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अब सिफारिश नहीं मेरिट का दौर मोदी सरकार के 12 साल पर जितेंद्र सिंह का बड़ा दावा

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने शासन, स्टार्टअप्स, अंतरिक्ष क्षेत्र और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में बड़े बदलाव देखे हैं। उनके अनुसार, आज युवाओं को सफलता के लिए सिफारिश नहीं बल्कि मेरिट और मेहनत पर भरोसा है।
अब सिफारिश नहीं मेरिट का दौर मोदी सरकार के 12 साल पर जितेंद्र सिंह का बड़ा दावा

केंद्र सरकार के शासन और नीतिगत सुधारों को लेकर एक महत्वपूर्ण आधिकारिक बयान सामने आया है। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं कार्मिक राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले शासन के पिछले 12 वर्षों ने भारत को एक "आकांक्षी राष्ट्र" (Aspirational Nation) में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव अवसर, नवाचार (Innovation) और आत्मविश्वास से प्रेरित है, जिसका पूरा श्रेय प्रशासनिक सुधारों, तकनीकी लोकतंत्रीकरण और नागरिक-केंद्रित नीतियों को जाता है।

मंत्री जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में कार्यालय में बिताए गए 4,399 दिनों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार के दूरगामी सुधारों के कारण कई क्षेत्रों, विशेष रूप से स्टार्टअप्स, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (Space Technology) और सरकारी सेवाओं की डिलीवरी में मापने योग्य और ऐतिहासिक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सबसे बड़ा बदलाव देश के नागरिकों और युवाओं की "सोच और मानसिकता" (Mindset Change) में आया है।

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सिफारिश संस्कृति का अंत: मेरिट और पारदर्शिता पर आधारित नया भारत

केंद्रीय मंत्री ने शासन व्यवस्था में हुए बुनियादी सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत अब एक ऐसी प्रणाली से बाहर निकल चुका है जो कभी पूरी तरह से सिफारिशों और रसूख पर आधारित प्रक्रियाओं से चलती थी। अब देश एक ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ चुका है जो पूरी तरह से योग्यता (Merit), पारदर्शिता और समान अवसरों पर आधारित है।

प्रशासनिक पारदर्शिता और युवाओं के भरोसे को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए दो सबसे बड़े कदमों का विवरण देते हुए उन्होंने कहा:

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  • स्व-सत्यापन (Self-Attestation) की शुरुआत: सरकारी प्रक्रियाओं से राजपत्रित अधिकारियों (Gazetted Officers) द्वारा दस्तावेजों के सत्यापन की अनिवार्यता को समाप्त करना एक बड़ा विश्वास-निर्माण कदम था, जिससे आम नागरिकों को अपनी ही सरकार पर भरोसा बढ़ा।
  • साक्षात्कार (Interviews) की समाप्ति: सरकारी नौकरियों की कई श्रेणियों (विशेष रूप से ग्रुप बी और सी) में साक्षात्कारों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया। इस कदम ने भर्ती प्रक्रियाओं में अधिकारियों के व्यक्तिगत विवेक और पक्षपात की गुंजाइश को खत्म कर दिया और केवल योग्यता के आधार पर चयन सुनिश्चित किया।

मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इन सुधारों ने एक नई आकांक्षी संस्कृति को बढ़ावा दिया है, जहां युवा यह मानते हैं कि सफलता प्रभाव या सिफारिश के बजाय प्रतिभा और कड़ी मेहनत के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। इसका सबसे स्पष्ट प्रमाण संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में छोटे शहरों और गैर-महानगरीय क्षेत्रों से उभरने वाले टॉपर्स की बढ़ती संख्या है।

भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम: 2014 बनाम 2026 का तुलनात्मक डेटा

आर्थिक और उद्यमशीलता के मोर्चे पर आए बदलावों को स्पष्ट करने के लिए केंद्रीय मंत्री ने ठोस आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम पिछले एक दशक में दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्कों में से एक बनकर उभरा है।

नीचे दी गई तालिका में वर्ष 2014 और वर्तमान वर्ष 2026 के बीच स्टार्टअप इकोसिस्टम में हुए व्यापक बदलाव और रोजगार सृजन के तुलनात्मक आंकड़ों को दर्शाया गया है:

