मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बड़ा तनाव देखने को मिल रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच जुबानी जंग अब खतरनाक मोड़ लेती नजर आ रही है। ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया, तो वह पूरे मिडिल ईस्ट के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को “अपरिवर्तनीय रूप से नष्ट” (Irreversibly Destroy) कर देगा।
तेहरान की इस चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है, क्योंकि इसमें सिर्फ सैन्य ठिकानों की बात नहीं बल्कि पानी, बिजली और जरूरी सेवाओं को भी निशाना बनाने की बात कही गई है
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह विवाद तब और बढ़ गया जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंपने एक सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने Hormuz Strait (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) को 2 दिनों के भीतर पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका उसके पावर प्लांट्स को पूरी तरह “तबाह” कर देगा।
ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर ऐसा कोई कदम उठाया गया, तो उसका जवाब बहुत बड़ा और विनाशकारी होगा।
Hormuz Strait क्यों है इतना अहम
Hormuz Strait दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है।
यहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल (Crude Oil) का ट्रांसपोर्ट होता है
अगर यह रास्ता बंद होता है तो:
ग्लोबल ऑयल सप्लाई प्रभावित होगी
तेल की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी
कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा
यही वजह है कि अमेरिका इस रास्ते को खुला रखना चाहता है।
ईरान की धमकी कितनी खतरनाक?
ईरान ने साफ कहा है कि: वह सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा
बल्कि पूरे क्षेत्र के वॉटर सिस्टम, बिजली नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है
अगर ऐसा होता है तो:
लाखों लोग प्रभावित हो सकते हैं
पानी और बिजली जैसी जरूरी सेवाएं ठप हो सकती हैं
पूरे मिडिल ईस्ट में मानवीय संकट खड़ा हो सकता है
क्या युद्ध की ओर बढ़ रहा है
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच यह तनाव और बढ़ता है, तो यह एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।
पहले से ही:
ईरान और इजराइल के बीच तनाव
मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष
इन सबके बीच यह नया विवाद स्थिति को और गंभीर बना सकता है
दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
अगर यह संघर्ष बढ़ता है तो:
ग्लोबल मार्केट में उथल-पुथल
तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल
अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर
निवेशकों में डर
यानी इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा