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गौतम गंभीर पर पूर्व क्रिकेटर का बड़ा आरोप जो लाइन में नहीं आएगा वह हिट लिस्ट में होगा

गौतम गंभीर पर पूर्व क्रिकेटर का बड़ा आरोप जो लाइन में नहीं आएगा वह हिट लिस्ट में होगा

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार मामला किसी मैच, रणनीति या चयन का नहीं, बल्कि टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम के माहौल और उनके व्यवहार को लेकर उठे गंभीर आरोपों का है।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और दिल्ली क्रिकेट से लंबे समय तक जुड़े रहे अतुल वासन ने गौतम गंभीर के व्यक्तित्व पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें “आक्रामक”, “ईगो से भरा” और “बुली करने वाला” बताया है।

वासन ने दावा किया कि टीम इंडिया के कुछ खिलाड़ी गंभीर की कोचिंग शैली से खुश नहीं हैं, हालांकि उन्होंने किसी खिलाड़ी का नाम लेने से इनकार किया। उनके बयान ऐसे समय में आए हैं जब भारतीय टीम हाल के महीनों में बड़े टूर्नामेंट जीतने के बावजूद टेस्ट क्रिकेट में उतार-चढ़ाव से गुजर रही है।

क्या कहा अतुल वासन ने ?

एक यूट्यूब शो में बातचीत के दौरान अतुल वासन ने कहा कि वह गौतम गंभीर को उनके बचपन से जानते हैं और उनका स्वभाव हमेशा से बेहद आक्रामक रहा है।

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वासन के अनुसार गंभीर का रवैया “My way or the highway” जैसा है, यानी या तो उनकी बात मानी जाए या फिर विरोध करने वालों को किनारे कर दिया जाए।

उन्होंने कहा:

अगर आप उनकी लाइन में नहीं आए, तो आप उनकी हिट लिस्ट में होंगे।

वासन ने यहां तक दावा किया कि गंभीर अपने विरोधियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि गंभीर की यही आक्रामक मानसिकता उन्हें सफल क्रिकेटर बनाने में मददगार रही।

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विवादों से पुराना रिश्ता

गौतम गंभीर भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल लेकिन सबसे विवादित खिलाड़ियों में गिने जाते रहे हैं।

मैदान पर उनका आक्रामक रवैया कई बार सुर्खियों में रहा। चाहे आईपीएल में विराट कोहली के साथ बहस हो या घरेलू क्रिकेट में चयनकर्ताओं से टकराव गंभीर अक्सर सीधे और टकराव वाले व्यक्तित्व के रूप में देखे गए।

अतुल वासन और गंभीर के बीच भी पुराना विवाद रहा है। 2017-18 सीजन में जब गंभीर को दिल्ली टीम की कप्तानी से हटाया गया था, तब चयन समिति में वासन भी शामिल थे। उस समय गंभीर ने आरोप लगाया था कि उन्हें फैसले की जानकारी सही तरीके से नहीं दी गई।

विराट कोहली से टकराव का जिक्र क्यों ?

वासन ने अपने बयान में विराट कोहली और गंभीर के रिश्ते का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि गंभीर की “ओवर-अग्रेसिव” और “अल्फा मेल” मानसिकता ही कई टकरावों की वजह बनती है।

पिछले कुछ वर्षों में आईपीएल के दौरान गंभीर और कोहली के बीच कई बार मैदान पर तीखी बहस देखने को मिली। हालांकि बाद में दोनों ने सार्वजनिक रूप से रिश्ते सामान्य होने की बात कही, लेकिन क्रिकेट हलकों में हमेशा यह चर्चा रही कि दोनों के व्यक्तित्व बेहद मजबूत और टकराव वाले हैं।

वासन का दावा है कि गंभीर अभी भी उसी मानसिकता से काम करते हैं जो उनके खिलाड़ी दिनों में उन्हें प्रेरित करती थी।

टीम इंडिया के खिलाड़ी क्या सचमुच असहज हैं ?

वासन का सबसे बड़ा दावा यही रहा कि भारतीय टीम के कुछ खिलाड़ी गंभीर की कार्यशैली से सहज नहीं हैं।

उन्होंने कहा:

सभी खिलाड़ी खुश नहीं हो सकते। कुछ खिलाड़ी दबाव में होंगे।

हालांकि उन्होंने किसी खिलाड़ी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान ने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है।

पिछले कुछ समय में यह चर्चा लगातार होती रही है कि भारतीय टीम में सीनियर खिलाड़ियों और नए मैनेजमेंट के बीच तालमेल को लेकर चुनौतियां हैं। विराट कोहली के टेस्ट संन्यास और रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर उठी अटकलों ने भी इन चर्चाओं को हवा दी।

हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

गंभीर का कोचिंग कार्यकाल कैसा रहा?

