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जंतर-मंतर पर उमड़ा छात्रों का सैलाब! सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम बढ़ी सियासी हलचल

जंतर-मंतर पर उमड़ा छात्रों का सैलाब! सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम बढ़ी सियासी हलचल

नई दिल्ली: नीट (NEET) परीक्षा में हुए कथित पेपर लीक विवाद और लगातार रद्द होती परीक्षाओं के विरोध में शनिवार, 6 जून 2026 को देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारी राजनीतिक और सामाजिक हलचल देखी गई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले आयोजित इस एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन में हजारों की संख्या में छात्र, देश की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी, युवा पेशेवर और चिंतित अभिभावक सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों का मुख्य एजेंडा देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार और नीट परीक्षा विवाद के चलते केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा सुनिश्चित करना था।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके शनिवार को अमेरिका से सीधे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से उतरते ही उन्होंने सीधे तौर पर सरकार को घेरा। दीपके ने आरोप लगाया कि पेपर लीक की वजह से देश के कई होनहार नीट अभ्यर्थियों को आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ा है, जिसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से हट जाना चाहिए। दिल्ली पुलिस की अनुमति मिलने के बाद शुरू हुआ यह प्रदर्शन सुबह से लेकर देर शाम तक जारी रहा, जिसमें युवाओं और अभिभावकों का भारी जनसैलाब उमड़ा।

'हमारे बच्चों का भविष्य दांव पर': जंतर-मंतर पर छलका माता-पिता का दर्द

इस आंदोलन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें केवल छात्र ही नहीं, बल्कि भारी संख्या में उनके माता-पिता भी शामिल होने पहुंचे थे। अभिभावकों का स्पष्ट कहना था कि परीक्षाओं में बढ़ती अनिश्चितता और बार-बार होने वाले पेपर लीक के कारण अब पूरा परिवार गहरे मानसिक तनाव से गुजर रहा है। अपनी तीन बेटियों के साथ प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं नुसरत परवीन ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले बच्चों पर पहले से ही बहुत ज्यादा दबाव होता है, और इस प्रकार की प्रशासनिक खामियां माता-पिता की चिंताओं को और अधिक बढ़ा देती हैं।

इसके अलावा, विभिन्न राज्यों से आए युवाओं ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के अवसरों पर गंभीर सवाल खड़े किए। ग्वालियर से आए सौरभ गुर्जर ने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में मेहनत करने वाले छात्र पीछे छूट रहे हैं, जबकि प्रभाव और पैसे का इस्तेमाल करने वाले लोग आगे निकल जाते हैं। हरियाणा के झज्जर से आए छात्र नीरज और एमबीए के छात्र धनराज ने व्यवस्था में पारदर्शिता और टकराव के बजाय देश के युवाओं के हित में ठोस सुधार की मांग उठाई। इस प्रदर्शन में कक्षा 7 के छात्र अद्वैत जैसे स्कूली बच्चों ने भी हिस्सा लिया, जिनके माता-पिता ने कहा कि आने वाले समय में उनके बच्चों को भी इसी तंत्र का सामना करना है, इसलिए सुधार आज बेहद जरूरी है।

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राजनीतिक बयानबाजी तेज बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने बताया 'नकारात्मक राजनीति'

जंतर-मंतर पर हुए इस भारी प्रदर्शन के बाद देश में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रांची में मीडिया से बात करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के इस आंदोलन पर अप्रत्यक्ष रूप से तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें जानबूझकर देश के युवाओं को 'नकारात्मक राजनीति' की ओर धकेलने का प्रयास कर रही हैं। नितिन नवीन ने कहा कि देश का युवा किसी के हाथ की कठपुतली नहीं बनेगा, बल्कि वह स्टार्टअप, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में विश्वास रखता है ताकि भारत वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बन सके।

दूसरी तरफ, इस बड़े आंदोलन को देश के प्रबुद्ध वर्ग और विभिन्न क्षेत्रों से समर्थन भी हासिल हो रहा है। जाने-माने अभिनेता प्रकाश राज ने इस आंदोलन का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि 'कॉकरोचों ने कमाल कर दिया' और उन्होंने युवाओं की इस आवाज को सही ठहराया। वहीं, राजनीतिक विश्लेषक और स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने पूर्व में सीजेपी को लेकर टिप्पणी की थी कि भले ही इस पार्टी का जन्म सोशल मीडिया के मीम से हुआ हो, लेकिन यह देश में एक गंभीर और बड़े बदलाव की शुरुआत साबित हो सकती है।

CJP ने सरकार को दिया 7 दिन का अल्टीमेटम: जंतर-मंतर पर देर शाम प्रदर्शन समाप्त होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के मुखिया अभिजीत दीपके ने सरकार को चेतावनी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से कहा कि यह प्रदर्शन तो 'सिर्फ एक ट्रेलर था।' पार्टी ने छात्रों की मांगों को पूरा करने के लिए सरकार को कुल सात दिनों का समय दिया है, जिसके बाद देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

सिस्टम में जवाबदेही की मांग, नए विकल्पों की ओर युवा

प्रदर्शनकारियों ने सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों के प्रति गहरा असंतोष व्यक्त किया। जंतर-मंतर पर मौजूद युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप था कि देश की शिक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे सेवा के माध्यम से हटकर व्यावसायिक रूप लेती जा रही है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों का नुकसान हो रहा है। युवाओं का एक बड़ा वर्ग अब देश की पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों से इतर नए विकल्पों की ओर देख रहा है, जो उनकी वास्तविक समस्याओं जैसे- पेपर लीक, समय पर परीक्षा का आयोजन और निष्पक्ष रोजगार प्रक्रिया पर बिना किसी राजनीति के काम कर सके।

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