अप्रैल का महीना ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए आमतौर पर थोड़ा सुस्त रहता है। मार्च में वित्त वर्ष की क्लोजिंग होती है, डीलर्स छूट देते हैं, ग्राहक खरीदारी थोड़ा आगे बढ़ा देते हैं। लेकिन इस बार अप्रैल 2026 ने एक अलग कहानी लिखी।
भारतीय बाजार में पिछले महीने करीब 1 लाख 48 हजार 740 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बिके। एक साल पहले अप्रैल 2025 में यही संख्या 92,538 थी। यानी सालाना आधार पर 60.73 फीसदी की बढ़त। यह कोई छोटी-मोटी तेजी नहीं है — यह संकेत है कि भारतीय ग्राहक अब पेट्रोल छोड़ने को सच में तैयार है।
हां, मार्च 2026 के मुकाबले अप्रैल में बिक्री 22 फीसदी कम रही। लेकिन यह हर साल होता है। वित्त वर्ष बंद होते ही बाजार एक महीने सांस लेता है। घबराने की बात नहीं।
लेकिन इस पूरी रिपोर्ट में जो बात सबसे ज्यादा चौंकाती है, वो TVS या बजाज के आंकड़े नहीं हैं। वो तीन नाम हैं जिन्हें शायद आपने ज्यादा सुना न हो — हीरो विडा, एम्पीयर और रिवर मोबिलिटी।
एक नजर में अप्रैल 2026 की EV रिपोर्ट
📊 कुल बिक्री: 1,48,740 यूनिट (अप्रैल 2025 में 92,538 थी)
📈 सालाना ग्रोथ (YoY): +60.73%
📉 मंथली बदलाव (MoM): मार्च 2026 से -22.15% (सामान्य सीजनल गिरावट)
🛵 EV बाजार हिस्सेदारी: कुल दोपहिया बाजार में 7.8% (अप्रैल 2025 में 5.5% था)
तीन कंपनियां जिन्होंने बाजार को हिला दिया
रिवर मोबिलिटी: 796 से 3,199a ?
बेंगलुरु की एक छोटी सी स्टार्टअप। बाजार में नाम भी उतना नहीं था। लेकिन अप्रैल 2025 में जहां रिवर मोबिलिटी ने सिर्फ 796 स्कूटर बेचे थे, वहीं अप्रैल 2026 में यह संख्या 3,199 पर पहुंच गई। 301 फीसदी की सालाना बढ़त।
रिवर इंडी — यही उनका एकमात्र प्रोडक्ट है। और इसी एक स्कूटर ने कंपनी को टॉप 10 में सातवें स्थान पर ला खड़ा किया। रिवर इंडी की डिजाइन अलग है, स्टोरेज स्पेस बड़ा है और सर्विस नेटवर्क धीरे-धीरे फैल रहा है। लेकिन असली वजह शायद यह है कि जब बड़ी कंपनियां सुर्खियों में थीं, रिवर चुपचाप शहर दर शहर अपने ग्राहक बनाती रही।
हीरो विडा देश की सबसे बड़ी दोपहिया कंपनी का ईवी में कमाल
हीरो मोटोकॉर्प का नाम सुनते ही जेहन में स्प्लेंडर और पैशन आता है। लेकिन अब विडा ब्रैंड भी उसी दमखम के साथ आगे बढ़ रहा है।
अप्रैल 2025 में हीरो विडा ने 6,150 स्कूटर बेचे थे। अप्रैल 2026 में यह संख्या 15,238 हो गई। करीब 148 फीसदी की ग्रोथ — और टॉप 10 में चौथा स्थान। हीरो का डीलर नेटवर्क देश के कोने-कोने में है। जब विडा उस नेटवर्क की ताकत को पूरी तरह इस्तेमाल करेगी, यह ग्रोथ और भी तेज हो सकती है।
एम्पीयर: टियर-2 शहरों का भरोसेमंद नाम
ग्रीव्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के एम्पीयर ब्रैंड ने अप्रैल में 6,884 स्कूटर बेचे। पिछले साल अप्रैल में 4,003 थे। करीब 72 फीसदी की बढ़त, छठा स्थान।
एम्पीयर टियर-2 और टियर-3 शहरों में खासा लोकप्रिय है। जहां बड़े शहरों के ग्राहक एथर या TVS की तरफ जाते हैं, वहां छोटे शहरों में एम्पीयर की जगह पक्की होती जा रही है।
बड़े खिलाड़ी TVS, बजाज, एथर का राज कायम
यह सब पढ़कर यह मत सोचिए कि बाजार बदल गया। TVS, बजाज और एथर की पकड़ अभी भी मजबूत है।
