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पति पत्नी और वो 2 रिव्यू हंसी, झूठ और रिश्तों की अफरा-तफरी में उलझी आयुष्मान की कॉमेडी

पति पत्नी और वो 2 रिव्यू हंसी, झूठ और रिश्तों की अफरा-तफरी में उलझी आयुष्मान की कॉमेडी

हिंदी सिनेमा में पति-पत्नी और रिश्तों की उलझनों पर बनी कॉमेडी फिल्मों की हमेशा से एक अलग जगह रही है। 1978 में बी.आर. चोपड़ा की पति पत्नी और वो ने जिस फॉर्मूले को लोकप्रिय बनाया था, उसे 2019 में कार्तिक आर्यन की फिल्म ने नए दौर के हिसाब से पेश किया। अब निर्देशक मुदस्सर अज़ीज़ उसी फ्रेंचाइज़ी को आगे बढ़ाते हुए पति पत्नी और वो 2 लेकर आए हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार कहानी में “वो” एक नहीं बल्कि दो हैं।

आयुष्मान खुराना, वामिका गब्बी, सारा अली खान और रकुल प्रीत सिंह स्टारर यह फिल्म पूरी तरह गलतफहमियों, झूठ और रिश्तों की अफरा-तफरी पर टिकी है। फिल्म कई जगह दर्शकों को हंसाने में सफल होती है, लेकिन उतनी ही बार यह अपनी ही बनाई हुई अराजकता में फंसती भी नजर आती है।

प्रयागराज के बैकड्रॉप में उलझती कहानी

मुदस्सर अज़ीज़ ने इस बार कहानी को प्रयागराज के बैकड्रॉप में रखा है, जिससे फिल्म को थोड़ा देसी और छोटे शहर वाला स्वाद मिलता है। आयुष्मान खुराना फिल्म में प्रजापति पांडे नाम के फॉरेस्ट ऑफिसर बने हैं, जिसकी शादीशुदा जिंदगी तब उलझ जाती है जब वह अपनी कॉलेज फ्रेंड चंचल (सारा अली खान) की मदद करने की कोशिश करता है।

एक छोटी सी मदद धीरे-धीरे इतने बड़े झूठ और शक में बदल जाती है कि उसकी पत्नी अपर्णा (वामिका गब्बी) और उसकी सहयोगी निलोफर (रकुल प्रीत सिंह) भी इस पूरे ड्रामे का हिस्सा बन जाती हैं।

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कॉमिक सेटअप मजबूत, लेकिन दोहराव भारी

फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण इसका कॉमिक सेटअप है। एक तरफ प्रजापति अपनी शादी बचाने की कोशिश करता है, दूसरी तरफ वह लगातार ऐसी परिस्थितियों में फंसता जाता है जहां हर नया झूठ पहले वाले झूठ को और बड़ा बना देता है।

कई सीन्स में फिल्म अच्छी टाइमिंग की वजह से हंसी निकालने में कामयाब रहती है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब यही फॉर्मूला बार-बार दोहराया जाता है।

स्क्रीनप्ले धीरे-धीरे इतना शोरगुल वाला हो जाता है कि फिल्म में संवाद कम और चीख-पुकार ज्यादा महसूस होने लगती है। बैकग्राउंड म्यूजिक हर मजाक को जबरदस्ती मजेदार साबित करने की कोशिश करता है। कई जगह ऐसा लगता है जैसे फिल्म दर्शकों को खुद से हंसाने के बजाय यह बताना चाहती हो कि “यहां आपको हंसना है।”

आयुष्मान खुराना संभालते हैं फिल्म

आयुष्मान खुराना फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष हैं। पिछले कुछ सालों में उन्होंने छोटे शहर के साधारण लेकिन उलझे हुए आदमी का किरदार इतनी बार निभाया है कि अब वह इस जोन में बेहद सहज दिखाई देते हैं।

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प्रजापति पांडे के रूप में भी वह वही मासूम-सा चेहरा लेकर आते हैं जो परिस्थितियों में फंसता चला जाता है। उनकी कॉमिक टाइमिंग कई जगह फिल्म को संभालती है, खासकर उन दृश्यों में जहां उन्हें एक साथ कई लोगों से झूठ छिपाना पड़ता है।

हालांकि फिल्म का लगातार ऊंचे स्वर में चलना उनके अभिनय को भी कई बार ओवरड्रामैटिक बना देता है। दूसरे शब्दों में कहें तो आयुष्मान पूरी मेहनत करते हैं, लेकिन स्क्रिप्ट उन्हें ज्यादा गहराई नहीं देती।

सारा अली खान और रकुल प्रीत सिंह की मौजूदगी

सारा अली खान फिल्म की सबसे एनर्जेटिक परफॉर्मेंस देती हैं। चंचल के किरदार में वह पूरी तरह बिंदास और अनप्रेडिक्टेबल नजर आती हैं। उनके हिस्से कई मजेदार दृश्य आए हैं और सोशल मीडिया पर शुरुआती प्रतिक्रियाओं में भी उनके कॉमिक अंदाज की काफी तारीफ हुई है।