गौतम गंभीर ने जुलाई 2024 में राहुल द्रविड़ की जगह भारतीय टीम के मुख्य कोच का पद संभाला था।उनके कार्यकाल में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 जीती और टी20 विश्व कप 2026 अपने नाम किया। इन सफलताओं ने गंभीर को एक मजबूत कोच के रूप में स्थापित किया।

लेकिन दूसरी ओर टेस्ट क्रिकेट में भारत को कुछ निराशाजनक हार भी झेलनी पड़ीं। घरेलू सीरीज में न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार ने टीम मैनेजमेंट पर सवाल खड़े किए।

अतुल वासन ने भी कहा कि गंभीर का “रिपोर्ट कार्ड पूरी तरह साफ नहीं है” और अभी उनके प्रदर्शन का अंतिम मूल्यांकन करना जल्दबाजी होगी।

क्या आक्रामक कोचिंग हमेशा सफल होती है ?

क्रिकेट विशेषज्ञों के अनुसार हर सफल कोच का अपना अलग तरीका होता है। कुछ कोच खिलाड़ियों को पूरी स्वतंत्रता देते हैं, जबकि कुछ बेहद अनुशासित और सख्त रवैया अपनाते हैं। गौतम गंभीर दूसरी श्रेणी में दिखाई देते हैं। उनकी सोच अक्सर टीम पहले वाली रही है और वे खिलाड़ियों से आक्रामक मानसिकता की उम्मीद करते हैं।

लेकिन आधुनिक क्रिकेट में खिलाड़ी प्रबंधन उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है जितना रणनीति। ऐसे में अगर ड्रेसिंग रूम का माहौल असहज हो, तो उसका असर लंबे समय में टीम प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

सोशल मीडिया और फैंस की प्रतिक्रिया

अतुल वासन के बयान के बाद सोशल मीडिया पर क्रिकेट फैंस दो हिस्सों में बंटे नजर आए। कुछ लोगों ने गंभीर का बचाव करते हुए कहा कि उनकी आक्रामकता ही भारत को बड़े टूर्नामेंट जिताने में मदद कर रही है। वहीं कुछ यूजर्स का मानना है कि एक राष्ट्रीय टीम के कोच को खिलाड़ियों के साथ बेहतर संतुलन बनाकर चलना चाहिए।

क्या यह सिर्फ व्यक्तिगत विवाद है ?

कई क्रिकेट विश्लेषक यह भी मानते हैं कि वासन और गंभीर के पुराने विवाद को देखते हुए इन बयानों को पूरी तरह निष्पक्ष नहीं माना जा सकता। दोनों के बीच घरेलू क्रिकेट के दिनों से मतभेद रहे हैं। इसलिए कुछ लोग इसे व्यक्तिगत नाराजगी के नजरिए से भी देख रहे हैं।

हालांकि वासन के बयान ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या भारतीय टीम के भीतर सब कुछ उतना शांत है जितना बाहर दिखाई देता है।

भारतीय क्रिकेट के लिए आगे की चुनौती

टीम इंडिया फिलहाल बदलाव के दौर से गुजर रही है। एक तरफ युवा खिलाड़ियों को मौका दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कोहली और रोहित जैसे सीनियर खिलाड़ियों के भविष्य पर लगातार चर्चा हो रही है।

ऐसे समय में कोच की भूमिका केवल रणनीति बनाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि ड्रेसिंग रूम को एकजुट रखना भी उतना ही जरूरी होता है।

गौतम गंभीर की सबसे बड़ी ताकत उनकी आक्रामक सोच और जीतने की मानसिकता मानी जाती है। लेकिन आने वाले समय में उनकी असली परीक्षा यह होगी कि क्या वह अलग-अलग व्यक्तित्व वाले खिलाड़ियों को साथ लेकर लंबी सफलता हासिल कर पाते हैं या नहीं।फिलहाल, अतुल वासन के बयानों ने भारतीय क्रिकेट में एक नई बहस जरूर छेड़ दी है क्या कठोर नेतृत्व टीम को मजबूत बनाता है, या ड्रेसिंग रूम में दूरी पैदा करता है ?

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