TVS मोटर अप्रैल में 37,683 स्कूटर बेचकर पहले नंबर पर रही। iQube की मांग थमती नहीं दिख रही। करीब 89 फीसदी की सालाना ग्रोथ। बाजार में हर चौथा बिकने वाला इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर TVS का है।
बजाज ऑटो 32,898 यूनिट के साथ दूसरे स्थान पर रही। 72 फीसदी की सालाना ग्रोथ। चेतक ने जो जादू किया है वो देखने लायक है जनवरी 2020 में लॉन्च हुआ यह स्कूटर अब तक 7,27,779 यूनिट बेच चुका है।
एथर एनर्जी ने 27,034 स्कूटर बेचे। 102 फीसदी की ग्रोथ यानी दोगुने से ज्यादा। प्रीमियम सेगमेंट में एथर का दबदबा कायम है।
अप्रैल 2026 — टॉप 8 कंपनियों की पूरी बिक्री रिपोर्ट
| रैंक | कंपनी | अप्रैल 2026 | अप्रैल 2025 | सालाना ग्रोथ | बाजार हिस्सेदारी |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | TVS मोटर | 37,683 | 19,974 | +88.64% | 25.33% |
| 2 | बजाज ऑटो | 32,898 | 19,163 | +71.68% | 22.12% |
| 3 | एथर एनर्जी | 27,034 | 13,327 | +102.78% | 18.17% |
| 4 | हीरो विडा | 15,238 | 6,150 | +147.77% | 10.24% |
| 5 | ओला इलेक्ट्रिक | 12,171 | 19,820 | -38.60% | 8.18% |
| 6 | एम्पीयर | 6,884 | 4,003 | +71.97% | 4.63% |
| 7 | रिवर मोबिलिटी | 3,199 | 796 | +301.88% | 2.15% |
| 8 | बीगौस | 3,066 | 1,316 | +133.06% | 2.06% |
| स्रोत: वाहन पोर्टल / FADA | अप्रैल 2026 | |||||
ओला इलेक्ट्रिक एकमात्र नाम जिसे यह अप्रैल रास नहीं आया
पूरी रिपोर्ट में एक नाम है जो उलटी दिशा में चला ओला इलेक्ट्रिक।
अप्रैल 2025 में ओला ने करीब 19,820 स्कूटर बेचे थे। अप्रैल 2026 में सिर्फ 12,171। यानी सालाना आधार पर करीब 39 फीसदी की गिरावट।
हालांकि एक बात दिलचस्प है। मार्च 2026 के मुकाबले अप्रैल में ओला ने 20 फीसदी की मंथली ग्रोथ दर्ज की। यह इकलौती बड़ी कंपनी रही जिसने महीने-दर-महीने बेहतरी दिखाई।
ओला की सर्विस और क्वालिटी को लेकर जो शिकायतें पिछले एक साल में आईं, उनका असर साफ दिखता है। लेकिन यह रिकवरी की शुरुआत हो सकती है बशर्ते ग्राहकों का भरोसा वापस आए।
बजाज चेतक की पूरी कहानी: 6 साल, 7 लाख से ज्यादा घर
2020 में जब चेतक दोबारा बाजार में आया, तो लोग हंसे थे। "पुराना नाम, नई बैटरी — क्या होगा इससे?" FY2020 में सिर्फ 135 यूनिट बिके।
फिर धीरे-धीरे गाड़ी पटरी पर आई। FY2023 में 29,963 यूनिट। FY2024 में 1,11,713। FY2025 में 2,39,087। और FY2026 में 2,98,436 से ज्यादा। यह सिर्फ बिक्री के आंकड़े नहीं हैं — यह एक पुराने ब्रैंड की नई जिंदगी की कहानी है।
| वित्त वर्ष | बिक्री (यूनिट) | सालाना बदलाव | e2W बाजार हिस्सा |
|---|---|---|---|
| FY2020 | 135 | — | 0.45% |
| FY2021 | 1,470 | +989% | 3.13% |
| FY2022 | 7,475 | +408% | 2.81% |
| FY2023 | 29,963 | +301% | 3.93% |
| FY2024 | 1,11,713 | +273% | 11.17% |
| FY2025 | 2,39,087 | +114% | 19.75% |
| FY2026 | 2,98,436 | +25% | 20.39% |
| FY2027* | 39,500 | +46% | 22.20% |
| कुल | 7,27,779 | — | — |
| *FY2027: 1 अप्रैल से 6 मई 2026 | | |||
FY2020 से FY2024 के बीच कुल बिक्री सिर्फ 1,50,756 यूनिट थी — यानी कुल का सिर्फ 21 फीसदी। बाकी 79 फीसदी यानी 5,77,023 यूनिट तो FY2025 से अब तक बिके। FY2025 में 114 फीसदी की ग्रोथ वो मोड़ था जब चेतक असली रफ्तार में आया।
रिटेल vs होलसेल: वो फर्क जो ज्यादातर रिपोर्ट्स छुपा लेती हैं
