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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का बड़ा आदेश AIIMS दिल्ली की टीम करेगी दूसरा पोस्टमॉर्टम CBI जांच की सिफारिश

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का बड़ा आदेश AIIMS दिल्ली की टीम करेगी दूसरा पोस्टमॉर्टम CBI जांच की सिफारिश

भोपाल/जबलपुर: मध्य प्रदेश के बहुचर्चित त्विशा शर्मा कथित आत्महत्या और दहेज उत्पीड़न मामले में शुक्रवार को अदालती गलियारों से लेकर पुलिस महकमे तक भारी नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला. पिछले 10 दिनों से लगातार फरार चल रहे मुख्य आरोपी और मृतका के पति समर्थ सिंह (पेशा-वकील) ने शुक्रवार को जबलपुर जिला अदालत में आत्मसमर्पण (Surrender) करने की कोशिश की, जहां पुलिस ने उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया. दूसरी तरफ, इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश पारित करते हुए मृतका के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम (Second Autopsy) एम्स (AIIMS) दिल्ली के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से कराने की मंजूरी दे दी है. साथ ही, राज्य सरकार ने मामले की निष्पक्षता के लिए इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की आधिकारिक सिफारिश कर दी है.

जबलपुर कोर्ट परिसर में शुक्रवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई जब आरोपी समर्थ सिंह अपना चेहरा टोपी, सर्जिकल मास्क और काले चश्मे से पूरी तरह छिपाकर सरेंडर करने पहुंचे. जैसे ही उनके वहां होने की खबर फैली, मीडियाकर्मियों और वकीलों की भारी भीड़ जमा हो गई. पत्रकारों द्वारा "क्या आप क्रिमिनल हैं?" और "उस रात क्या हुआ था?" जैसे तीखे सवालों के बीच समर्थ सिंह को धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा और पुलिस ने उन्हें सुरक्षित निकालकर भोपाल पुलिस की विशेष टीम के हवाले कर दिया. भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि कानूनी प्रावधानों के तहत उन्हें 24 घंटे के भीतर अदालत में पेश किया जाएगा.

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: एम्स दिल्ली की टीम करेगी दोबारा पोस्टमॉर्टम

त्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अवनिंद्र कुमार सिंह ने निर्देश दिया कि चूंकि महिला की मृत्यु शादी के महज छह महीने के भीतर हुई है, इसलिए सभी संशयों को दूर करने के लिए दोबारा पोस्टमॉर्टम कराया जाना न्यायसंगत है. हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वे एक विशेष विमान (Special Flight) की व्यवस्था कर एम्स दिल्ली के फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम को भोपाल बुलाएं, जो इस प्रक्रिया को पूरी निष्पक्षता से अंजाम देगी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आदेश का उद्देश्य पिछली रिपोर्ट पर उंगली उठाना नहीं, बल्कि न्याय की पारदर्शिता सुनिश्चित करना है.

इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने आरोपी समर्थ सिंह की मां और पूर्व जिला जज (Retired Judge) गिरिबाला सिंह को राहत देने से इनकार करते हुए उन्हें 25 मई या उससे पहले अदालत में पेश होने का कड़ा नोटिस जारी किया है. भोपाल पुलिस ने अदालत को बताया कि पूर्व जज गिरिबाला सिंह जांच में बिल्कुल सहयोग नहीं कर रही हैं और उन्होंने सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश की है. पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि मृतका की मौत के बाद पूर्व जज ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने के लिए कई प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारियों को फोन कॉल्स किए थे, जिसके चलते स्थानीय कोर्ट से मिली उनकी अग्रिम जमानत को रद्द करने की याचिका दायर की गई है.

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बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) का बड़ा एक्शन: वकालत का लाइसेंस सस्पेंड

कानूनी मोर्चे पर आरोपी समर्थ सिंह को एक और बड़ा झटका लगा है. बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने एक आपातकालीन आदेश जारी करते हुए नेशनल लॉ स्कूल (NLSIU) के पूर्व छात्र और साल 2018 से नामांकित एडवोकेट समर्थ सिंह का वकालत का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. बार काउंसिल ने अपने आदेश में सख्त लहजे में कहा कि एक वकील पर दहेज मृत्यु, क्रूरता और गंभीर प्रताड़ना जैसी संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज है. आरोपी का इतने दिनों तक फरार रहना और जांच में सहयोग न करना विधिक पेशे की गरिमा और जनमानस में वकीलों की छवि को गंभीर रूप से धूमिल करता है, इसलिए यह अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक थी.

