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बिना वैक्सीन वाले घातक वायरस की भारत में एंट्री रोकने की तैयारी! दिल्ली में इंटरनेशनल समिट रद्द यात्रियों के लिए 21 दिन का अलर्ट

बिना वैक्सीन वाले घातक वायरस की भारत में एंट्री रोकने की तैयारी! दिल्ली में इंटरनेशनल समिट रद्द यात्रियों के लिए 21 दिन का अलर्ट

नई दिल्ली: अफ्रीकी महाद्वीप के देशों में तेजी से पैर पसार रहे जानलेवा इबोला वायरस (Ebola Virus) के प्रकोप ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है. इस जनस्वास्थ्य संकट के सीधे असर के रूप में, नई दिल्ली में आगामी 28 से 31 मई तक आयोजित होने वाले चौथे 'भारत-अफ्रीका फोरम समिट' (IAFS-IV) को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है. विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC), युगांडा और दक्षिण सूडान में तेजी से बिगड़ते जनस्वास्थ्य हालातों को देखते हुए यह फैसला अफ्रीकी संघ (AU) और भारत सरकार की उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया है. इस ऐतिहासिक महासम्मेलन के टलने से न केवल द्विपक्षीय रणनीतिक समझौतों पर ब्रेक लगा है, बल्कि वैश्विक यात्रा और व्यापारिक गलियारों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है.

बिना वैक्सीन वाली बुंडीबुग्यो प्रजाति का खौफ, डब्ल्यूएचओ ने जारी किया ग्लोबल इमरजेंसी अलर्ट

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इस आउटब्रेक को 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' (PHEIC) घोषित किए जाने के बाद से दुनिया भर की स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट पर हैं. अफ्रीका महाद्वीप पर अब तक इबोला के 600 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 139 लोगों की मौत हो चुकी है. चिकित्सा वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस बार का संकट इसलिए अधिक घातक है क्योंकि यह इबोला की एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल प्रजाति है, जिसे 'बुंडीबुग्यो' (Bundibugyo) कहा जाता है. इस प्रजाति की सबसे बड़ी चिंता यह है कि इसके खिलाफ वर्तमान में दुनिया में कोई भी प्रमाणित वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है. संक्रमित मरीजों में इस वायरस की मृत्यु दर करीब 33 प्रतिशत (एक-तिहाई) देखी जा रही है, जो इसे कोविड-19 या अन्य सामान्य महामारियों की तुलना में कई गुना अधिक जानलेवा बनाती है.

पब्लिक इम्पैक्ट भारत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर सख्त पहरा, यात्रियों के लिए 21 दिनों की निगरानी अनिवार्य

हालांकि भारत के भीतर अब तक इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है, लेकिन वैश्विक प्रसार को रोकने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने देश के सभी प्रमुख हवाई अड्डों, विशेषकर दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर एक व्यापक पब्लिक हेल्थ एडवाइजरी लागू कर दी है. इसके तहत प्रभावित अफ्रीकी देशों से सीधे आने वाले या वहां से कनेक्टिंग फ्लाइट लेने वाले यात्रियों की इमिग्रेशन से पहले ही गहन थर्मल और क्लिनिकल स्क्रीनिंग की जा रही है. आम जनता और यात्रियों के लिए सरकार ने निर्देश जारी किए हैं कि यदि आगमन के 21 दिनों (इबोला का अधिकतम इन्क्यूबेशन पीरियड) के भीतर बुखार, अत्यधिक कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, उल्टी, दस्त या शरीर में अंदरूनी व बाहरी ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो उन्हें तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र को अपनी ट्रैवल हिस्ट्री बतानी होगी. हवाई अड्डों पर संदिग्ध मरीजों को तुरंत आइसोलेट करने के लिए विशेष वार्ड बनाए गए हैं.

व्यापारिक और रणनीतिक नुकसान एक दशक बाद होने वाली बड़ी वार्ता टली, अरबों के निवेश पर ब्रेक

साल 2008 में शुरू हुए 'भारत-अफ्रीका फोरम समिट' का यह चौथा संस्करण पूरे 11 साल के लंबे अंतराल के बाद दिल्ली की धरती पर होने जा रहा था. इससे पहले आखिरी समिट 2015 में नई दिल्ली में हुआ था. इस बार इस महासम्मेलन में व्यापार, बुनियादी ढांचा निवेश, रक्षा सहयोग और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) जैसे अरबों डॉलर के रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर होने थे. अफ्रीका इस समय भारत के लिए कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) का एक बहुत बड़ा रणनीतिक भागीदार है. समिट के स्थगित होने से द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं की गति धीमी होने की आशंका है. हालांकि, विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत इस संकट में अफ्रीका महाद्वीप के साथ खड़ा है और 'अफ्रीका सीडीसी' (Africa CDC) के माध्यम से महाद्वीप को आवश्यक चिकित्सा और स्वास्थ्य ढांचागत सहायता भेजने की तैयारी कर रहा है.

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शहरीकरण और जंगलों की कटाई ने बढ़ाया इबोला का इंसानी खतरा

वैज्ञानिकों के अनुसार, इबोला वायरस मुख्य रूप से वन्यजीवों, विशेषकर 'फ्रूट बैट्स' (चमगादड़) और बंदरों के जरिए इंसानों में फैलता है. संक्रमित जानवरों का मांस खाने या उनके सीधे संपर्क में आने से यह इंसानों में प्रवेश करता है. इंसानों के बीच यह हवा या सांस के जरिए नहीं फैलता, बल्कि संक्रमित व्यक्ति के खून, लार, पसीने या उल्टी जैसे शारीरिक तरल पदार्थों (Bodily Fluids) के सीधे संपर्क में आने से फैलता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से हो रहे शहरीकरण और जंगलों के सफाए के कारण ग्रामीण आबादी और जंगली जीवों के बीच की दूरी खत्म हो रही है, जिससे इस तरह के प्राकृतिक वायरस तेजी से इंसानी बस्तियों की तरफ रुख कर रहे हैं और वैश्विक स्तर पर महामारियों का जोखिम बढ़ा रहे हैं.

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