यहां एक जरूरी बात समझनी होगी जो आमतौर पर कोई नहीं बताता।
जब आप खबर पढ़ते हैं "कंपनी ने इतनी गाड़ियां बेचीं" — तो यह wholesale हो सकता है या retail। दोनों में फर्क बड़ा होता है।
| पैमाना | Wholesale (थोक) | Retail (खुदरा) |
|---|---|---|
| मतलब | कंपनी → डीलर | डीलर → ग्राहक |
| डेटा स्रोत | कंपनी डिस्पैच | VAHAN / FADA |
| March में | आमतौर पर ज्यादा (FY push) | कम inflate |
| April में | कम दिखता है | ज्यादा honest |
| D2C कंपनियां (रिवर) | gap लगभग शून्य | ज्यादा reliable |
मार्च जैसे महीनों में कंपनियां डीलर्स पर ज्यादा stock उठाने का दबाव डालती हैं, ताकि FY closing में आंकड़े अच्छे दिखें। लेकिन वो स्कूटर डीलर के शोरूम में पड़ा रहता है, ग्राहक तक नहीं पहुंचता। इसीलिए अप्रैल में retail numbers ज्यादा honest होते हैं।
अगली बार खबर पढ़ते वक्त यह पूछें
क्या यह wholesale है या retail? अगर खबर में नहीं बताया तो संभव है यह wholesale हो। VAHAN portal का retail data ज्यादा भरोसेमंद होता है।
Tier-2 शहरों का असली खेल दिल्ली-मुंबई से बाहर की कहानी
EV market की असली लड़ाई बड़े शहरों में नहीं, छोटे शहरों में लड़ी जा रही है।
कौन सी कंपनी कहां मजबूत है?
| कंपनी | मजबूत क्षेत्र | वजह |
|---|---|---|
| TVS iQube | दक्षिण भारत, महाराष्ट्र | बेहतर infra + premium buyer |
| एथर | बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद | टेक-सेवी ग्राहक |
| बजाज चेतक | उत्तर भारत, गुजरात | brand trust + dealer reach |
| एम्पीयर | UP, राजस्थान, MP | कम कीमत, वाइड नेटवर्क |
| हीरो विडा | हर जगह (expanding) | हीरो का 6,000+ डीलर नेटवर्क |
| रिवर मोबिलिटी | दक्षिण + महाराष्ट्र | D2C model, urban focus |
एक जरूरी pattern — जिन शहरों में बिजली की कटौती कम है, घर पर charging की सुविधा है और पेट्रोल पंप तक दूरी ज्यादा है — वहां EV adoption सबसे तेज है। यह pattern tier-2 शहरों में भी साफ दिखता है।
मिथक vs हकीकत: सस्ता EV सस्ता नहीं होता
EV खरीदने से पहले एक सवाल खुद से पूछें क्या आप सिर्फ showroom price देख रहे हैं ?
₹80,000 का EV सस्ता होता है।
Battery replacement 3-4 साल में ₹20,000–₹40,000 तक पड़ सकती है। यह कोई नहीं बताता।
सरकारी सब्सिडी मिलती है तो फायदा ही फायदा।
EMI पर लेने पर ब्याज उस सब्सिडी का फायदा खा जाता है। Net saving जरूर calculate करें।
EV का maintenance नहीं होता।
Motor, controller, wiring, software updates इनकी cost होती है। छोटी कंपनियों के service centers सब जगह नहीं होते।
3 साल में कौन सस्ता? — असली हिसाब
| खर्च का हिसाब | पेट्रोल स्कूटर (3 साल) | EV स्कूटर (3 साल) |
|---|---|---|
| खरीद कीमत | ₹85,000 | ₹95,000 |
| ईंधन / चार्जिंग | ₹54,000 | ₹9,000 |
| सर्विस | ₹12,000 | ₹6,000 |
| Battery / Major Repair | ₹0 | ₹15,000 (approx) |
| कुल 3 साल | ₹1,51,000 | ₹1,25,000 |
| *अनुमानित औसत आंकड़े | actual cost ब्रैंड और usage के अनुसार बदलती है | ||
3 साल में EV करीब ₹26,000 सस्ता पड़ता है — लेकिन तभी, जब service अच्छी मिले और battery ठीक रहे। ब्रैंड चुनते वक्त यह जरूर सोचें।
ओला की गिरावट सिर्फ ओला की गलती या पूरे बाजार का संदेश ?
