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अचानक क्यों चर्चा में आ गए म्यांमार ओमान अमेरिका और ईरान? जानिए पूरी कहानी

अचानक क्यों चर्चा में आ गए म्यांमार ओमान अमेरिका और ईरान? जानिए पूरी कहानी

नई दिल्ली: देश और दुनिया में तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच आज कई महत्वपूर्ण घटनाएं सुर्खियों में रहीं। भारत और म्यांमार के बीच उच्चस्तरीय वार्ता, भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) का लागू होना, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता, पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल का विस्तार, जीएसटी संग्रह के ताजा आंकड़े और पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य तनाव जैसे विषय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में रहे। इन सभी घटनाओं का असर केवल राजनीति और कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इनका सीधा प्रभाव व्यापार, निवेश, रोजगार, सुरक्षा और आम नागरिकों के जीवन पर भी पड़ने वाला है।

भारत यात्रा पर म्यांमार के राष्ट्रपति रणनीतिक संबंधों को मिली नई दिशा

म्यांमार के राष्ट्रपति यू म्यिंट आंग की भारत यात्रा को दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति के बीच विस्तृत बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, सुरक्षा, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय स्थिरता सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।

विशेषज्ञों के अनुसार यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ मजबूत संबंध स्थापित कर क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना चाहता है।

म्यांमार भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत के चार पूर्वोत्तर राज्यों की सीमा म्यांमार से लगती है, इसलिए दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और सीमा प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

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पूर्वोत्तर भारत के विकास में म्यांमार की बड़ी भूमिका

भारत और म्यांमार के बीच बढ़ती साझेदारी का सबसे बड़ा लाभ पूर्वोत्तर भारत को मिलने वाला है। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों में सड़क, रेल और हवाई संपर्क के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। अब इन राज्यों को दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।

भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग परियोजना, कलादान मल्टीमोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना और सितवे पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट पूर्वोत्तर राज्यों के लिए नए आर्थिक अवसर खोल सकते हैं। इन परियोजनाओं के पूरी तरह कार्यशील होने के बाद पूर्वोत्तर भारत के उत्पाद सीधे दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों तक पहुंच सकेंगे।

इससे क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मिलेगी।

रेयर अर्थ मिनरल्स पर भारत की बड़ी रणनीति

म्यांमार दुनिया के महत्वपूर्ण रेयर अर्थ मिनरल्स उत्पादक देशों में शामिल है। आधुनिक तकनीक, सेमीकंडक्टर निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा उपकरणों के निर्माण में इन खनिजों की बड़ी भूमिका होती है।

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अब तक इस क्षेत्र में चीन का मजबूत दबदबा रहा है, लेकिन भारत वैकल्पिक स्रोत विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। म्यांमार के साथ बढ़ता सहयोग भारत को रेयर अर्थ मिनरल्स की आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है।

असम सहित पूर्वोत्तर भारत में प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित की जा रही हैं, जहां इन खनिजों का प्रसंस्करण कर उन्हें देश के औद्योगिक केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। इससे भारत की तकनीकी और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।

भारत-ओमान CEPA लागू, व्यापार और रोजगार को मिलेगा बड़ा लाभ

भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। इसे भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक उपलब्धि माना जा रहा है। इस समझौते के तहत ओमान ने भारत के लिए 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क शून्य कर दिया है।

इसका सीधा लाभ भारतीय निर्यातकों को मिलेगा। रत्न एवं आभूषण, कपड़ा उद्योग, चमड़ा, फुटवेयर, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग वस्तुएं, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर को विशेष फायदा मिलने की उम्मीद है।

भारतीय उत्पाद अब ओमान के बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। इसके अलावा समझौते का लाभ केवल वस्तु व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि सेवा क्षेत्र को भी इससे बड़ा फायदा होगा।

भारतीय पेशेवरों के लिए खुलेंगे नए अवसर

ओमान के साथ हुए समझौते से भारतीय डॉक्टरों, इंजीनियरों, तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। खाड़ी क्षेत्र में पहले से ही भारतीय पेशेवरों की बड़ी उपस्थिति है और अब यह सहयोग और अधिक मजबूत होने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी मजबूती देगा। घरेलू उद्योगों के लिए निर्यात के नए अवसर खुलेंगे जिससे उत्पादन और रोजगार दोनों में वृद्धि हो सकती है।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर दुनिया की नजर

