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पैसा चाहिए तब पापा याद आते हैं भाई प्रतीक बब्बर पर सरेआम भड़के आर्य बब्बर लगाए गंभीर आरोप

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मुंबई: दिग्गज अभिनेता और राजनेता राज बब्बर का परिवार एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई फिल्मी कामयाबी नहीं बल्कि घर की अंदरूनी कलह है. राज बब्बर के बड़े बेटे आर्य बब्बर ने एक हालिया इंटरव्यू में अपने सौतेले भाई प्रतीक बब्बर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बेहद तीखे और गंभीर आरोप लगाए हैं. आर्य ने प्रतीक पर पिता की संपत्ति और नाम का फायदा उठाने और बाद में उन्हें नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है. इसके साथ ही आर्य ने अपने पिता के दिवंगत अभिनेत्री स्मिता पाटिल और सदाबहार अभिनेत्री रेखा के साथ रहे कथित संबंधों पर भी बेहद बेबाक प्रतिक्रिया दी है, जिसने बॉलीवुड गलियारों में हलचल मचा दी है.

 (Photo credit : TOI) 

 

पारिवारिक विवाद तब खुलकर सामने आया जब प्रतीक बब्बर ने प्रिया बनर्जी से शादी के दौरान अपने पिता राज बब्बर और उनके पहले परिवार (नादिरा बब्बर, आर्य और जूही) को आमंत्रित नहीं किया. इस पर दुख और गुस्सा जाहिर करते हुए आर्य बब्बर भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि जब प्रतीक का अपनी पहली पत्नी सान्या सागर से तलाक हुआ था, तब तक सब ठीक था. लेकिन जैसे ही उनके जीवन के विवाद सुलझे, उन्होंने अचानक बब्बर परिवार से पूरी तरह नाता तोड़ लिया. आर्य ने कहा कि उन्होंने और उनकी बहन जूही ने प्रतीक से संपर्क करने की कई कोशिशें कीं, लेकिन प्रतीक और उनकी पत्नी प्रिया ने कोई जवाब नहीं दिया. दुनिया के सामने बब्बर परिवार को विलेन और प्रतीक को हमेशा पीड़ित (Victim) के रूप में पेश किया जाता है, जो कि सरासर गलत है.

दौलत चाहिए तो पिता सम्मान देना हो तो कुछ नहीं'—प्रतीक पर आर्य का सीधा हमला

आर्य बब्बर ने प्रतीक की खिंचाई करते हुए वित्तीय और भावनात्मक शोषण के आरोप लगाए. आर्य ने कहा कि जब करियर ठीक नहीं चल रहा होता है और गुजारे के लिए पॉकेट मनी चाहिए होती है, तब वह आपके पिता बन जाते हैं. जब आपको उस घर में रहना होता है जो पिता ने स्मिता मां के लिए खरीदा था, तब वह पिता हैं. जब सारे फायदे उठाने हों तब वह पिता हैं, लेकिन जब समाज के सामने उन्हें पिता के रूप में स्वीकार करने और सम्मान देने की बारी आती है, तो वह मुकर जाते हैं. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और विरोधाभासी व्यवहार है.

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आर्य ने इसे एक बड़ी त्रासदी बताते हुए कहा कि जिस स्मिता पाटिल के लिए उनके पिता राज बब्बर ने हंसता-खेलता परिवार छोड़ दिया था, आज उसी स्मिता मां का बेटा राज बब्बर को अपना पिता मानने और सम्मान देने को तैयार नहीं है. आर्य ने प्रतीक के बार-बार नाम बदलने की आदत (प्रतीक बब्बर से प्रतीक स्मिता, फिर प्रतीक और अब प्रतीक स्मिता पाटिल) पर भी तंज कसा और इसे अजीब बताया. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि बड़े भाई होने के नाते वह आपातकाल में हमेशा खड़े रहेंगे, लेकिन अब पहले जैसा प्यार और अपनापन दिखाना उनके लिए मुमकिन नहीं होगा.

प्रतीक स्मिता पाटिल का अपना पक्ष क्यों बदला उन्होंने नाम?

इस पूरे पारिवारिक विवाद के बीच प्रतीक बब्बर (अब प्रतीक स्मिता पाटिल) का अपना एक अलग नजरिया रहा है. प्रतीक ने पहले एक बातचीत में अपनी पहचान को लेकर चल रही आंतरिक जंग और नाम बदलने के फैसले पर खुलकर बात की थी. प्रतीक का कहना था कि वह जीवन भर इस उलझन में रहे कि वह अपनी मां के हैं या पिता के. उन्होंने कहा था, ना मैं बाप का हूं ना मां का, मैं खुद का हूं.

