आईपीएल के संस्थापक और पूर्व कमिश्नर ललित मोदी एक बार फिर अपने तीखे बयानों को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने बीसीसीआई (BCCI) और आईपीएल फ्रेंचाइजियों को हो रहे भारी वित्तीय नुकसान पर चिंता जताई है। मोदी का दावा है कि लीग के वर्तमान स्वरूप के कारण हर साल लगभग 2,400 करोड़ रुपये का राजस्व बर्बाद हो रहा है।
नुकसान का मुख्य कारण: फॉर्मेट में बदलाव
ललित मोदी के अनुसार, बीसीसीआई शुरुआत में तय किए गए 'होम-एंड-अवे' (Home-and-Away) फॉर्मेट का पूरी तरह पालन नहीं कर रही है। उनका तर्क है कि:
मैचों की संख्या में कमी: 10 टीमें होने के बावजूद मैचों की संख्या उस अनुपात में नहीं बढ़ी है, जितनी होनी चाहिए थी।
मीडिया राइट्स का घाटा: यदि लीग पूरी तरह से 'होम-एंड-अवे' आधार पर 94 मैचों के फॉर्मेट में खेली जाती, तो मीडिया राइट्स से होने वाली कमाई कहीं ज्यादा होती।
अनुबंध का उल्लंघन: मोदी का कहना है कि टीमों ने जिस व्यावसायिक डील पर हस्ताक्षर किए थे, उन्हें उनके हिस्से के पूरे मैच खेलने का मौका मिलना चाहिए।
राजस्व का गणित: कैसे हो रहा है 2400 करोड़ का घाटा?
ललित मोदी ने घाटे को समझाने के लिए कुछ चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं:
अगर आज 94 मैच होते, तो सिर्फ मीडिया राइट्स से ही 2,400 करोड़ की अतिरिक्त कमाई होती। इससे न केवल बीसीसीआई का रेवेन्यू बढ़ता, बल्कि हर टीम की वैल्यू में भी जबरदस्त इजाफा होता।" — ललित मोदी
फ्रेंचाइजियों की सहमति पर उठाए सवाल
ललित मोदी ने बीसीसीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सभी 10 टीमों ने मैचों की संख्या कम रखने पर अपनी लिखित सहमति दी है? उनका मानना है कि ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ होगा। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा:
कैलेंडर का बहाना: अगर आपके पास कैलेंडर में जगह नहीं थी, तो आपको टीमों की संख्या 8 से बढ़ाकर 10 नहीं करनी चाहिए थी।
ब्रांड वैल्यू पर असर: मैचों की संख्या कम होने का सीधा असर आईपीएल की ओवरऑल वैल्यूएशन और फ्रेंचाइजियों की ब्रांड वैल्यू पर पड़ता है।
असली आईपीएल: मोदी के अनुसार, आईपीएल की असली ताकत और पहचान 'होम-एंड-अवे' फॉर्मेट में ही है, जिसे अब नजरअंदाज किया जा रहा है।
ललित मोदी का यह बयान बीसीसीआई के लिए एक बड़ी चुनौती की तरह है। उनका स्पष्ट मानना है कि बोर्ड को राजस्व और लीग की साख बचाने के लिए वापस पुराने और पूर्ण फॉर्मेट पर लौटना चाहिए, ताकि भविष्य में होने वाले इस बड़े आर्थिक नुकसान को रोका जा सके।