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पेट्रोल-डीजल संकट: तेल कंपनियों को 1 लीटर पर ₹104 तक का घाटा, क्या भारत में बढ़ेंगे दाम?

वैश्विक युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच भारतीय तेल कंपनियों की हालत पस्त है। डीजल पर ₹104 प्रति लीटर तक के घाटे के बावजूद भारत में कीमतें स्थिर क्यों हैं? पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।
पेट्रोल-डीजल संकट: तेल कंपनियों को 1 लीटर पर ₹104 तक का घाटा, क्या भारत में बढ़ेंगे दाम?

वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमतों ने उबाल मारना शुरू कर दिया है। जहाँ दुनिया भर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं भारतीय तेल कंपनियों (OMCs) की वित्तीय स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कंपनियों को कितना हो रहा है नुकसान? (Under-Recovery)

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, वर्तमान में तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू बिक्री मूल्य के बीच के अंतर को खुद झेल रही हैं। नुकसान का गणित कुछ इस प्रकार है:

पेट्रोल पर नुकसान: लगभग ₹24 प्रति लीटर

डीजल पर नुकसान: लगभग ₹104 प्रति लीटर

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इस घाटे को तकनीकी भाषा में "अंडर-रिकवरी" कहा जाता है। कच्चा तेल (Brent Crude) जो पहले 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, अब 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुका है, जिससे उत्पादन लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है।

दिल्ली में आज के रेट (3 अप्रैल, 2026)

आज सुबह जारी किए गए रेट्स के मुताबिक, दिल्ली में ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं:

ईंधन का प्रकार रिटेल कीमत (प्रति लीटर)
साधारण पेट्रोल ₹94.77
साधारण डीजल ₹87.67
XP95 पेट्रोल ₹101.89
XG डीजल ₹91.49

दुनिया भर में कीमतों का हाल: युद्ध का असर

जहाँ भारत में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर कीमतों को स्थिर रखा है, वहीं अन्य देशों में हालात बेकाबू हैं। कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम 100% से भी ज्यादा बढ़ चुके हैं।

डीजल की कीमतों में भारी उछाल:

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म्यांमार: 119.9% की वृद्धि

लाओस: 117.5% की वृद्धि

फिलीपींस: 111.0% की वृद्धि

वियतनाम: 91.3% की वृद्धि

पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि:

लाओस: 117.5%

म्यांमार: 100.0%

ऑस्ट्रेलिया: 46.5%

क्या देश में तेल की कमी होगी?

आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि भारी घाटे के बावजूद देश में सप्लाई चेन पूरी तरह सुरक्षित है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि:

अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल का स्टॉक सुरक्षित कर लिया गया है।

देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं।

पेट्रोल, डीजल और अन्य उपोत्पादों (जैसे सल्फर) की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

भारत सरकार फिलहाल तेल कंपनियों पर पड़ रहे बोझ के जरिए आम आदमी को महंगाई के झटके से बचा रही है। हालांकि, अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह 100 डॉलर के ऊपर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में तेल कंपनियों की सेहत सुधारने के लिए कड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

Admin Desk

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