क्या है पूरा मामला और ससुराल पक्ष के संगीन दावे?

मूल रूप से नोएडा की रहने वाली 33 वर्षीय त्विशा शर्मा (पूर्व मिस पुणे विजेता) ने बीते वर्ष 25 दिसंबर 2025 को समर्थ सिंह से शादी की थी. दोनों की मुलाकात एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी. शादी के महज पांच महीने बाद, 12 मई 2026 की रात को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित उनके फ्लैट में त्विशा का शव संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका मिला था. त्विशा के परिवार ने आरोप लगाया कि शादी के तुरंत बाद से ही पति और सास द्वारा भारी नकदी, वित्तीय मांग और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना का सिलसिला शुरू हो गया था, जिससे तंग आकर उनकी बेटी की जान चली गई या उसकी हत्या कर इसे आत्महत्या का रूप दिया गया.

यह मामला तब और ज्यादा विवादित हो गया जब आरोपी पति समर्थ सिंह की मां (पूर्व जज गिरिबाला सिंह) ने मीडिया के सामने आकर मृतका त्विशा शर्मा के चरित्र और मानसिक स्थिति पर कीचड़ उछालना शुरू कर दिया. पूर्व जज ने दावा किया कि त्विशा सिज़ोफ्रेनिया (Schizophrenia) जैसी गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित थीं, उसकी दवाइयां खाती थीं और उन्हें गांजा (Marijuana) जैसी नशीली चीजों की लत थी. इस दावे को मृतका के पिता नवनिधि शर्मा ने पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत बताते हुए कहा कि यह उनकी बेटी की मौत के बाद उसकी छवि खराब करने और खुद को बचाने की एक सोची-समझी न्यायिक साजिश है.

पब्लिक इम्पैक्ट और समाज पर गहरा प्रभाव (Public Impact)

इस केस ने देश भर की आम जनता, विशेषकर कामकाजी और आत्मनिर्भर महिलाओं के परिवारों को झकझोर कर रख दिया है. सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि एक पूर्व मिस पुणे विजेता और आर्थिक रूप से स्वतंत्र महिला भी शादी के पांच महीने के भीतर दहेज और घरेलू हिंसा की वेदी पर चढ़ गई. समाज में यह बहस तेज हो गई है कि जब न्याय के रक्षक (पूर्व जज और वकील) ही खुद कानून को अपने हाथ में लेकर ऐसी कुप्रथाओं में संलिप्त पाए जाते हैं, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे. टीवी अभिनेत्रियों और महिला संगठनों ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए युवा लड़कियों को शादी के नाम पर होने वाले इस 'फेयरी टेल' के भ्रम से बाहर निकलने और शोषण के खिलाफ तुरंत आवाज उठाने की अपील की है.

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आगे की राह और रणनीतिक विश्लेषण 

त्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने मांग की है कि चूंकि आरोपी पक्ष न्यायिक पृष्ठभूमि से आता है, इसलिए स्थानीय पुलिस पर दबाव बनाया जा सकता है. राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को केस सौंपने की अधिसूचना जारी होने के बाद अब सीबीआई को बिना किसी देरी के इस मामले की कमान तुरंत संभालनी चाहिए ताकि महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) को नष्ट होने से बचाया जा सके.

आने वाले दिनों में एम्स दिल्ली की टीम द्वारा किया जाने वाला दूसरा पोस्टमॉर्टम इस केस की दिशा तय करने में सबसे बड़ा 'टर्निंग पॉइंट' साबित होगा. यदि इस फॉरेंसिक जांच में चोट के निशान या किसी भी तरह की विसंगति पाई जाती है, तो आरोपियों पर दर्ज धाराएं आत्महत्या के उकसावे (Abetment to Suicide) से बदलकर सीधे हत्या (Murder) में तब्दील हो सकती हैं. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में कानून के रक्षकों का ही कानून के शिकंजे में आना यह संदेश देता है कि न्याय प्रणाली किसी भी रसूखदार को बख्शने वाली नहीं है.

Admin Desk

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