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नेपाल में भारतीय सामान पर 80% टैक्स जनता सड़कों पर उतरी, सरकार को झुकना पड़ा

नेपाल में भारतीय सामान पर 80% टैक्स जनता सड़कों पर उतरी, सरकार को झुकना पड़ा

भारत और नेपाल के बीच की वो खुली सीमा, जहाँ से रोज़ लाखों लोग बिना वीज़ा, बिना पासपोर्ट आते-जाते हैं  अप्रैल 2026 में अचानक एक अघोषित नाकेबंदी  में बदल गई। नेपाल की नई सरकार ने भारत से लाए जाने वाले सामान पर 80% तक का कस्टम टैक्स ठोक दिया। नतीजा ? सीमावर्ती इलाकों में हाहाकार मच गया, लोग सड़कों पर उतर आए  और आखिरकार सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा।

यह सिर्फ एक टैक्स विवाद नहीं था। यह उन लाखों परिवारों की लड़ाई थी जिनकी रसोई, खेत और ज़िंदगी दशकों से भारत के बाजारों पर टिकी है।

क्या था पूरा मामला ?

नेपाल में बलेंद्र शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार ने नेपाली नव वर्ष के बाद अप्रैल 2026 में एक पुराने कस्टम नियम को अचानक सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया। आदेश था — भारत से लाया गया 100 नेपाली रुपये (लगभग 60 भारतीय रुपये) से अधिक का कोई भी सामान बिना कस्टम ड्यूटी के नेपाल में नहीं आएगा।

टैक्स की दरें सामान की श्रेणी के हिसाब से 5% से 80% तक थीं। ऊपर से 13% VAT अलग। यानी जो दाल का थैला पहले ₹100 में आता था, वो टैक्स जुड़ने के बाद ₹180 से ज़्यादा का हो गया। रोज़मर्रा की चीजें  तेल, चीनी, सब्जियाँ, कपड़े  सब एक रात में आम आदमी की पहुँच से दूर हो गईं।

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सरकार का तर्क था कि सीमावर्ती लोग बड़े पैमाने पर भारत से सामान लाते हैं, जिससे नेपाल के स्थानीय बाजार मर रहे हैं और सरकारी खजाने को नुकसान हो रहा है। इस नुकसान को रोकने के लिए कस्टम विभाग, राजस्व जाँच विभाग, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की संयुक्त टीमें सीमा पर उतार दी गईं।

जब चिप्स का पैकेट भी हो गया जब्त

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने पूरी दुनिया को चौंका दिया। सीमा पर तैनात अधिकारी लोगों के बैग खोल रहे थे, चिप्स के पैकेट, मसालों की थैलियाँ और छोटे-छोटे घरेलू सामान ज़ब्त कर रहे थे। रुपंदेही के फरेनिया में साप्ताहिक बाजार से लौटते लोगों की लंबी कतारें लग गईं हर थैला खुल रहा था.हर पैकेट की जाँच हो रही थी।

बीरगंज जैसे सीमावर्ती शहरों में माहौल तनावपूर्ण हो गया। मधेश प्रांत के लोग सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए  यही वो इलाका है जो भौगोलिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से भारत से सबसे ज़्यादा जुड़ा हुआ है।

इसके साथ ही एक और सख्त कदम उठाया गया  भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों के नेपाल में प्रवेश पर रोक। पहले भारतीय मोटरसाइकिलें और गाड़ियाँ आसानी से सीमा पार करती थीं, लेकिन अब बिना विशेष अनुमति के यह संभव नहीं रहा।

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जन्म से मौत तक का सामान वहाँ से आता है 

 नेपाल में जन्म से लेकर मृत्यु तक जितने भी रीति-रिवाज़ होते हैं, उन सबका सामान हम भारत से लाते हैं। खाद तक, जो कभी-कभी नेपाल सरकार समय पर नहीं दे पाती, वो भी हम वहाँ से लाते हैं। यह एक अघोषित नाकेबंदी है। सरकार इसे वापस ले।

यह एक प्रदर्शनकारी की आवाज़ थी  लेकिन यह आवाज़ लाखों लोगों की भावना थी।

नेपाली कांग्रेस ने इस मामले में सरकार पर कड़ा प्रहार किया। पार्टी के आधिकारिक बयान में कहा गया  सरकार का यह निर्णय सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय एकता पर सीधी चोट है। इसे तुरंत वापस लिया जाए।

जन अधिकार पार्टी ने इसे सरकार की अक्षमता का सबूत बताया। नागरिक समाज के नेताओं ने एक स्वर में कहा कि काठमांडू में बैठकर लिए गए इस फैसले ने मधेश की ज़मीनी हकीकत को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया।

भारत के बाज़ारों पर भी पड़ा असर

यह विवाद केवल नेपाल तक सीमित नहीं रहा। बिहार के जोगबनी, अरारिया, रक्सौल और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती शहरों के व्यापारियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। नेपाली ग्राहकों की संख्या अचानक गिर गई, बाजार सुने पड़ गए। इन इलाकों में व्यापारियों ने भी सरकार से हस्तक्षेप की माँग की।

भारत-नेपाल व्यापार, जो सालाना हजारों करोड़ रुपये का है, इस एक फैसले से हिचकोले खाने लगा। विशेषज्ञों ने चेताया कि अगर यह नीति लंबे समय तक लागू रही तो दोनों देशों के आपसी रिश्तों पर भी असर पड़ सकता है।

आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा

जनता के सड़क पर उतरने, विपक्ष के तीखे हमलों, मीडिया की आलोचना और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के दबाव में आखिरकार नेपाल सरकार ने घुटने टेक दिए। सरकार ने यह विवादास्पद कस्टम नियम वापस लेने का फैसला किया।

यह एक बड़ा नीतिगत यू-टर्न था। जो सरकार कुछ हफ्ते पहले इस नियम को "राजस्व सुधार की ज़रूरत" बता रही थी, वही अब जनदबाव के आगे झुकने पर मजबूर हो गई.

भारत-नेपाल की खुली सीमा महज एक भौगोलिक रेखा नहीं है  यह लाखों परिवारों की जीवन रेखा है। इस सीमा के दोनों तरफ ऐसे लोग रहते हैं जिनके रिश्तेदार, खेत, कारोबार और संस्कृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं।

जब भी कोई सरकार बिना ज़मीनी हकीकत समझे, केवल कागज़ी नीतियों के आधार पर फैसले लेती है  तो जनता उसे सड़क पर चुनौती देती है। नेपाल का यह प्रकरण इसी सच का जीता-जागता उदाहरण है।

मुख्य बिंदु एक नज़र में

• नेपाल सरकार ने अप्रैल 2026 में भारत से आने वाले 100 नेपाली रुपये से अधिक के सामान पर कस्टम ड्यूटी अनिवार्य की

• टैक्स की दर 5% से 80% तक, ऊपर से 13% VAT

• बीरगंज सहित कई सीमावर्ती शहरों में व्यापक विरोध प्रदर्शन

• नेपाली कांग्रेस, जन अधिकार पार्टी समेत कई दलों ने विरोध किया

• भारत के सीमावर्ती बाजारों पर भी पड़ा नकारात्मक असर

• जनदबाव के आगे नेपाल सरकार ने फैसला वापस लिया

Admin Desk

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