डाकर/केप वर्डे: अटलांटिक महासागर में स्थित द्वीपीय देश केप वर्डे (Cape Verde) के तट के पास एक अंतरराष्ट्रीय क्रूज शिप 'एमवी होंडियस' (MV Hondius) पर जानलेवा हंतावायरस (Hantavirus) के अत्यंत आक्रामक आउटब्रेक ने वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. इस पोत पर सवार यात्रियों में से अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से एक यात्री की मौत जोहान्सबर्ग में पारगमन (Transit) के दौरान हुई. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की आपातकालीन अपील पर सेनेगल की राजधानी डाकर में स्थित प्रमुख बायोमेडिकल अनुसंधान केंद्र 'इंस्टीट्यूट पाश्चर डी डाकर' (Institut Pasteur de Dakar) के वैज्ञानिकों ने रिकॉर्ड 24 घंटे के भीतर वायरस के आंशिक जीनोम का अनुक्रमण (Genome Sequencing) कर यह स्थापित कर दिया है कि यह संक्रमण हंतावायरस का बेहद खतरनाक 'एंडीज स्ट्रेन' (Andes Strain) है. यह विशिष्ट स्ट्रेन इंसानों के बीच बेहद करीबी संपर्क (Close Human Contact) से फैलने के लिए जाना जाता है और इसकी मृत्यु दर लगभग 33 प्रतिशत (प्रत्येक तीन में से एक मरीज की मौत) है.
मिड-सी रेस्क्यू और स्पेशल लैब ऑपरेशन हर घंटे दांव पर लगी थीं 150 इंसानी जिंदगियां
आधिकारिक विवरण के अनुसार, मई के शुरुआती सप्ताह में खोजी क्रूज जहाज 'एमवी होंडियस' पर रहस्यमयी तरीके से यात्री बीमार पड़ने लगे. इस जहाज पर 23 अलग-अलग देशों के लगभग 150 नागरिक सवार थे. चूंकि यह पोत कई दूरस्थ अटलांटिक द्वीपों पर रुक चुका था, इसलिए महामारी के वैश्विक फैलाव का खतरा अत्यधिक था. डब्ल्यूएचओ ने तत्काल कार्रवाई करते हुए एक विशेष विमान चार्टर किया और केप वर्डे से संदिग्ध मरीजों के जैविक नमूनों (Specimens) को एकत्रित किया. इन नमूनों को अंतरराष्ट्रीय जैव-सुरक्षा मानकों के तहत ट्रिपल-पैकिंग (टेस्ट ट्यूब, प्लास्टिक एनकेसमेंट और चेतावनी चिह्नों वाले सीलबंद बक्से) में 5 मई की तड़के 3 बजे सेनेगल की लैब पहुंचाया गया. संस्थान की जीनोमिक अनुक्रमण विंग के प्रमुख डॉ. मूसा मोइसा डियाग्ने (Dr. Moussa Moise Diagne) के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम ने उच्च स्तरीय बायो-कंटेनमेंट प्रयोगशाला (Specialised Biocontainment Lab) में नमूनों को निष्क्रिय कर अगली पीढ़ी की सीक्वेंसिंग मशीनों की मदद से महज एक दिन में वायरस का जेनेटिक मैप तैयार कर दिया.
वैश्विक समन्वय और वैज्ञानिक निष्कर्ष 2018 के अर्जेंटीना आउटब्रेक से मिलान
सेनेगल की प्रयोगशाला द्वारा 6 मई को जारी किए गए परिणामों की पुष्टि समानांतर रूप से स्विट्जरलैंड और दक्षिण अफ्रीका की शीर्ष प्रयोगशालाओं ने भी की, जिन्हें अन्य संक्रमित मरीजों के नमूने भेजे गए थे. 8 मई तक इस वायरस के पूर्ण जीनोम (Full Genome Mapping) का खाका तैयार कर लिया गया. दुनिया भर के डेटाबेस में मौजूद वायरसों से तुलना करने पर वैज्ञानिकों ने पाया कि वर्तमान एंडीज स्ट्रेन में साल 2018-19 के दौरान अर्जेंटीना में फैले हंतावायरस आउटब्रेक की तुलना में कोई बड़ा म्यूटेशन (आनुवंशिक परिवर्तन) नहीं हुआ है. डॉ. डियाग्ने के अनुसार, "जीनोम अनुक्रमण ही ट्रांसमिशन यानी प्रसार की क्षमता और गति को समझने का एकमात्र सटीक वैज्ञानिक जरिया है, जो कड़े कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और क्लिनिकल केस मैनेजमेंट के लिए अनिवार्य है."