नई दिल्ली में भारत और अमेरिका के बीच चार दिवसीय व्यापार वार्ता शुरू होने जा रही है। इस बैठक में दोनों देश प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का प्रयास करेंगे।

बाजार पहुंच, गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने, निवेश सहयोग बढ़ाने और सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाने जैसे मुद्दे वार्ता के केंद्र में रहेंगे।

यदि यह समझौता सफल रहता है तो भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिल सकते हैं। साथ ही दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को भी नई मजबूती मिलेगी।

पश्चिम बंगाल में मंत्रिमंडल विस्तार 35 मंत्रियों ने ली शपथ

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया है। कुल 35 नए मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इसके बाद राज्य मंत्रिपरिषद की कुल संख्या बढ़कर 41 हो गई है।

नए मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक अनुभव को प्राथमिकता दी गई है। उत्तर बंगाल, कोलकाता, हावड़ा, मुर्शिदाबाद और अन्य क्षेत्रों से प्रतिनिधियों को शामिल कर व्यापक राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।

महिलाओं, आदिवासी समुदायों और विभिन्न सामाजिक वर्गों को भी मंत्रिमंडल में पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है।

महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा का तोहफा

पश्चिम बंगाल सरकार ने महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण योजना की शुरुआत की है। अब राज्य की सरकारी बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा सुविधा मिलेगी।

यह योजना शहरी, उपनगरीय और लंबी दूरी की सभी सरकारी बसों में लागू होगी। सरकार का कहना है कि इस कदम से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी और सार्वजनिक परिवहन तक उनकी पहुंच आसान होगी।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मोदी सरकार के 12 वर्ष विरासत और विकास पर विशेष जोर

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अपने शासन के 12 वर्ष पूरे कर रही है। इस दौरान सरकार ने ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र पर काम करने का दावा किया है।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, ज्ञान भारतम मिशन, बौद्ध धरोहरों की वापसी और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे कई बड़े कदम उठाए गए हैं।

सरकार का कहना है कि भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

PM स्वनिधि योजना ने बदली लाखों लोगों की जिंदगी

कोविड महामारी के दौरान शुरू की गई प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना आज लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए आर्थिक संबल बन चुकी है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 75 लाख से अधिक लाभार्थियों को 1.12 करोड़ से ज्यादा ऋण दिए जा चुके हैं। कुल ऋण राशि 17,800 करोड़ रुपये से अधिक है।

योजना के माध्यम से छोटे व्यापारियों को बिना गारंटी ऋण, ब्याज सब्सिडी और डिजिटल भुगतान प्रोत्साहन जैसी सुविधाएं मिली हैं। इसी सफलता को देखते हुए योजना को मार्च 2030 तक बढ़ा दिया गया है।

GST संग्रह ने दिखाया मजबूती का संकेत

मई 2026 में देश का सकल जीएसटी संग्रह 1.94 लाख करोड़ रुपये रहा। यह पिछले वर्ष की तुलना में 3.2 प्रतिशत अधिक है।

आयात से मिलने वाले जीएसटी राजस्व में 19 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, जो भारत के बढ़ते व्यापारिक गतिविधियों का संकेत माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार जीएसटी संग्रह में लगातार मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता और कर अनुपालन में सुधार को दर्शाती है।

अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ा सैन्य तनाव

पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी ड्रोन मार गिराए जाने के बाद अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है।

इसके बाद ईरान ने भी जवाबी हमले का दावा किया है। क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।

भारत सहित कई देशों की नजर इस घटनाक्रम पर बनी हुई है क्योंकि पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र है।

निष्कर्ष

भारत के लिए आज का दिन कई महत्वपूर्ण राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक घटनाओं से भरा रहा। म्यांमार के साथ बढ़ते संबंध, ओमान के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौता, अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता, पश्चिम बंगाल की नई राजनीतिक तस्वीर, मजबूत जीएसटी संग्रह और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव जैसे विषय आने वाले समय में भी चर्चा के केंद्र में बने रहेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी आर्थिक और रणनीतिक स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। पड़ोसी देशों के साथ सहयोग, नए व्यापार समझौते, घरेलू आर्थिक सुधार और वैश्विक चुनौतियों के बीच संतुलित कूटनीति भारत को आने वाले वर्षों में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ा सकती है।

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