए जा रहे हमलों को पूरी तरह रोकना होगा। हालांकि, इस मोर्चे पर युद्धविराम के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं।
इजरायली सैन्य कमान के आधिकारिक बयानों के अनुसार, इजरायली वायुसेना ने लेबनान के दक्षिणी शहर टायर (Tyre) में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह लड़ाकों के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर भारी बमबारी की है। इसके अतिरिक्त, लेबनान की राजधानी बेरूत (Beirut) में भी रणनीतिक हवाई हमले किए गए हैं। हिजबुल्लाह को पीछे धकेलने के उद्देश्य से लेबनान के भीतर तक किए जा रहे इजरायली सैन्य अभियानों के कारण अब तक लाखों की संख्या में नागरिक विस्थापित हो चुके हैं। इस संघर्ष की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लेबनानी सेना ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि इजरायल के एक हालिया हमले में उनका एक नियमित सैनिक भी मारा गया है, जिससे इस संघर्ष के बहुपक्षीय युद्ध में बदलने का खतरा और बढ़ गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट: वैश्विक महाशक्तियों और क्षेत्रीय देशों का रणनीतिक रुख
इस भू-राजनीतिक संकट में शामिल विभिन्न देशों के आधिकारिक दावों, मांगों और उनकी रणनीतिक स्थितियों को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका में एक व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है:
| देश / पक्ष | मुख्य कूटनीतिक मांगें और आधिकारिक रुख | रणनीतिक हित एवं चिंताएं | संभावित आर्थिक एवं सुरक्षा प्रभाव |
|---|---|---|---|
| संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) | ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूर्णतः समाप्त करे; ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य में टोल लगाने की नीति से दूर रहे। | वैश्विक तेल आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अपने क्षेत्रीय सहयोगी इजरायल का संरक्षण। | यदि ओमान पर सैन्य कार्रवाई होती है, तो अमेरिका के पारंपरिक द्विपक्षीय आर्थिक व सैन्य संबंधों को गंभीर क्षति पहुंचेगी। |
| ईरान (Iran) | सभी अमेरिकी प्रतिबंध हटाए जाएं; विदेशी संपत्तियां अनफ्रीज हों और लेबनान में इजरायली हमले तुरंत बंद हों। | क्षेत्र में हिजबुल्लाह का राजनीतिक अस्तित्व बचाना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना रणनीतिक प्रभाव कायम रखना। | प्रतिबंध न हटने की स्थिति में ईरान द्वारा जलडमरूमध्य में नौवहन प्रतिबंधों को कड़ा करने का प्रयास किया जा सकता है। |
| ओमान (Oman) | जलडमरूमध्य के संयुक्त नियंत्रण से इनकार; केवल 'नौवहन की स्वतंत्रता' पर वार्ता की पुष्टि। | अमेरिका के साथ ऐतिहासिक व्यापारिक संबंधों को बचाना और पड़ोसी देश ईरान के साथ संतुलन बनाए रखना। | वाशिंगटन की सैन्य धमकी के कारण ओमान को अपनी रक्षा नीतियों और कूटनीतिक तटस्थता की समीक्षा करनी पड़ रही है। |
| इजरायल (Israel) | बेरूत और टायर में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर निरंतर सैन्य कार्रवाई जारी रखना। | अपनी उत्तरी सीमाओं को सुरक्षित करना और ईरान समर्थित सैन्य समूहों की क्षमता को पूरी तरह समाप्त करना। | लेबनानी सेना के जवानों के हताहत होने से इस मोर्चे पर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना। |
इस सांख्यिकीय और भू-राजनीतिक परिदृश्य से यह स्पष्ट है कि मध्य पूर्व का यह संकट केवल दो देशों तक सीमित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर संपूर्ण विश्व के कुल तेल परिवहन का एक बहुत बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यदि ओमान और ईरान मिलकर किसी भी प्रकार के विनियामक शुल्क या प्रतिबंधों को लागू करने का प्रयास करते हैं, या यदि अमेरिका अपने दावों के अनुसार सैन्य कदम उठाता है, तो इसके फलस्वरूप वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारी अस्थिरता उत्पन्न होना तय है। वाशिंगटन में होने वाली मार्को रुबियो और इशाक डार की बैठक इस रणनीतिक गतिरोध को सुलझाने में कितनी प्रभावी रहती है, इस पर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की पैनी नजर रहेगी।