प्रतीक ने कहा था कि अब उन्होंने अपनी मां के नाम को पूरी तरह अपना लिया है और खुद को 'प्रतीक स्मिता पाटिल' कहलाना उनके कानों को सुकून देता है. उनका मानना है कि उनकी मां ने उनके लिए अपनी जान दे दी (childbirth complications के कारण), इसलिए वह अपनी मां के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए उनके पूरे नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं. प्रतीक बचपन से ही अपने ननिहाल में पले-बढ़े हैं और उनका झुकाव अपनी मां की विरासत की तरफ अधिक रहा है.

पिता राज बब्बर के अफेयर्स और रेखा संग अफवाहों पर आर्य का बेबाक जवाब

इंटरव्यू के दौरान जब पत्रकार ने आर्य बब्बर से उनके पिता के रंगीन मिजाज और स्मिता पाटिल के बाद अभिनेत्री रेखा के साथ उड़े अफेयर के किस्सों पर सवाल किया, तो आर्य ने बेहद व्यावहारिक और आधुनिक दृष्टिकोण अपनाया. आर्य ने कहा कि किसी भी बच्चे को यह सुनना पसंद नहीं होता कि उसके पिता का कहीं अफेयर था, लेकिन यह एक हकीकत है जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है. उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि पापा आगे बढ़े और उनका एक और अफेयर रहा, जिंदगी में इतना इमोशनल बैगेज लेकर नहीं चलना चाहिए.

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जब विशेष रूप से रेखा के बारे में पूछा गया, तो आर्य ने कहा, "अगर आप मुझसे पूछ रहे हैं कि क्या वह रेखा की तरफ आकर्षित थे—तो वह इतनी खूबसूरत हैं, कौन आकर्षित नहीं होगा? क्या आप नहीं होंगे? मैं भी हो जाऊंगा. इसलिए अगर उन्हें आकर्षण महसूस हुआ, तो हुआ. यह इंसानी फितरत है, इसमें कुछ भी गलत नहीं है." रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्मिता पाटिल के निधन (13 दिसंबर 1986) के बाद राज बब्बर गहरे सदमे में थे, और उसी दौरान रेखा भी अपने जीवन के कठिन दौर से गुजर रही थीं. उस समय दोनों ने एक-दूसरे को भावनात्मक संबल दिया था, हालांकि वह रिश्ता लंबा नहीं चला और राज बब्बर वापस अपनी पहली पत्नी नादिरा के पास लौट आए थे.

यह खबर सोशल मीडिया और इंटरनेट पर आग की तरह फैल रही है क्योंकि यह सीधे तौर पर टूटे हुए परिवारों के आधुनिक संकट, सौतेले भाई-बहनों के रिश्तों की जटिलता और बॉलीवुड के स्वर्ण काल के अनसुलझे राजों को छूती है. जनता के बीच इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या प्रतीक बब्बर का अपने पिता को छोड़ देना सही है या आर्य बब्बर का सरेआम अपने भाई को खरी-खोटी सुनाना जायज है.

मनोवैज्ञानिकों और सामाजिक विश्लेषकों के नजरिए से देखा जाए तो यह मामला दिखाता है कि माता-पिता के आपसी रिश्तों का असर बच्चों के मानसिक विकास पर ताउम्र रहता है. प्रतीक बब्बर जहां बचपन के अकेलेपन और मां को खोने के गम से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं, वहीं आर्य बब्बर को इस बात की टीस है कि उनके परिवार ने स्मिता पाटिल के निधन के बाद प्रतीक को अपनाने और पिता को माफ करने में जो बड़प्पन दिखाया, उसे प्रतीक ने बड़प्पन नहीं बल्कि उनकी कमजोरी समझ लिया. यह विवाद बॉलीवुड स्टार्स की चकाचौंध के पीछे छिपे पारिवारिक अकेलेपन और कड़वाहट को उजागर करता है.

 क्या मुमकिन है बब्बर परिवार में सुलह? 

आने वाले समय में बब्बर परिवार का यह विवाद शांत होता नहीं दिख रहा है. आर्य बब्बर के इस कड़े रुख के बाद अब सभी की नजरें प्रतीक स्मिता पाटिल और उनकी पत्नी प्रिया बनर्जी की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं. यदि प्रतीक इस पर आक्रामक पलटवार करते हैं, तो यह पारिवारिक जंग और बदसूरत मोड़ ले सकती है.

इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि राज बब्बर इस समय दोनों बेटों के बीच पिस रहे हैं. हालांकि आर्य ने कहा है कि उनकी बहन जूही और पिता राज बब्बर आज भी इतने बड़े दिल के हैं कि प्रतीक के वापस आने पर उसे गले लगा लेंगे, लेकिन आर्य ने खुद प्रतीक से एक सुरक्षित दूरी बनाए रखने का फैसला किया है. बॉलीवुड के इस प्रतिष्ठित परिवार में शांति तभी लौट सकती है जब दोनों पक्ष अतीत की कड़वाहट और लीगल-वित्तीय विवादों को भुलाकर एक टेबल पर बैठकर बात करें, जिसकी संभावना फिलहाल बेहद कम नजर आ रही है.

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