प्रयागराज महाकुंभ 2025 की सबसे चर्चित हस्तियों में से एक, अभय सिंह (IITian बाबा), ने अपनी शादी का खुलासा कर सबको चौंका दिया है। वह अपनी पत्नी प्रतीका के साथ पहली बार अपने पैतृक निवास झज्जर (हरियाणा) पहुंचे।
1. शादी और वैवाहिक जीवन की शुरुआत
अभय सिंह ने पारंपरिक और कानूनी, दोनों तरीकों से शादी की है:
धार्मिक विवाह: 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के दिन हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध अघंजर महादेव मंदिर में सात फेरे लिए।
कोर्ट मैरिज: 19 फरवरी को उन्होंने कानूनी रूप से विवाह का पंजीकरण कराया।
वर्तमान निवास: यह जोड़ा फिलहाल हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में शांत जीवन व्यतीत कर रहा है।
2. कौन हैं उनकी पत्नी प्रतीका?
अभय सिंह की पत्नी प्रतीका भी उन्हीं की तरह उच्च शिक्षित हैं:
वह कर्नाटक की रहने वाली हैं।
पेशे से वह भी एक इंजीनियर हैं।
अभय के अनुसार, उनके जीवन में स्थिरता लाने और उन्हें परिवार से दोबारा जोड़ने में प्रतीका की अहम भूमिका रही है।
3. भविष्य का बड़ा विजन: 'सनातन यूनिवर्सिटी'
शादी के बाद इस दंपती ने अपना जीवन समाज और धर्म की सेवा में लगाने का निर्णय लिया है:
शिक्षा का केंद्र: उनका मुख्य लक्ष्य एक ऐसी सनातन यूनिवर्सिटी स्थापित करना है, जहाँ प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का मेल हो।
एकजुटता: वे देश भर के आध्यात्मिक गुरुओं, विद्वानों और साधकों को एक मंच पर लाने की योजना बना रहे हैं।
4. अभय सिंह का बैकग्राउंड (Zero to Hero)
अभय की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी है:
जन्म: हरियाणा के झज्जर जिले के सासरौली गाँव में।
शिक्षा: दिल्ली में तैयारी के बाद IIT बॉम्बे जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की डिग्री ली।
करियर: उन्होंने कनाडा में एक एयरप्लेन बनाने वाली कंपनी में लाखों के पैकेज पर नौकरी की।
बदलाव: कोरोना लॉकडाउन के दौरान वह कनाडा में अकेले थे, जहाँ उन्होंने उपनिषद और गीता पढ़ना शुरू किया। यहीं से उनका मन वैराग्य की ओर मुड़ा।
5. सुर्खियों में कैसे आए? (महाकुंभ 2025)
2025 के प्रयागराज महाकुंभ में जब एक जटाधारी युवा साधु को धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलते और विज्ञान की बातें करते देखा गया, तो वह रातों-रात वायरल हो गए। लोगों ने उन्हें 'IITian बाबा' का नाम दिया। उस समय वह अपने परिवार से संपर्क तोड़ चुके थे, लेकिन अब वह वापस लौट आए हैं।
6. एक संतुलित जीवन का संदेश
झज्जर में अपने पिता के चैंबर (जो कि एक वकील हैं) में बैठकर अभय ने कहा:
"शादी करना कोई अध्यात्म के विरुद्ध नहीं है। मैं अब एक संतुलित जीवन जीना चाहता हूँ, जिसमें अध्यात्म भी हो और परिवार की जिम्मेदारियां भी। हम दोनों मिलकर सनातन धर्म के प्रचार के लिए काम करेंगे।"
अभय सिंह की यह यात्रा दिखाती है कि अध्यात्म का अर्थ केवल घर छोड़ना नहीं, बल्कि समाज के बीच रहकर भी उच्च आदर्शों के साथ जीना हो सकता है।