लंबी इनक्यूबेशन अवधि और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं पर मंडराता खतरा
इस हंतावायरस आउटब्रेक का सार्वजनिक प्रभाव अत्यंत व्यापक और चिंताजनक है. चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, हंतावायरस का इनक्यूबेशन पीरियड (शरीर में वायरस प्रवेश करने से लेकर लक्षण दिखने की अवधि) छह सप्ताह (42 दिन) तक लंबा हो सकता है. इसका सीधा अर्थ यह है कि क्रूज शिप पर सवार जो यात्री वर्तमान में स्वस्थ दिख रहे हैं और अपने-अपने देशों (23 देशों) को लौट चुके हैं या लौटने वाले हैं, उनमें आने वाले दिनों में लक्षण उभर सकते हैं. इसके चलते वैश्विक स्तर पर इस वायरस के नए क्लस्टर्स बनने का गंभीर सार्वजनिक खतरा पैदा हो गया है. आम जनता के बीच इस खबर के बाद से अंतरराष्ट्रीय क्रूज पर्यटन (Cruise Tourism) और अटलांटिक महासागरीय देशों की यात्राओं को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है. स्वास्थ्य विभागों ने प्रभावित क्षेत्रों से लौटे यात्रियों को अपने स्वास्थ्य पर छह सप्ताह तक कड़ी नजर रखने की सलाह दी है.
एक्सपोजर विंडो की खोज और वैश्विक निगरानी पर जोर
महामारी विज्ञानियों (Epidemiologists) के सामने अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि इस संक्रमण की शुरुआत (Zero Point) कहां से हुई? एंडीज स्ट्रेन मुख्य रूप से लातिनी अमेरिका (Latin America) में स्थानिक (Endemic) है. वैज्ञानिक अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्रूज शिप के यात्रियों का लातिनी अमेरिका में एक्सपोजर विंडो (संक्रमण की चपेट में आने का समय) क्या था और क्या यह वायरस जहाजों पर पाए जाने वाले कृंतकों (Rodents/चूहों) के जरिए फैला या सीधे इंसानी संपर्क से. डब्ल्यूएचओ ने सभी सदस्य देशों के हवाई अड्डों और बंदरगाहों को निर्देश दिया है कि वे आने वाले यात्रियों में तेज बुखार, सांस लेने में गंभीर तकलीफ (HPS - हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम) और मांसपेशियों के गंभीर दर्द जैसे लक्षणों की सघन निगरानी करें.
महामारी रोधी अंतरराष्ट्रीय फंडिंग में कटौती से बढ़ा संकट
इस आउटब्रेक ने ऐसे समय पर दस्तक दी है जब दुनिया भर में वैश्विक प्रयोगशाला नेटवर्क की वित्तीय स्थिति बेहद नाजुक है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) ने हाल ही में 'सेंटर्स फॉर रिसर्च इन इमर्जिंग इंफेक्शियस डिजीज नेटवर्क' (CREID) की फंडिंग बंद करने का निर्णय लिया है, जो पश्चिमी अफ्रीका में महामारियों की रोकथाम का मुख्य स्तंभ था. यहां तक कि हंतावायरस इंसानों को कैसे संक्रमित करता है, इस पर चल रहे एक महत्वपूर्ण पायलट प्रोजेक्ट को भी रद्द कर दिया गया था. हालांकि, अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग (HHS) के प्रवक्ता ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि वाशिंगटन अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है. फिर भी, विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक लैब्स की फंडिंग में कटौती से भविष्य में इस तरह के अचानक होने वाले आउटब्रेक्स को समय पर रोकने की वैश्विक क्षमता प्रभावित हो सकती है.