नई दिल्ली: वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में तेजी से बदलते समीकरणों के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सैन्य और रणनीतिक संबंधों को एक नए और अभूतपूर्व स्तर पर ले जाने की कवायद शुरू हो गई है। आज, 1 जून 2026 को नई दिल्ली में 'दूसरी भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों की वार्ता' (2nd India-Australia Defence Ministers' Dialogue) आयोजित की जा रही है। इस द्विपक्षीय महा-बैठक की सह-अध्यक्षता भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के उप-प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस (Richard Marles) कर रहे हैं।
रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रक्षा संबंधों की प्रगति की व्यापक समीक्षा की जा रही है और भविष्य के सहयोग के लिए नए आयाम तलाशे जा रहे हैं। बैठक का मुख्य फोकस सैन्य अंतर-संचालनीयता (Military Interoperability) को मजबूत करने, रक्षा औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा देने, अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों के सह-विकास (Co-development) व सह-उत्पादन (Co-production) और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों पर केंद्रित है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा संबंधों का सफर: 2020 से 2025 तक
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा और सुरक्षा संबंध रातोंरात विकसित नहीं हुए हैं, बल्कि पिछले छह वर्षों में इनमें एक रणनीतिक परिपक्वता आई है। दोनों देशों के बीच संबंधों में वास्तविक तेजी वर्ष 2020 से देखने को मिली।
1. व्यापक रणनीतिक साझेदारी (CSP) - जून 2020
जून 2020 में एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) में अपग्रेड किया था। इसी दौरान दोनों देशों ने ऐतिहासिक पारस्परिक लॉजिस्टिक्स सहायता समझौते (MLSA) पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत दोनों देशों की सेनाओं, विशेष रूप से नौसेनाओं को एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों से ईंधन, मरम्मत और लॉजिस्टिक्स सहायता लेने की अनुमति मिली।
2. टू-प्लस-टू (2+2) मंत्रिस्तरीय संवाद
रणनीतिक समन्वय को और गहरा करने के लिए दोनों देशों ने रक्षा और विदेश मंत्रियों के स्तर पर 2+2 वार्ता की शुरुआत की। इसकी मदद से रक्षा नीतियों और कूटनीतिक लक्ष्यों को एक धरातल पर लाने में मदद मिली।
3. पहली रक्षा मंत्रियों की वार्ता अक्टूबर 2025
अक्टूबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया की धरती पर पहली भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों की वार्ता आयोजित की गई थी। रिचर्ड मार्लेस की यह वर्तमान दिल्ली यात्रा उसी कड़ी का अगला हिस्सा है, जो यह दर्शाती है कि दोनों देश अपनी सैन्य प्राथमिकताओं को लेकर कितने गंभीर हैं और द्विपक्षीय दौरों की गति को बनाए रखना चाहते हैं।
भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा समझौते और संयुक्त सैन्य अभ्यास
| रक्षा तंत्र / अभ्यास का नाम | श्रेणी और प्रारूप | रणनीतिक उद्देश्य और प्रभाव |
|---|---|---|
| पारस्परिक लॉजिस्टिक्स समझौता (MLSA) | द्विपक्षीय संधि (2020) | दोनों देशों के युद्धपोतों और विमानों को एक-दूसरे के सैन्य बंदरगाहों एवं अड्डों पर ईंधन और रसद सहायता की सुविधा। |
| मालाबार अभ्यास (Malabar Exercise) | बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास | भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान (QUAD) के बीच समुद्री सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता का समन्वय। |
| ऑसिंडेक्स (AUSINDEX) | द्विपक्षीय नौसेना अभ्यास | समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA) और सामरिक संचालन क्षमता को मजबूत करना। |
| अभ्यास पिच ब्लैक (Pitch Black) | बहुपक्षीय वायु सेना अभ्यास | भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों द्वारा जटिल हवाई युद्ध कौशल का प्रदर्शन। |
| ऑस्ट्राहिंद (AUSTRAHIND) | द्विपक्षीय थल सेना अभ्यास | आतंकवाद विरोधी अभियानों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में संयुक्त प्रशिक्षण। |
| रक्षा मंत्रियों की वार्ता (DMD) | संस्थागत संवाद (2025-2026) | रक्षा नीतियों, सह-उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों की समीक्षा। |
दिल्ली वार्ता के मुख्य एजेंडे
सैन्य अंतर-संचालनीयता का आधुनिकीकरण
अंतर-संचालनीयता का अर्थ है कि संकट के समय दोनों देशों की सेनाएं बिना किसी संचार बाधा के एकीकृत रूप से कार्य कर सकें। वार्ता में सुरक्षित संचार तंत्र, खुफिया जानकारी साझा करने और हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी क्षमता बढ़ाने पर चर्चा हो रही है।
रक्षा उद्योग साझेदारी और सह-उत्पादन
भारत 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' अभियानों के तहत अपने रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक हब बनाने में जुटा है। इसी दिशा में दोनों देश रक्षा ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणालियों और साइबर सुरक्षा उपकरणों के सह-विकास पर जोर दे रहे हैं।
इसके अलावा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में आने वाले व्यवधानों को देखते हुए महत्वपूर्ण रक्षा कलपुर्जों के स्थानीय उत्पादन पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे किसी तीसरे देश पर निर्भरता कम की जा सके।
समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA) को मजबूत करने पर जोर
भारत का 'सागर' (SAGAR) विजन और ऑस्ट्रेलिया की समुद्री सुरक्षा नीति दोनों हिंद महासागर और प्रशांत महासागर क्षेत्र की स्थिरता पर आधारित हैं। दोनों देशों के बीच अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस (UDA) और पनडुब्बी गतिविधियों की निगरानी के लिए तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हो रही है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र और क्वाड की भूमिका
यह वार्ता केवल एक द्विपक्षीय रणनीतिक कदम नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता से है। ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों ही अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार के निर्बाध संचालन को महत्वपूर्ण मानते हैं।
दोनों देश किसी भी एकपक्षीय आर्थिक या सैन्य प्रभुत्व के खिलाफ हैं और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के पक्षधर हैं।
भविष्य की चुनौतियां और आगे का रोडमैप
विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने के बावजूद कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। इनमें अमेरिका से जुड़े रणनीतिक समीकरणों के बीच संतुलन बनाना और रक्षा तकनीक हस्तांतरण की गति बढ़ाना प्रमुख हैं।
वार्ता के समापन पर एक व्यापक संयुक्त वक्तव्य या रक्षा रोडमैप जारी किए जाने की संभावना है, जिसमें भविष्य के तकनीकी समझौते, रक्षा विनिर्माण निवेश और सैन्य सहयोग की नई दिशा का उल्लेख किया जा सकता है।
रिचर्ड मार्लेस का यह दौरा भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी की बढ़ती मजबूती और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की साझा सुरक्षा प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।