ओला इलेक्ट्रिक की 39 फीसदी YoY गिरावट को सिर्फ एक कंपनी की कहानी मत समझिए। यह पूरी EV industry के लिए एक सबक है।
ओला ने 2021-22 में जिस रफ्तार से बाजार में कदम रखा, उसकी मिसाल नहीं थी। Aggressive pricing, heavy marketing, celebrity endorsements सब कुछ था। लेकिन service centers कम थे, software bugs थे, after-sales experience खराब था।
नतीजा? Consumer forums पर शिकायतें बढ़ीं। Word of mouth negative हो गया। और धीरे-धीरे वो ग्राहक TVS, बजाज और एथर की तरफ चले गए।
ओला की timeline उठान से गिरावट तक
| दौर | क्या हुआ | नतीजा |
|---|---|---|
| 2021–22 | धमाकेदार launch, aggressive pricing | बाजार में हलचल |
| 2022–23 | Software issues, service center की कमी | शिकायतें बढ़ीं |
| 2024–25 | YoY गिरावट शुरू, rival brands surge | market share घटा |
| अप्रैल 2026 | YoY -39%, लेकिन MoM +20% | recovery की संभावना |
Marketing से बड़ा होना, product और service से बड़ा नहीं हो सकता। ओला की कहानी EV industry की हर नई कंपनी को याद रखनी चाहिए।
301% ग्रोथ हमेशा उतनी बड़ी नहीं होती
Low Base Effect — एक जरूरी समझ
रिवर मोबिलिटी की 301 फीसदी ग्रोथ देखकर आप चौंके होंगे। लेकिन एक सवाल पूछिए base कितना था? जवाब है: 796 यूनिट।
796 से 3,199 हो जाना — percentage में तो 301 है, लेकिन absolute numbers में TVS के 37,683 के सामने यह अभी भी बहुत छोटा है। इसे Low Base Effect कहते हैं।
| कंपनी | ग्रोथ % | Base (अप्रैल 2025) | असली संदर्भ |
|---|---|---|---|
| रिवर मोबिलिटी | +301% | 796 | Low base — impressive but small |
| हीरो विडा | +148% | 6,150 | Medium base — genuine growth |
| एथर | +103% | 13,327 | Strong base — very impressive |
| TVS | +89% | 19,974 | Large base — exceptional |
| बजाज चेतक FY2021 | +989% | 135 | Classic low base illusion |
| बजाज चेतक FY2026 | +25% | 2,39,087 | Mature, large base — real growth |
बजाज चेतक का ही उदाहरण लीजिए — FY2021 में 989 फीसदी ग्रोथ थी। लगा होगा यह हर साल होगी। FY2026 में यही ग्रोथ 25 फीसदी रह गई। क्यों? क्योंकि base बड़ा हो गया। यही maturity है।
रिवर और विडा को कैसे judge करें ?
एक महीने का data नहीं देखें। लगातार 6 महीनों का trend देखें। अगर रिवर हर महीने 3,000+ यूनिट बनाए रखती है और 5,000-7,000 तक पहुंचती है — तब growth real है। अभी यह impressive शुरुआत है, sustainable है या नहीं, अगले 6 महीने बताएंगे।
बाजार का असली आईना 7.8% छोटा नंबर, बड़ा संकेत
अप्रैल 2026 में कुल टू-व्हीलर बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 7.8 फीसदी हो गई। एक साल पहले यह 5.5 फीसदी थी।
ऊपर से यह छोटी संख्या लग सकती है। लेकिन अगर आप समझें कि भारत में हर महीने 15 से 20 लाख दोपहिया वाहन बिकते हैं — तो 7.8 फीसदी का मतलब है हर महीने लाखों गाड़ियां।
सरकार ने देशभर में 4,874 नए EV चार्जर लगाने की योजना बनाई है जिसमें 2W, 3W और 4W सभी शामिल हैं। FY2030 तक 30 फीसदी EV penetration का लक्ष्य है। अभी 7.8 पर हैं — रफ्तार यही रही तो मुश्किल नहीं।
निष्कर्ष: यह सिर्फ आंकड़े नहीं, भारत का बदलता मूड है
भारत का इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार अब सिर्फ चंद कंपनियों का खेल नहीं रहा।
रिवर मोबिलिटी जैसी स्टार्टअप की 301 फीसदी ग्रोथ बताती है कि बाजार में जगह है अगर प्रोडक्ट सही हो, सर्विस अच्छी हो और कीमत वाजिब हो। हीरो विडा की 148 फीसदी ग्रोथ बताती है कि legacy brands भी अगर सही रणनीति अपनाएं, तो EV की दुनिया में भी राज कर सकते हैं।
बजाज चेतक की कहानी — 135 से 7,27,779 तक बताती है कि नाम पर भरोसा और सही प्रोडक्ट मिल जाए, तो कुछ भी मुश्किल नहीं। और ओला की गिरावट एक reminder है shortcut से बाजार जीता जा सकता है, लेकिन टिका नहीं जा सकता।