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पिंक एलीफेंट फोटोशूट विवाद रूसी फोटोग्राफर ने खुद के लिए मांगा समर्थन, सोशल मीडिया पर भड़के लोग

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रूसी कलाकार जूलिया बुरुलेवा, जिन पर एक फोटोशूट के लिए हाथी को गुलाबी रंग से रंगने का आरोप लगा था, एक बार फिर विवादों में हैं। 'चंचल' नाम की 65 वर्षीय हथिनी की मौत के बाद, बुरुलेवा ने एक 'सपोर्ट पिटीशन' (समर्थन याचिका) शुरू की है—लेकिन यह याचिका जानवर के लिए नहीं, बल्कि खुद के बचाव के लिए है।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला नवंबर 2025 में शुरू हुआ था, जब जूलिया बुरुलेवा ने अपने एक प्रोजेक्ट के लिए चंचल नाम की हथिनी को गुलाबी गुलाल से पूरी तरह रंग दिया था। इस फोटोशूट की तस्वीरें वायरल होते ही लोगों ने इसे 'एनिमल क्रुएल्टी' (जानवरों के प्रति क्रूरता) करार दिया। विवाद तब और गहरा गया जब फरवरी में खबर आई कि चंचल की मौत हो गई है।

हालांकि हाथी के मालिक सादिक खान ने दावा किया कि मौत का कारण बुढ़ापा था और इसका गुलाबी रंग से कोई संबंध नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ।

रूसी फोटोग्राफर का बचाव: "मीडिया ने फैलाई झूठ"

जूलिया बुरुलेवा ने इंस्टाग्राम पर अपनी सफाई देते हुए लिखा कि उन्हें और उनकी टीम को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा:

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"उन मीडिया संस्थानों पर शर्म आती है जो हाइप के लिए झूठे दावे फैला रहे हैं। मेरे पास सबूत हैं कि हाथी की मौत फोटोशूट के कई महीनों बाद बुढ़ापे के कारण हुई, लेकिन लोग अटकलों को सच मान रहे हैं।"

इंटरनेट पर तीखी प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया यूजर्स ने जूलिया के इस बचाव को पूरी तरह खारिज कर दिया है। लोगों का कहना है कि एक बुजुर्ग हाथी को महज फोटो और 'लाइक्स' के लिए तनाव में डालना गलत था।

एक यूजर ने लिखा: "आप किसी समर्थन की हकदार नहीं हैं। वह एक बुजुर्ग जानवर था जो अपना दर्द बयां नहीं कर सकता था। जानवर कोई खिलौना नहीं होते।"

एक अन्य टिप्पणी में कहा गया: "आपने अपनी कला के नाम पर एक बेजुबान का शोषण किया और अब आप खुद को सही ठहराने की कोशिश कर रही हैं? यह अविश्वसनीय है।"

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रूसी भाषा में भी कई यूजर्स ने उनकी आलोचना की। एक कमेंट का अनुवाद है: "आपने सिर्फ कंटेंट के लिए एक जीवित प्राणी को नष्ट कर दिया। आज एक हाथी है, कल कौन होगा? इस सब के लिए सिर्फ आप जिम्मेदार हैं।"

फिलहाल यह मामला कला बनाम नैतिकता की बहस बन चुका है। जहां फोटोग्राफर इसे अपनी कला की आजादी और बुढ़ापे की स्वाभाविक मौत बता रही हैं, वहीं पशु प्रेमियों का मानना है कि बुजुर्ग जानवरों का व्यावसायिक उपयोग किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।

Disclaimer
डिस्क्लेमर: यह लेख सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी और समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट पर आधारित है। हमारा उद्देश्य किसी भी कलाकार की छवि को धूमिल करना या किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। हम पशु अधिकारों का सम्मान करते हैं और किसी भी प्रकार की क्रूरता का समर्थन नहीं करते हैं।

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