BREAKING :
EV खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर! Tata Power का चार्जिंग नेटवर्क अब 700 शहरों तक पहुंचा प्रेग्नेंसी का पता चलने से पहले ले ली Ozempic? Harvard की नई रिपोर्ट में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई सीतापुर में बनेगा 250 MW सोलर प्लांट राजनाथ सिंह की मंजूरी सेना को मिलेगी 24x7 ग्रीन बिजली World Cup 2026 विवाद ईरान के फैंस का टिकट कोटा रोका गया FIFA पर बढ़ा दबाव 8000mAh बैटरी वाला Tecno Pova 8 आ रहा है! 11 जून लॉन्च कीमत जानकर चौंक जाएंगे TMC को बड़ा झटका सुखेंदु शेखर रॉय ने छोड़ी पार्टी भाजपा में जाने के संकेत ₹44,490 में मिल रही इलेक्ट्रic स्कूटर! Hero, TVS, Bajaj और Ather में कौन है सबसे सस्ता? भारत में लॉन्च हुआ E85 फ्यूल! पेट्रोल से ₹20 सस्ता बदल सकता है कार चलाने का पूरा गणित 15 साल बाद DTC की धमाकेदार वापसी! अयोध्या-वैष्णो देवी के लिए वोल्वो बसें 2800 नई ई-बसों का ऐलान अपराजिता आढ्य बोलीं काम के लालच में होती तो कभी बेरोजगार नहीं रहती'

होर्मुज़ में फिर भड़की आग! अमेरिका-ईरान टकराव के बाद दुनिया क्यों हुई अलर्ट?

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास ड्रोन और मिसाइल हमलों के दावों ने वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित असर को लेकर दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर टिकी हैं।
होर्मुज़ में फिर भड़की आग! अमेरिका-ईरान टकराव के बाद दुनिया क्यों हुई अलर्ट?

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में चल रहा अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी सेना ने शनिवार को ईरान के तटीय रडार और निगरानी ठिकानों पर हमला किया। यह कार्रवाई उस समय की गई जब अमेरिकी सेना ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे ईरानी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान द्वारा छोड़े गए चार ड्रोन क्षेत्रीय समुद्री यातायात को निशाना बना सकते थे। इसके जवाब में अमेरिका ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास स्थित गोरुक और क़ेश्म द्वीप के निगरानी केंद्रों पर हवाई हमले किए।

ईरान का जवाब कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमला

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने अमेरिकी हमलों के जवाब में कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। साथ ही ईरान ने यह भी कहा कि उसने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे चार तेल टैंकरों पर कार्रवाई की।

कुवैत और बहरीन दोनों देशों ने इन हमलों की निंदा की है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और नागरिकों के लिए सीधा खतरा बताया। वहीं बहरीन में सायरन बजाए गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई।

Must Read TMC को बड़ा झटका सुखेंदु शेखर रॉय ने छोड़ी पार्टी भाजपा में जाने के संकेत TMC को बड़ा झटका सुखेंदु शेखर रॉय ने छोड़ी पार्टी भाजपा में जाने के संकेत

अमेरिकी सेना का कहना है कि ईरान द्वारा दागी गई सात मिसाइलों में से छह को हवा में ही नष्ट कर दिया गया जबकि सातवीं मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य से युद्ध से पहले वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता था।
  • अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को लगभग तीन महीने हो चुके हैं।
  • ईरान पर लगे प्रतिबंधों के कारण उसके अरबों डॉलर के विदेशी वित्तीय संसाधन प्रभावित हैं।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार ईरान की अधिकांश ड्रोन और मिसाइल उत्पादन क्षमता नष्ट की जा चुकी है।
  • ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के पास अब भी उसकी मूल मिसाइल क्षमता का लगभग 21-22% हिस्सा मौजूद है।

शांति वार्ता पर संकट के बादल

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से अप्रत्यक्ष वार्ता चल रही है। दोनों पक्ष एक अंतरिम समझौते की संभावना तलाश रहे हैं, जिससे युद्ध को रोका जा सके। हालांकि ईरान अपने तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में राहत, बंदरगाहों पर अमेरिकी रोक हटाने और अरबों डॉलर की जमी हुई संपत्तियों तक पहुंच की मांग कर रहा है।

ईरानी नेतृत्व का कहना है कि किसी भी स्थायी समझौते के लिए आर्थिक प्रतिबंधों में ठोस राहत आवश्यक है। वहीं अमेरिका सुरक्षा गारंटी और क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिक शर्त मान रहा है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिश

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी संघर्ष समाप्त कराने के प्रयासों के तहत तेहरान पहुंचने वाले हैं। हालांकि इस खबर की पाकिस्तान सरकार की ओर से तत्काल पुष्टि नहीं हुई है।

Also Read अब सिफारिश नहीं मेरिट का दौर मोदी सरकार के 12 साल पर जितेंद्र सिंह का बड़ा दावा अब सिफारिश नहीं मेरिट का दौर मोदी सरकार के 12 साल पर जितेंद्र सिंह का बड़ा दावा

तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

वैश्विक प्रभाव

  • कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
  • एशिया और यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव बढ़ा है।
  • शिपिंग कंपनियों की लागत और बीमा प्रीमियम में वृद्धि हुई है।
  • खाद्य पदार्थों और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है।
  • विकासशील देशों में महंगाई बढ़ने का जोखिम बढ़ गया है।

संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि ईंधन और परिवहन लागत बढ़ने से दुनिया के कई हिस्सों में खाद्य संकट गहरा सकता है। संस्था के अनुसार लाखों लोग भूख और खाद्य असुरक्षा की स्थिति के करीब पहुंच सकते हैं।

ट्रंप पर घरेलू दबाव

अमेरिका में पेट्रोल और गैस की कीमतों में वृद्धि के कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर युद्ध समाप्त करने का राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। ट्रंप ने कहा कि ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है, लेकिन संघर्ष समाप्त करने के लिए दोनों पक्षों को कुछ कठिन फैसले लेने होंगे।

लेबनान मोर्चे पर भी तनाव

इस बीच लेबनान में ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच भी झड़पें जारी हैं। हिजबुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैनिकों पर हमले का दावा किया है। दूसरी ओर इजरायल ने लेबनान में अपने सैन्य अभियानों को जारी रखने के संकेत दिए हैं।

ईरान ने स्पष्ट किया है कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच स्थायी युद्धविराम भी अमेरिका के साथ किसी व्यापक शांति समझौते की महत्वपूर्ण शर्तों में शामिल है।

निष्कर्ष

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। इसका सीधा प्रभाव वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार, खाद्य आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ रहा है। यदि दोनों पक्ष जल्द किसी समझौते पर नहीं पहुंचते हैं, तो आने वाले सप्ताहों में ऊर्जा संकट, महंगाई और क्षेत्रीय अस्थिरता और अधिक बढ़ सकती है।

Admin Desk

Admin Desk

I am senior editor of this News Portal. Me and my team verify all news with trusted sources and publish here.

Home Shorts

Categories