वसीयत में धोखाधड़ी का आरोप, क्रिप्टोकरेंसी तक फ्रीज़ — दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला जो पूरे बॉलीवुड को हिला गया And there is light… Justice and truth will always prevail. Chardikala बस इतना लिखा करीना कपूर ने। कोई नाम नहीं, कोई केस का ज़िक्र नहीं। लेकिन पूरे देश ने समझ लिया कि यह जीत किस बात की है। 30 अप्रैल 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया जिसने बॉलीवुड, बिज़नेस दुनिया और कानूनी क्षेत्र तीनों में हलचल मचा दी।
यह पूरा मामला है क्या ?
यह कहानी शुरू होती है 2003 से। करिश्मा कपूर ने दिल्ली के बड़े उद्योगपति संजय कपूर से शादी की। 13 साल बाद 2016 में तलाक हो गया कड़वा और लंबा। दो बच्चे हुए बेटी समायरा और बेटा कियान। तलाक के बाद संजय ने मॉडल और व्यवसायी प्रिया सचदेव से तीसरी शादी की।
फिर जून 2025 में वो खबर आई जिसने सबको हिला दिया संजय कपूर यूके में पोलो खेलते वक्त अचानक गिर पड़े। दिल का दौरा। उम्र सिर्फ 53 साल। और उनके जाने के साथ शुरू हुई ₹30,000 करोड़ की वो जंग जो आज तक चल रही है।
वसीयत में क्या गड़बड़ है ?
संजय कपूर की मौत के बाद 21 मार्च 2025 की एक वसीयत सामने आई जिसमें उनकी पूरी ₹30,000 करोड़ की संपत्ति सिर्फ तीसरी पत्नी प्रिया कपूर के नाम थी। करिश्मा के बच्चों समायरा और कियान को कुछ नहीं।
बच्चों के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने अदालत में वसीयत की कई खामियाँ गिनाईं वसीयत की भाषा संदिग्ध है, पंजीकरण नहीं है, और सबसे बड़ी बात वसीयत तब बदली गई जब संजय कपूर अपने बेटे के साथ छुट्टी पर थे। और जिस शख्स पर वसीयत में छेड़छाड़ का शक है, उसे संजय की मौत के ठीक अगले दिन कंपनी निदेशक बना दिया गया।
संजय की माँ रानी कपूर ने भी वसीयत को चुनौती दी उन्होंने कहा उन्हें इस वसीयत के बारे में पहले से कुछ पता ही नहीं था।
प्रिया कपूर ने क्या कहा ?
प्रिया कपूर की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने कहा कि कोई भी संपत्ति छुपाई या हड़पी नहीं गई। सारी जानकारी अदालत के सामने दी गई है। रोलेक्स घड़ी वाले आरोप को उन्होंने फर्जी सोशल मीडिया खाते की तस्वीर पर आधारित बताकर खारिज किया। वसीयत के प्रारूप के बारे में उन्होंने कहा कि यह रानी कपूर की 2024 की वसीयत जैसी ही है।
अदालत ने क्या आदेश दिया
न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने बच्चों के पक्ष में अंतरिम निषेधाज्ञा दी। अदालत ने साफ कहा संपत्तियों को नष्ट या इधर-उधर नहीं किया जाना चाहिए। संपत्तियों को सुरक्षित रखना जरूरी है।
अदालत के आदेश की मुख्य बातें
प्रिया कपूर संजय की किसी भी भारतीय कंपनी में हिस्सेदारी या शेयरधारिता नहीं बदल सकतीं। तीन भारतीय बैंक खातों से पैसे नहीं निकाले जा सकते सिवाय उन देनदारियों के जो तलाक समझौते में बच्चों के लिए तय थीं।
विदेशी बैंक खाते और क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग्स दोनों पर तुरंत रोक।
न्यूयॉर्क और लंदन की संपत्तियों पर अदालत का अधिकार क्षेत्र नहीं इसलिए वहाँ कोई आदेश नहीं। प्रिया कपूर को सभी खाते के विवरण अदालत में जमा करने होंगे।
30,000 करोड़ में क्या-क्या है ?
