चेन्नई/उदयपुर। दक्षिण भारतीय फिल्म जगत के वयोवृद्ध निर्माता एवं सुपर गुड फिल्म्स के संस्थापक आरबी चौधरी का मंगलवार, 5 मई 2026 को राजस्थान के उदयपुर के निकट एक सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। वे 68 वर्ष के थे। निजी कारणों से उदयपुर गए चौधरी दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए, जिसके पश्चात उन्हें समीपवर्ती अस्पताल में भर्ती कराया गया, किन्तु उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। उनका पार्थिव शरीर बुधवार को चेन्नई लाया जाएगा। दुर्घटना की विस्तृत परिस्थितियाँ अभी तक स्पष्ट नहीं हो सकी हैं
कोन थे RB चौधरी
आरबी चौधरी का पूरा नाम रतनलाल भागतराम चौधरी था। वे राजस्थानी मूल के थे किन्तु चेन्नई में स्थायी रूप से बसे हुए थे। फिल्म उद्योग में प्रवेश से पूर्व उन्होंने इस्पात, निर्यात एवं आभूषण व्यवसाय में दीर्घकाल तक कार्य किया। व्यापार जगत में कार्यरत रहते हुए भी उनका रुझान सदैव फिल्मों की ओर रहा और अंततः उन्होंने निर्माण क्षेत्र में कदम रखा।
उनकी पत्नी का नाम महजबीन है, जो तमिल मूल की हैं। चौधरी के चार पुत्र हैं सुरेश, जीवन, जीतन रमेश एवं जीवा। इनमें से सुरेश सुपर गुड फिल्म्स में निर्माण कार्य से जुड़े हैं, जीवन इस्पात व्यवसाय में कार्यरत हैं, जबकि जीतन रमेश एवं जीवा तमिल सिनेमा में अभिनेता के रूप में स्थापित हैं। 2010 के दशक में जीतन रमेश ने सुपर गुड फिल्म्स का सह-प्रबंधन भी संभाला।
सुपर गुड फिल्म्स की स्थापना एवं विकास
चौधरी ने अपने फिल्मी जीवन की आरम्भ 1988 में मलयालम फिल्म "आदिपापम" के निर्माण से की। यह फिल्म व्यावसायिक दृष्टि से अधिक सफल नहीं रही, परन्तु इसने उन्हें फिल्म निर्माण की बारीकियाँ समझने का अवसर प्रदान किया। तत्पश्चात 1989 में उन्होंने तमिल फिल्म उद्योग में प्रवेश किया और आर. मोहन के साथ साझेदारी में "सुपर" बैनर तले फिल्में बनाने लगे। आर. मोहन उस समय "गुड नाइट" मच्छरनाशक उत्पाद निर्माण से जुड़े थे।
जब दोनों की साझेदारी समाप्त हुई तब चौधरी ने "गुड नाइट" से "गुड" शब्द ग्रहण कर अपने बैनर का नाम "सुपर गुड फिल्म्स" रखा। यह बैनर आगे चलकर तमिल एवं तेलुगु सिनेमा का एक विश्वसनीय एवं प्रतिष्ठित नाम बन गया। तेलुगु एवं हिंदी सिनेमा में यही बैनर "मेगा सुपर गुड फिल्म्स" के नाम से जाना जाता था। चौधरी ने इस बैनर को बीस वर्षों से अधिक समय तक स्वयं संचालित किया।
नवोदित प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने की परम्परा
चौधरी की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह थी कि उन्होंने नवोदित निर्देशकों एवं अभिनेताओं को अवसर प्रदान करने में कभी संकोच नहीं किया। सुपर गुड फिल्म्स के बैनर तले के.एस. रविकुमार ने "पुरियाधा पुधिर" से, विक्रमन ने "पुधु वसंतम" से, ससि ने "सोल्लमाले" से, एझिल ने "थुल्लाधा मनमुम थुल्लम" से तथा एन. लिंगुसामी ने "आनंदम" से अपनी निर्देशकीय पारी आरम्भ की। इनमें से अनेक निर्देशक आगे चलकर तमिल सिनेमा के प्रमुख नाम बने।
इसी प्रकार उन्होंने अभिनेताओं के करियर को भी आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। अभिनेता विजय की फिल्म "पूवे उन्नक्कागा" उनके करियर का एक निर्णायक मोड़ मानी जाती है और इस फिल्म का निर्माण चौधरी ने ही किया था। अपने 50वें निर्माण "आसाई आसाईयाई" (2003) में उन्होंने अपने सबसे छोटे पुत्र जीवा को मुख्य अभिनेता के रूप में प्रस्तुत किया।
उल्लेखनीय फिल्में एवं व्यावसायिक उपलब्धियाँ
