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कनाडा की खुफिया रिपोर्ट खालिस्तानी खतरे की चेतावनी और भारत पर भी उठे सवाल

कनाडा की खुफिया रिपोर्ट खालिस्तानी खतरे की चेतावनी और भारत पर भी उठे सवाल

2 मई 2026 कनाडा की प्रमुख खुफिया एजेंसी  कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS)  ने शुक्रवार को अपनी वार्षिक रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत की। यह रिपोर्ट एक साथ दो मोर्चों पर चर्चा छेड़ती है। एक तरफ यह कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी उग्रवाद को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा घोषित करती है, तो दूसरी तरफ इसी रिपोर्ट में भारत पर कनाडाई मामलों में हस्तक्षेप का आरोप भी लगाया गया है। यह दोहरा स्वर ही इस रिपोर्ट को असाधारण और कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील बनाता है।

खालिस्तानी उग्रवाद रिपोर्ट

CSIS की 2025 की वार्षिक आकलन रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि कनाडा में रहने वाले खालिस्तानी उग्रवादी तत्व, जिन्हें रिपोर्ट में CBKE यानी Canada-Based Khalistani Extremists कहा गया है, हिंसक अलगाववादी एजेंडे को बढ़ावा देना जारी रखे हुए हैं। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इन समूहों की गतिविधियाँ न केवल कनाडा की आंतरिक सुरक्षा के लिए, बल्कि कनाडा के अंतरराष्ट्रीय हितों के लिए भी खतरनाक हैं।

रिपोर्ट में 1985 के Air India Flight 182 बमकांड का विशेष उल्लेख किया गया है, जिसमें 329 निर्दोष यात्रियों की जान गई थी  जिनमें से अधिकांश कनाडाई नागरिक थे। CSIS ने इसे आज भी कनाडाई इतिहास का सबसे भीषण आतंकी हमला बताया और स्मरण दिलाया कि इस कांड के संदिग्ध कनाडाई खालिस्तानी नेटवर्क से ही जुड़े थे। हालाँकि एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2025 में कनाडाई भूमि पर कोई खालिस्तानी हमला नहीं हुआ, किंतु वैचारिक उभार और धन-संग्रह की गतिविधियाँ जारी हैं।

उल्लेखनीय है कि यह लगातार दूसरी बार है जब CSIS ने इतनी कड़ी भाषा में खालिस्तानी खतरे को रेखांकित किया है। इससे पहले जून 2025 में भी एजेंसी ने कहा था कि खालिस्तानी उग्रवादी कनाडाई भूमि का उपयोग भारत के विरुद्ध प्रचार, धन-संग्रह और हिंसा की योजना बनाने के लिए कर रहे हैं।

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फंडिंग का जाल  वित्त मंत्रालय का खुलासा

CSIS की रिपोर्ट के समानांतर, कनाडा के वित्त मंत्रालय ने भी अपनी 2025 Assessment of Money Laundering and Terrorist Financing Risks रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। इस रिपोर्ट में आधिकारिक रूप से माना गया है कि Babbar Khalsa International और International Sikh Youth Federation  जो कनाडाई कानून के तहत आतंकी संगठन घोषित हैं  को कनाडा के भीतर से ही आर्थिक सहायता मिल रही है। यह धन-संग्रह अब बड़े केंद्रीकृत नेटवर्क की बजाय छोटे-छोटे व्यक्तिगत समूहों के माध्यम से हो रहा है, जो इसे पकड़ना और भी कठिन बनाता है।

नया कानून  Bill C-9 और उसकी सीमाएँ

मार्च 2026 में कनाडा की संसद ने Combatting Hate Act यानी Bill C-9 को 186 बनाम 137 मतों से पारित किया। यह कानून मुख्य रूप से खालिस्तानी उग्रवाद की सार्वजनिक अभिव्यक्तियों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से बनाया गया है। इसके तहत किसी सूचीबद्ध आतंकी संगठन के झंडे या प्रतीक चिन्ह को नफरत फैलाने के इरादे से सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करना दंडनीय अपराध होगा। धार्मिक स्थलों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास विरोध-प्रदर्शन पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।

भारतीय-कनाडाई समुदाय ने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। परंतु विधि विशेषज्ञों का कहना है कि यह कानून अभी Senate में लंबित है, और कनाडा में खालिस्तान समर्थकों का राजनीतिक प्रभाव इसके क्रियान्वयन को चुनौतीपूर्ण बना सकता है।

रिपोर्ट का दूसरा पहलू  भारत पर आरोप

यहीं से यह रिपोर्ट एक तीखी कूटनीतिक जटिलता उत्पन्न करती है। CSIS ने अपनी इसी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि भारत ने ऐतिहासिक रूप से कनाडाई राजनेताओं, पत्रकारों और भारतीय मूल के नागरिकों के साथ गुप्त संबंध बनाए हैं, ताकि कनाडा के आंतरिक मामलों में अपने हित साध सके। रिपोर्ट में इसे "Transnational Repression" का नाम दिया गया है  अर्थात कनाडा में रहने वाले खालिस्तान समर्थकों की निगरानी करना और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश करना। रिपोर्ट में भारत के साथ चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान पर भी कनाडाई मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया गया है।

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भारत सरकार ने अभी तक इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष RCMP आयुक्त Mike Duheme ने कहा था कि कनाडाई भूमि पर किसी भी हिंसा में भारत की वर्तमान संलिप्तता के प्रमाण नहीं मिले हैं जो इस रिपोर्ट के निष्कर्षों से मेल नहीं खाता।

भारत-कनाडा संबंध  पुनर्निर्माण की राह

2023 में तत्कालीन प्रधानमंत्री Justin Trudeau के हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड में भारत पर लगाए गए आरोपों के बाद दोनों देशों के संबंध अपने निम्नतम स्तर पर पहुँच गए थे। भारत ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज किया था। अनेक महीनों की कूटनीतिक शीतलता के बाद Mark Carney के प्रधानमंत्री बनने के पश्चात संबंधों में उल्लेखनीय सुधार आया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने कनाडाई समकक्ष Nathalie Drouin के साथ बैठक में खालिस्तानी फंडिंग को काटने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी Carney के साथ मुलाकात में आतंकवाद और उग्रवाद के विरुद्ध ठोस कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया था।

CSIS की यह रिपोर्ट एक साथ दो संदेश देती है पहला, कि कनाडा अब खालिस्तानी उग्रवाद को अपने लिए भी खतरा मानने लगा है, जो भारत की वर्षों पुरानी माँग की स्वीकृति है। दूसरा, कि इसी रिपोर्ट में भारत पर Transnational Repression के आरोप लगाकर कनाडाई खुफिया तंत्र ने यह संकेत दिया है कि ओटावा पूरी तरह से नई दिल्ली के रुख के साथ नहीं है। यह दोहरापन आने वाले समय में भारत-कनाडा संबंधों की जटिलता को और गहरा कर सकता है। नया कानून बेहतर कूटनीतिक संवाद और CSIS की स्वीकृति  ये सब सकारात्मक संकेत हैं, परंतु पूर्ण सामान्यीकरण की राह अभी लंबी है।

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