सारा स्क्रीन पर आते ही फिल्म की ऊर्जा बढ़ा देती हैं।

रकुल प्रीत सिंह का किरदार ग्लैमर और कॉमेडी का मिश्रण है। निलोफर के रूप में वह स्टाइलिश भी लगती हैं और कई जगह अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से ध्यान भी खींचती हैं।

दर्शकों के शुरुआती रिएक्शन में रकुल को फिल्म की “सरप्राइज पैकेज” परफॉर्मेंस कहा गया है। हालांकि स्क्रिप्ट उनके किरदार को ज्यादा विस्तार नहीं देती, फिर भी वह अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में सफल रहती हैं।

वामिका गब्बी का संतुलित अभिनय

वामिका गब्बी फिल्म में सबसे संतुलित अभिनय करती हैं। अपर्णा के रूप में वह कहानी की भावनात्मक कड़ी हैं, लेकिन दुर्भाग्य से स्क्रिप्ट उन्हें ज्यादा मजबूत तरीके से विकसित नहीं करती।

इसके बावजूद वामिका अपने किरदार में एक सहजता और परिपक्वता लेकर आती हैं।

फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी — लेखनी

फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी लेखनी है। कहानी में इतने सारे किरदार और गलतफहमियां जोड़ दी गई हैं कि स्क्रीनप्ले खुद ही उलझ जाता है।

जहां पुरानी पति पत्नी और वो फिल्मों में रिश्तों के भीतर का व्यंग्य और सामाजिक टिप्पणी दिखाई देती थी, वहां यह फिल्म अधिकतर समय सिर्फ शोर और गिमिक पर निर्भर रहती है।

मुदस्सर अज़ीज़ फिल्म को आधुनिक बनाने की कोशिश जरूर करते हैं। अच्छी बात यह है कि फिल्म पुराने दौर की कई सेक्सिस्ट या स्त्री विरोधी कॉमेडी से बचती है। लेकिन इसी कोशिश में फिल्म बहुत सुरक्षित भी हो जाती है।

प्रजापति को पूरी तरह “परिस्थितियों का शिकार” दिखाया गया है, जिससे कहानी का असली टकराव कमजोर पड़ जाता है।

संगीत और बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन

फिल्म का संगीत भी बहुत नया महसूस नहीं होता। कई गाने और बैकग्राउंड स्कोर पुराने बॉलीवुड रोम-कॉम की याद दिलाते हैं। कुछ ड्रीम सीक्वेंस और ग्लैमरस गाने कहानी की गति रोकते हुए सिर्फ विजुअल अपील बढ़ाने का काम करते हैं।

बॉक्स ऑफिस की बात करें तो फिल्म की शुरुआत उम्मीद से धीमी रही है। शुरुआती ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक पति पत्नी और वो 2 ने पहले दिन लगभग ₹2.99 करोड़ का कलेक्शन किया, जो 2019 की पति पत्नी और वो के मुकाबले काफी कम है। कार्तिक आर्यन की फिल्म ने अपने पहले दिन करीब ₹9 करोड़ कमाए थे।

सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया

हालांकि थिएटर में दर्शकों की प्रतिक्रियाएं पूरी तरह नकारात्मक नहीं हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई लोगों ने फिल्म के हल्के-फुल्के मनोरंजन, कॉमिक टाइमिंग और कलाकारों की केमिस्ट्री की तारीफ की है।

वहीं कुछ दर्शकों ने इसे “पुराने फॉर्मूले की रीसायकल कॉमेडी” भी कहा। कई रिव्यू में यह बात सामने आई कि फिल्म का पहला हाफ थोड़ा फीका लगता है, लेकिन कलाकार अपनी एनर्जी से उसे संभाल लेते हैं।

दरअसल यही फिल्म की असली पहचान भी है — यह एक ऐसी बॉलीवुड कॉमेडी है जो ज्यादा सोचने पर कमजोर लगती है, लेकिन हल्के मूड में देखी जाए तो कुछ समय तक मनोरंजन कर देती है।

फाइनल वर्डिक्ट

कुल मिलाकर पति पत्नी और वो 2 एक ऐसी फिल्म है जो अपने कलाकारों की वजह से चलती है, कहानी की वजह से नहीं। आयुष्मान खुराना, सारा अली खान और रकुल प्रीत सिंह फिल्म में जान डालने की पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन कमजोर लेखन और दोहराए गए मजाक फिल्म को यादगार बनने से रोक देते हैं।

बी.आर. चोपड़ा की विरासत से निकली यह फ्रेंचाइज़ी कभी रिश्तों के भीतर छिपे सामाजिक व्यंग्य को मजेदार अंदाज में पेश करती थी। अब वह ज्यादा ग्लैमरस, ज्यादा शोरगुल वाली और सोशल मीडिया दौर की तेज रफ्तार कॉमेडी बन चुकी है।

सवाल सिर्फ इतना है कि क्या आज के दर्शकों को यही चाहिए? शायद हां — कम से कम वीकेंड मनोरंजन के लिए।

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