यह सिर्फ एक घर या बैंक बैलेंस नहीं है। संजय कपूर अमन समूह के संस्थापक परिवार से जुड़े थे जो लक्ज़री होटल और रिसॉर्ट्स का बड़ा नाम है। भारतीय कंपनियों में हिस्सेदारी, न्यूयॉर्क और लंदन में संपत्तियाँ, विदेशी बैंक खाते, क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग्स, कलाकृतियाँ और निजी संपत्तियाँ यह सब मिलाकर ₹30,000 करोड़ का अनुमान है।
समायरा और कियान ने अदालत में माँगा है हर एक को संपत्ति का पाँचवाँ हिस्सा। वो खुद को प्रथम श्रेणी के कानूनी वारिस बताते हैं और कहते हैं कि पिता से उनका नियमित संपर्क था मिलना, छुट्टियाँ, व्हाट्सऐप सब था।
करीना का पोस्ट सिर्फ दो लाइन लेकिन बड़ा संदेश
अदालत का आदेश आते ही करीना कपूर ने सोशल मीडिया पर वो पोस्ट डाली जो वायरल हो गई।
"And there is light. Justice and truth will always prevail. Chardikala."
करीना ने कहीं करिश्मा का नाम नहीं लिया, अदालत का ज़िक्र नहीं किया लेकिन यह पोस्ट साफ बता रही थी कि बहन की जीत पर पूरा परिवार एकजुट है।
संजय की बहन का प्रतिक्रिया क्या था ?
संजय कपूर की बहन मंधिरा कपूर स्मिथ ने कहा "यह परिवार के लिए बहुत अच्छा आदेश है।" यानी संजय के खून के रिश्तेदार भी प्रिया कपूर के साथ नहीं बल्कि बच्चों के साथ खड़े हैं।
यह केस आम लोगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ?
यह सिर्फ बॉलीवुड की गॉसिप नहीं है। यह केस तीन बड़े सवाल उठाता है जो हर भारतीय परिवार के लिए प्रासंगिक हैं।
पहला क्या बिना पंजीकरण की वसीयत मान्य होती है? भारतीय कानून में वसीयत का पंजीकृत होना अनिवार्य नहीं लेकिन अदालत में बिना पंजीकरण वाली वसीयत पर संदेह ज्यादा होता है।
दूसरा तलाक के बाद भी क्या बच्चों का पिता की संपत्ति पर हक है? हाँ भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के तहत बच्चे प्रथम श्रेणी के कानूनी वारिस होते हैं और उनका हक वसीयत के बावजूद तर्क किया जा सकता है।
तीसरा क्या क्रिप्टोकरेंसी भी अब संपत्ति का हिस्सा है? अदालत ने क्रिप्टो फ्रीज़ करके यह साफ कर दिया कि डिजिटल संपत्तियाँ भी उत्तराधिकार विवादों में आती हैं यह भारतीय कानूनी इतिहास में एक नई मिसाल है।
आगे क्या होगा ?
यह अंतरिम आदेश है अंतिम नहीं। मुकदमा अभी बाकी है। प्रिया कपूर को अदालत में यह साबित करना होगा कि वसीयत असली है। तब तक सारी ₹30,000 करोड़ की संपत्ति फ्रीज़ रहेगी। यह लड़ाई लंबी चलेगी — लेकिन अभी के लिए समायरा, कियान और उनकी माँ करिश्मा की जीत है।
एक नज़र में पूरा मामला
करिश्मा-संजय शादी: 2003
तलाक: 2016
संजय की मौत: जून 2025 यूके में पोलो के दौरान
विवादित वसीयत की तारीख: 21 मार्च 2025
संपत्ति मूल्य: ₹30,000 करोड़
बच्चों की माँग: हर एक को 1/5 हिस्सा
अदालत का आदेश: 30 अप्रैल 2026
न्यायाधीश: न्यायमूर्ति ज्योति सिंह
करीना का पोस्ट: "Justice and truth will always prevail"
Photos use : Kareena Kapoor with Karisma and her children. (Photo Instagram)