भारत में गहराते ईंधन संकट (Fuel Crisis) के बीच केंद्र सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। उज्ज्वला योजना के जरिए जिस केरोसिन (मिट्टी का तेल) को भारतीय रसोई से लगभग विदा कर दिया गया था, उसकी अब 'ग्रैंड एंट्री' हो रही है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक विशेष गजट नोटिफिकेशन जारी कर देश के 21 राज्यों में पेट्रोल पंपों के माध्यम से केरोसिन की बिक्री को हरी झंडी दे दी है।
1. पेट्रोल पंपों पर 'मिट्टी के तेल' की वापसी: नए नियम (Deep Rules)
सरकार ने 29 मार्च को जारी अधिसूचना में पेट्रोलियम सुरक्षा और लाइसेंसिंग नियमों में अस्थायी रूप से ढील दी है। यह व्यवस्था अगले 60 दिनों (Ad-hoc Supply) के लिए लागू की गई है:
• चयनित आउटलेट्स: हर जिले में केवल दो प्रमुख पेट्रोल पंपों को केरोसिन स्टोर और वितरित करने का लाइसेंस दिया जाएगा।
• स्टोरेज लिमिट: इन पेट्रोल पंपों को अधिकतम 5,000 लीटर केरोसिन रखने की अनुमति होगी।
• सुरक्षा प्रोटोकॉल: भले ही नियमों में ढील दी गई है, लेकिन PESO (Petroleum and Explosive Safety Organization) की निगरानी में ही यह वितरण होगा ताकि आगजनी या किसी दुर्घटना का खतरा न रहे।
21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मचेगी हलचल:
सरकार ने इस योजना के लिए उन राज्यों को चुना है जहां ईंधन की खपत ज्यादा है। इसमें दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब और राजस्थान जैसे बड़े राज्य शामिल हैं।
चौंकाने वाली बात दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों ने खुद को 2018-2020 के बीच 'केरोसिन मुक्त' घोषित कर दिया था, लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संकट को देखते हुए वहां भी सप्लाई दोबारा शुरू की जा रही है।
क्यों आया भारत में LPG संकट? (The Geopolitical War)
इस पूरे संकट की जड़ भारत की सीमाओं से हजारों मील दूर पश्चिम एशिया (Middle East) में है।
ईरान-इजरायल युद्ध 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद तनाव चरम पर है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) का ब्लॉक होना ईरान ने दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बाधित कर दिया है। दुनिया की 20% तेल और गैस सप्लाई यहीं से गुजरती है।
भारत अपनी जरूरत का 50% से ज्यादा एलपीजी खाड़ी देशों से लेता है। होर्मुज के बंद होने से सप्लाई चेन टूट गई है, जिससे घरेलू बाजार में सिलेंडरों की किल्लत होने लगी है। इसी कमी को भरने के लिए सरकार ने 'केरोसिन' का विकल्प चुना है।
क्या भारत में केरोसिन बैन था? (History Check)
कई पाठकों के मन में सवाल होगा कि क्या केरोसिन बैन था?
सच्चाई केरोसिन पर पूरी तरह प्रतिबंध कभी नहीं लगा, लेकिन 2015 के बाद 'उज्ज्वला' और 'सौभाग्य' योजना के कारण इसे चरणबद्ध तरीके से खत्म किया गया।
प्रदूषण कम करना, डीजल में इसकी मिलावट रोकना और सरकारी सब्सिडी का बोझ कम करना। 2020 तक इसका वितरण लगभग शून्य हो गया था, लेकिन अब 60 दिनों के लिए इसे फिर से जीवनदान मिला है।
दुरुपयोग पर सख्त नजर (Strict Monitoring)
सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह केरोसिन केवल घरेलू उपयोग (खाना पकाने और रोशनी) के लिए है।
पहले केरोसिन का इस्तेमाल डीजल में मिलावट के लिए होता था। अब सरकार ने 'डिस्ट्रिब्यूशन वाहनों' को कुछ लाइसेंसिंग नियमों से छूट तो दी है, लेकिन सख्त चेकिंग अभियान भी चलाने का निर्देश दिया
Quick Guide Table
| मुख्य बिंदु | ताजा सरकारी अपडेट (2026) |
| योजना की अवधि | 29 मार्च से अगले 60 दिनों तक |
| कहाँ मिलेगा | जिला स्तर पर नामित 2 पेट्रोल पंपों पर |
| उद्देश्य | एलपीजी सप्लाई में संकट से जनता को बचाना |
| प्रमुख राज्य | यूपी, दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, बंगाल आदि |
| उपयोग | केवल घरेलू कुकिंग और लाइटिंग के लिए |