दिल्ली .पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर हंटावायरस (Hantavirus) को लेकर उत्पन्न हुई आशंकाओं के बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। संगठन ने इस बात पर जोर दिया है कि हालांकि यह वायरस घातक है, लेकिन इसके 'महामारी' (Pandemic) बनने की संभावना वर्तमान वैज्ञानिक डेटा के आधार पर अत्यंत क्षीण है।
यह चिंता तब शुरू हुई जब एक अंतरराष्ट्रीय क्रूज शिप पर इस वायरस के कुछ संदिग्ध मामले सामने आए, जिसके बाद वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों ने निगरानी (Surveillance) बढ़ा दी।
महामारी की तुलना कोविड-19 बनाम हंटावायरस
सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि हंटावायरस और SARS-CoV-2 (कोविड-19) के बीच बुनियादी अंतर को समझना आवश्यक है। कोविड-19 एक श्वसन संबंधी वायरस था जो 'ह्यूमन-टू-ह्यूमन ट्रांसमिशन' (इंसान से इंसान में प्रसार) के माध्यम से अत्यधिक संक्रामक साबित हुआ। इसके विपरीत, हंटावायरस मुख्य रूप से एक ज़ूनोटिक (Zoonotic) बीमारी है।
WHO की डॉ. मारिया वान केरखोव के अनुसार, "हंटावायरस के प्रसार की प्रकृति स्थानीय होती है। यह मुख्य रूप से कृंतकों (Rodents) के संपर्क से फैलता है और इसके व्यापक भौगोलिक प्रसार की संभावना सीमित है।"
संक्रमण का जीवविज्ञान और प्रसार (Transmission)
हंटावायरस का मुख्य वाहक चूहे और गिलहरी जैसे कृंतक जीव हैं। इंसानों में इसके संक्रमण के तीन प्रमुख मार्ग चिन्हित किए गए हैं:
एरोसोलाइजेशन (Aerosolization): यह सबसे चिंताजनक मार्ग है। जब चूहों का मूत्र या मल सूख जाता है और हवा के साथ धूल के रूप में उड़ता है, तो सांस लेने के दौरान यह सीधे फेफड़ों में प्रवेश कर जाता है।
सतही संपर्क: संक्रमित मल-मूत्र के सीधे संपर्क में आने और उसके बाद चेहरे या आंखों को छूने से।
एंडीज स्ट्रेन का अपवाद: दक्षिण अमेरिका में पाए जाने वाले 'एंडीज हंटावायरस' के कुछ दुर्लभ मामलों में इंसान से इंसान में संक्रमण देखा गया है, जिसे स्वास्थ्य अधिकारी 'चिंता का विषय' (Area of concern) मान रहे हैं।
नैदानिक लक्षण और जटिलताएं (Clinical Symptoms)
हंटावायरस के लक्षण अक्सर सामान्य फ्लू या गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट की समस्या) के साथ भ्रमित कर सकते हैं, जिससे इसके निदान में देरी होती है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने इसे दो श्रेणियों में विभाजित किया है:
प्रारंभिक चरण: तेज बुखार (101°F से अधिक), गंभीर मांसपेशियों में दर्द, विशेषकर जांघों और पीठ में, और थकान।
गंभीर चरण (HPS): संक्रमण के 4 से 10 दिनों के भीतर, फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होने लगता है (Pulmonary Edema), जिससे सांस लेने में भारी कठिनाई होती है। इस चरण में मृत्यु दर 38% से 40% तक दर्ज की गई है।
वैश्विक प्रभाव और आर्थिक चिंताएं
यद्यपि WHO ने वैश्विक जोखिम को 'निम्न' (Low) श्रेणी में रखा है, लेकिन पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग पर इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव देखा जा रहा है। MV Hondius जैसे क्रूज जहाजों पर पाए गए मामलों ने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों (International Health Regulations - IHR) के तहत सख्त प्रोटोकॉल लागू करने के लिए मजबूर किया है।
पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी ऐसी खबरें अक्सर वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा करती हैं, भले ही उनका वास्तविक खतरा सीमित हो।
निवारक रणनीतियां और सार्वजनिक सलाह
चूंकि हंटावायरस के लिए वर्तमान में कोई स्वीकृत टीका (Vaccine) नहीं है, इसलिए सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने 'हाइजीन प्रोटोकॉल' पर जोर दिया है:
कीटाणुशोधन (Disinfection): चूहों के संभावित ठिकानों की सफाई करते समय गीली विधि (Wet Mopping) का उपयोग करें ताकि धूल हवा में न उड़े।
निगरानी: प्रभावित क्षेत्रों से लौटने वाले यात्रियों को कम से कम 45 दिनों तक अपने स्वास्थ्य की निगरानी करनी चाहिए।
भंडारण: खाद्य पदार्थों को कृंतक-प्रूफ (Rodent-proof) कंटेनरों में रखना अनिवार्य है।
विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य का वर्तमान मत यही है कि हंटावायरस एक 'खतरा' है, लेकिन 'संकट' नहीं। WHO का बयान इस दिशा में एक संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करता है सावधानी बरतें, लेकिन घबराएं नहीं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है और फिलहाल घबराहट की कोई ठोस वजह नहीं है।