पैरामीटर (Parameters) वर्ष 2014 की स्थिति वर्ष 2026 की स्थिति कुल वृद्धि / रणनीतिक प्रभाव
कुल पंजीकृत स्टार्टअप्स 350 - 400 स्टार्टअप्स 2,30,000 (2.3 लाख) से अधिक अभूतपूर्व वृद्धि, वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम।
रोजगार सृजन (Jobs Created) सीमित / नगण्य 24 लाख से 25 लाख नौकरियां युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसरों का निर्माण।
भौगोलिक विस्तार (Geographical Reach) मुख्य रूप से टियर-1 (महानगरों) तक सीमित लगभग 50% स्टार्टअप्स टियर-2 और टियर-3 शहरों में छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता का लोकतंत्रीकरण।
महिला नेतृत्व (Women-led Startups) न्यूनतम प्रतिशत 35% से 39% स्टार्टअप्स महिला संचालित व्यावसायिक नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी में ऐतिहासिक सुधार।

अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (Space Economy) में उछाल और निजी भागीदारी

वैज्ञानिक प्रगति और नीतिगत सुधारों के अंतर्संबंधों पर बात करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में आए क्रांतिकारी बदलावों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चंद्रयान जैसे महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशनों की सफलता ने विज्ञान और नवाचार के प्रति आम जनता और छात्रों के जुड़ाव को अभूतपूर्व रूप से मजबूत किया है।

अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े प्रमुख नीतिगत और आर्थिक सुधार इस प्रकार हैं:

  • स्पेस स्टार्टअप्स में वृद्धि: कुछ साल पहले तक भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप्स की संख्या केवल एकल अंक (Single-digit) में थी, जो आज बढ़कर लगभग 400 स्टार्टअप्स तक पहुंच गई है। इसमें कम से कम एक 'स्टार्टअप यूनिकॉर्न' भी शामिल है।
  • बाजार मूल्य में अनुमानित उछाल: भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था वर्तमान में लगभग 9 बिलियन डॉलर मूल्य की है। सरकार की नई नीतियों और निजीकरण के प्रोत्साहन से इसके अगले सात से आठ वर्षों में पांच गुना बढ़कर 45 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
  • निजी भागीदारी के लिए द्वार खोलना: सरकार ने अंतरिक्ष और परमाणु इकोसिस्टम के रणनीतिक हिस्सों को निजी भागीदारी के लिए खोल दिया है। इस नीतिगत बदलाव ने भारत के नवाचार ढांचे को वैश्विक मानकों के समकक्ष ला खड़ा किया है।

मंत्री ने यह भी जोड़ा कि सरकार ने वैज्ञानिक अनुसंधान में "विफलता को सामान्य" (Normalised Failure) बनाने की संस्कृति विकसित की है, जिससे वैज्ञानिकों को बिना किसी डर के महत्वाकांक्षी और जोखिम भरे लक्ष्यों को हासिल करने की प्रेरणा मिलती है।

कल्याणकारी योजनाओं की पारदर्शी डिलीवरी और भविष्य का रोडमैप

शासन और सामाजिक न्याय के मोर्चे पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं (Welfare Delivery) के क्रियान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता और सार्वभौमिकता (Universality) सुनिश्चित की गई है। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से अब बिना किसी भेदभाव या बिचौलियों के लाभार्थियों तक लाभ पहुंच रहा है, जिससे सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों के प्रति जनता का विश्वास सुदृढ़ हुआ है।

भविष्य की विकास यात्रा को लेकर मंत्री जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में भारत की प्रगति मुख्य रूप से तीन स्तंभों पर निर्भर करेगी:

  • सार्वजनिक-निजी क्षेत्र के बीच और अधिक गहरा कूटनीतिक व तकनीकी सहयोग (Public-Private Collaboration)।
  • देश के विकास और उद्यमिता में महिलाओं तथा युवाओं की भागीदारी का निरंतर विस्तार।
  • उभरते और रणनीतिक क्षेत्रों जैसे- अंतरिक्ष विज्ञान, परमाणु ऊर्जा और क्वांटम टेक्नोलॉजी (Quantum Technologies) पर विशेष ध्यान केंद्रित करना।

उन्होंने अंत में कहा कि इन सभी नीतिगत सुधारों और प्रयासों का अंतिम और एकमात्र लक्ष्य एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण करना है, जो वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने के 'विकसित भारत' (Viksit Bharat @2047) के संकल्प को पूरी तरह सिद्ध कर सके।

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