वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025 में इनकम टैक्स को लेकर कई बड़े ऐलान किए हैं। 1 अप्रैल 2026 से नया वित्त वर्ष (FY 2026-27) शुरू हो रहा है। ऐसे में करदाताओं (Taxpayers) के मन में इस बात को लेकर उलझन है कि पुराने और नए टैक्स सिस्टम में से उनके लिए क्या सही रहेगा।
1. क्या I-T एक्ट के बदलाव इस साल के ITR पर असर डालेंगे?
1 अप्रैल 2026 से जो भी नियम बदल रहे हैं, उनका असर आपके अभी (जुलाई 2026 में) भरे जाने वाले टैक्स रिटर्न पर नहीं पड़ेगा। ये बदलाव अगले साल (जून-जुलाई 2027) में भरे जाने वाले रिटर्न (FY 2026-27 के लिए) पर लागू होंगे।
2. मौजूदा इनकम टैक्स स्लैब (FY 2026-27)
सरकार ने नए और पुराने दोनों सिस्टम के लिए टैक्स की दरें साफ़ कर दी हैं:
पुराना टैक्स रिजीम (Old Regime)
इसमें आपको धारा 80C, 80D और HRA जैसी कटौतियों (Deductions) का फायदा मिलता है।
₹2.5 लाख तक: 0%
₹2.5 - 5 लाख: 5%
₹5 - 10 लाख: 20%
₹10 लाख से ऊपर: 30%
नया टैक्स रिजीम (New Regime)
यह डिफ़ॉल्ट सिस्टम है। इसमें टैक्स की दरें कम हैं लेकिन निवेश पर छूट नहीं मिलती।
₹4 लाख तक: 0%
₹4 - 8 लाख: 5%
₹8 - 12 लाख: 10%
₹12 - 16 लाख: 15%
₹16 - 20 लाख: 20%
₹24 लाख से ऊपर: 30%
3. क्या ₹12.75 लाख तक की सैलरी सच में टैक्स-फ्री है?
हाँ, बिल्कुल। नए टैक्स रिजीम के तहत:
सैलरी लिमिट: ₹12 लाख तक पर टैक्स लायबिलिटी शून्य हो जाती है।
स्टैंडर्ड डिडक्शन: ₹75,000 की अलग से छूट मिलती है।
कुल फायदा: अगर आपकी कुल सालाना आय ₹12.75 लाख तक है, तो सेक्शन 87A के तहत ₹60,000 की रिबेट मिलने के बाद आपको एक रुपया भी टैक्स नहीं देना होगा।
4. अगले साल (FY 2027) से होने वाले मुख्य बदलाव (Salaried Employees के लिए)
1 अप्रैल से लागू होने वाले कुछ नए नियम निम्नलिखित हैं:
कॉर्पोरेट मील कार्ड (Meal Cards): ओल्ड टैक्स रिजीम में अब ₹50 की जगह ₹200 प्रति मील तक का खाना टैक्स-फ्री होगा। इससे सालाना लगभग ₹1 लाख से ज्यादा की बचत हो सकती है।
गिफ्ट कार्ड: कंपनी से मिलने वाले गिफ्ट वाउचर या कूपन अब साल में ₹15,000 तक टैक्स-फ्री होंगे (पुराने रिजीम में)।
मेट्रो शहरों की नई लिस्ट: अब अहमदाबाद, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे को भी मेट्रो शहरों में शामिल किया गया है। इसका मतलब है कि यहाँ रहने वाले लोग अब 50% HRA छूट ले पाएंगे (पहले यह 40% थी)।
बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल: * एजुकेशन अलाउंस: ₹100 से बढ़ाकर ₹3,000 प्रति महीना (प्रति बच्चा)।
हॉस्टल अलाउंस: ₹300 से बढ़ाकर ₹9,000 प्रति महीना (प्रति बच्चा)।
ऑफिस कार का इस्तेमाल: अगर आप कंपनी की गाड़ी पर्सनल काम के लिए इस्तेमाल करते हैं, तो 1.6 लीटर तक के इंजन वाली कार पर ₹8,000 और बड़ी कार पर ₹10,000 प्रति महीना टैक्स लगेगा।
कंपनी से लोन: अगर कंपनी आपको बिना ब्याज या कम ब्याज पर लोन देती है, तो SBI की ब्याज दर और आपको मिली दर के बीच का अंतर आपकी कमाई माना जाएगा और उस पर टैक्स लगेगा। हालांकि, ₹2 लाख से कम के लोन या मेडिकल इमरजेंसी के लिए लिए गए लोन टैक्स-फ्री रहेंगे।
5. आपके लिए कौन सा बेहतर है: OLD /NEW
इसका चुनाव पूरी तरह आपकी बचत और निवेश पर निर्भर करता है:
न्यू टैक्स रिजीम चुनें यदि: आप निवेश के झंझट में नहीं पड़ना चाहते, कागजी कार्रवाई कम पसंद है और आपकी सैलरी ₹12-15 लाख के आसपास है।
P टैक्स रिजीम चुनें यदि: आप PPF, ELSS, LIC, होम लोन का ब्याज और भारी HRA क्लेम करते हैं।
CA की सलाह: एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर आपकी कुल टैक्स छूट (Deductions) ₹4 लाख से ज्यादा बनती है, तभी पुराना सिस्टम आपके लिए ज्यादा बचत वाला होगा।
6. ITR फाइलिंग की नई डेडलाइन (Budget 2026 के अनुसार)
बजट में कुछ ITR फॉर्म्स की तारीखें भी बदली गई हैं:
ITR-1 और ITR-2: 31 जुलाई (यथावत)।
ITR-3 और ITR-4 (बिना ऑडिट वाले): अब 31 अगस्त तक भरे जा सकेंगे।
टैक्स ऑडिट: इसकी आखिरी तारीख 31 अक्टूबर ही रहेगी।
नया टैक्स रिजीम अब डिफ़ॉल्ट है। अगर आप पुराने सिस्टम में रहना चाहते हैं, तो आपको आईटीआर भरते समय इसे चुनना (Option select) होगा। अपनी कंपनी (Employer) को भी समय पर सूचित करें ताकि वे सही ढंग से TDS काट सकें