चौधरी ने अपने दीर्घ कार्यकाल में तमिल, तेलुगु, मलयालम एवं हिंदी मिलाकर 100 से अधिक फिल्मों का निर्माण किया। उनकी प्रमुख तमिल फिल्मों में नट्टामाई (1994, सरथकुमार अभिनीत), पूवे उन्नक्कागा, थुल्लाधा मनमुम थुल्लम, आनंदम (ममूटी एवं मुरली अभिनीत), जिल्ला (2014, विजय एवं मोहनलाल अभिनीत), थिरुपाची तथा शाहजहाँ सम्मिलित हैं। जिल्ला सुपर गुड फिल्म्स की 85वीं फिल्म थी और इसने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता अर्जित की।
तेलुगु सिनेमा में उनकी उल्लेखनीय फिल्मों में सूर्यवंशम, राजा, सीनू, संक्रांति तथा गॉडफादर प्रमुख हैं। गॉडफादर अभिनेता चिरंजीवी की फिल्म थी जिसका निर्माण भी चौधरी ने किया था। इसके अतिरिक्त उन्होंने पवन कल्याण अभिनीत "सुस्वागतम" का भी निर्माण किया था जो व्यावसायिक दृष्टि से अत्यंत सफल रही। अन्नावरम उनकी एक और उल्लेखनीय तेलुगु फिल्म थी जो पारिवारिक दर्शकों में अत्यंत लोकप्रिय हुई।
उनकी अंतिम निर्मित फिल्म "माड़ीसन" थी जिसमें वडिवेलु एवं फहाद फासिल ने अभिनय किया। यह फिल्म उनके जीवन की अंतिम कृति के रूप में स्मरणीय रहेगी।
पुरस्कार एवं सम्मान
अपने सुदीर्घ कार्यकाल में चौधरी ने तमिल एवं तेलुगु फिल्मों के लिए तीन फिल्मफेयर पुरस्कार अर्जित किये। 1990 में उन्हें "पुधु वसंतम" के लिए सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म का फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त उन्हें 1999 में भी फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। फिल्म उद्योग में पारिवारिक मनोरंजन को प्राथमिकता देने के कारण उन्हें दर्शकों एवं समीक्षकों दोनों का विश्वास प्राप्त था।
राजनेताओं एवं फिल्म जगत की प्रतिक्रियाएँ
आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह समाचार अत्यंत आघातकारी है। उन्होंने कहा कि चौधरी ने परिवार के साथ देखने योग्य कहानियाँ चुनीं और उत्कृष्ट संगीत से समृद्ध फिल्मों का निर्माण किया। राज्य के शिक्षा एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश ने भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और इसे फिल्म जगत की अपूरणीय क्षति बताया।
अभिनेता रजनीकांत ने उन्हें अपना प्रिय मित्र बताते हुए कहा कि चौधरी ने अनेक नवोदित निर्देशकों को अवसर प्रदान किया तथा फिल्म जगत को जीवंत बनाए रखा। अभिनेता चिरंजीवी ने कहा कि "गॉडफादर" के माध्यम से हाल ही में चौधरी से उनका पुनः जुड़ाव हुआ था और भारतीय सिनेमा में उनका योगदान शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। अभिनेता वेंकटेश दग्गुबाती ने कहा कि सूर्यवंशम, राजा, सीनू एवं संक्रांति जैसी फिल्मों के निर्माण के दौरान दोनों के मध्य गहरा व्यक्तिगत संबंध विकसित हुआ था। अभिनेत्री खुशबू सुंदर ने उन्हें फिल्म जगत का एक अत्यंत सम्मानित सदस्य बताया तथा कहा कि उन्होंने चौधरी के बैनर तले अनेक फिल्मों में अभिनय किया था।
दक्षिण भारतीय सिनेमा में योगदान
चौधरी ने तीन दशकों से अधिक समय तक दक्षिण भारतीय सिनेमा में निरंतर योगदान दिया। उन्होंने तमिल एवं तेलुगु दोनों उद्योगों में एक साथ अपनी उपस्थिति बनाए रखी जो उस काल के अधिकांश निर्माताओं के लिए सम्भव नहीं था। उनका विशेष ध्यान पारिवारिक विषयों पर आधारित फिल्मों के निर्माण पर रहा। नवोदित निर्देशकों एवं अभिनेताओं को अवसर देने की उनकी नीति के कारण सुपर गुड फिल्म्स का बैनर एक प्रशिक्षण भूमि के समान बन गया जहाँ से अनेक प्रतिभाएँ निखरकर आगे बढ़ीं।
उनके निधन पर फिल्म जगत में शोक की जो लहर उठी है वह इस बात का प्रमाण है कि चौधरी केवल एक व्यावसायिक निर्माता नहीं थे, अपितु दक्षिण भारतीय सिनेमा के एक ऐसे स्तम्भ थे जिनके बिना इस उद्योग का इतिहास अधूरा माना जाएगा।