कैंसर का इलाज जितना जरूरी है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी होता है। कीमोथेरेपी (Chemotherapy) कई मरीजों की जिंदगी बचाती है, लेकिन इसके साथ कुछ साइड इफेक्ट्स भी जुड़े होते हैं। इन्हीं में से एक है “कीमो ब्रेन” या दिमागी कमजोरी। अब एक नई स्टडी में सामने आया है कि नियमित एक्सरसाइज और कम मात्रा में ली जाने वाली दर्द निवारक दवा इबुप्रोफेन (Ibuprofen) इस समस्या को कम करने में मदद कर सकती है।
यह रिसर्च अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के प्रतिष्ठित जर्नल CANCER में प्रकाशित हुई है और इसके नतीजे कैंसर मरीजों के लिए उम्मीद की किरण माने जा रहे हैं।
क्या होता है कीमो ब्रेन ? (Chemo Brain Explained)
कीमोथेरेपी के दौरान या उसके बाद कई मरीजों को दिमाग से जुड़ी समस्याएं महसूस होती हैं। मेडिकल भाषा में इसे Cancer-Related Cognitive Impairment (CRCI) कहा जाता है, लेकिन आम तौर पर लोग इसे “कीमो ब्रेन” के नाम से जानते हैं।
इस स्थिति में मरीजों को:
• ध्यान लगाने में कठिनाई
• बार-बार चीजें भूलना
• एक साथ कई काम करने में परेशानी
• सोचने और निर्णय लेने में धीमापन
• जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
कुछ मामलों में यह समस्या कुछ महीनों में ठीक हो जाती है, लेकिन कई मरीजों में यह सालों तक बनी रह सकती है। इससे उनके काम, निजी जीवन और आत्मविश्वास पर भी असर पड़ता है।
क्यों होता है कीमो ब्रेन ?
विशेषज्ञों के अनुसार, कीमोथेरेपी शरीर में सूजन (Inflammation) को बढ़ा देती है, जिसका असर दिमाग पर भी पड़ता है। यह सूजन न्यूरॉन्स (brain cells) के काम को प्रभावित करती है, जिससे याददाश्त और ध्यान की क्षमता कमजोर हो जाती है।
• हार्मोनल बदलाव
• थकान और नींद की कमी
• तनाव और मानसिक दबाव
• इस समस्या को और बढ़ा सकते हैं।
स्टडी कैसे की गई ? (Study Overview)
इस रिसर्च का नेतृत्व यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर की वैज्ञानिक मिशेल सी. जनेल्सिन्स ने किया। स्टडी में कुल 86 कैंसर मरीजों को शामिल किया गया, जो कीमोथेरेपी के दौरान दिमागी समस्याओं का अनुभव कर रहे थे।
मरीजों को 6 हफ्तों के लिए चार अलग-अलग ग्रुप्स में बांटा गया:
• एक्सरसाइज + इबुप्रोफेन
• एक्सरसाइज + प्लेसीबो
•सिर्फ इबुप्रोफेन
• सिर्फ प्लेसीबो
• एक्सरसाइज प्रोग्राम (EXCAP)
EXCAP एक आसान और घर पर किया जाने वाला वर्कआउट प्रोग्राम था, जिसमें शामिल थे:
• हल्की से मध्यम वॉकिंग
• हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (जैसे बॉडीवेट एक्सरसाइज)
• इबुप्रोफेन डोज
• मरीजों को कम मात्रा में इबुप्रोफेन (लगभग 200 mg दिन में तीन बार) दी गई।
मरीजों की दिमागी क्षमता को मापने के लिए वैज्ञानिकों ने
Trail Making Test (ध्यान और प्रोसेसिंग स्पीड के लिए)
• मेमोरी टेस्ट
• मरीजों और उनके परिवार की रिपोर्ट का इस्तेमाल किया।
•क्या निकले स्टडी के नतीजे? (Key Findings)
1. एक्सरसाइज का सबसे ज्यादा असर
जो मरीज एक्सरसाइज कर रहे थे, उनकी ध्यान देने की क्षमता में स्पष्ट सुधार देखा गया। वे मानसिक टेस्ट तेजी से और बेहतर तरीके से पूरा कर पा रहे थे।
2. इबुप्रोफेन से भी मिला फायदा
सिर्फ इबुप्रोफेन लेने वाले मरीजों में भी कुछ सुधार देखा गया, लेकिन इसका असर एक्सरसाइज जितना मजबूत नहीं था।
3. रोजमर्रा की जिंदगी में सुधार
EXCAP (एक्सरसाइज) करने वाले मरीजों के बारे में उनके परिवार और दोस्तों ने भी कहा कि उनकी भूलने और ध्यान की समस्या कम हो गई है। यानी इसका असर सिर्फ टेस्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि असल जिंदगी में भी दिखा।
4. मेमोरी पर मिला मिश्रित परिणाम
इबुप्रोफेन लेने वाले कुछ मरीजों में शॉर्ट-टर्म मेमोरी में कम सुधार देखा गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि हर दिमागी क्षमता पर इसका समान असर नहीं होता।
5. कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं
स्टडी के दौरान किसी भी मरीज में कोई गंभीर साइड इफेक्ट सामने नहीं आया, जो इसे और सुरक्षित विकल्प बनाता है।
एक्सरसाइज और इबुप्रोफेन कैसे काम करते हैं ?
• एक्सरसाइज के फायदे
• शरीर में सूजन को कम करती है
• दिमाग में ब्लड फ्लो बढ़ाती है
• नई ब्रेन सेल्स के विकास को बढ़ावा देती है
• मानसिक थकान और तनाव को कम करती है
इबुप्रोफेन के फायदे
यह एक NSAID (Non-Steroidal Anti-Inflammatory Drug) है
• सूजन पैदा करने वाले केमिकल्स को ब्लॉक करती है
• दिमाग पर सूजन के प्रभाव को कम करने में मदद करती है
हालांकि, स्टडी में दोनों को एक साथ लेने से कोई खास अतिरिक्त फायदा नहीं दिखा, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि लंबे समय की स्टडी में इसके बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं।
एक्सपर्ट की राय
स्टडी की लीड रिसर्चर मिशेल सी. जनेल्सिन्स ने कहा:
“हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि एक्सरसाइज और इबुप्रोफेन दोनों कुछ दिमागी क्षमताओं को सुधारने में मदद कर सकते हैं। हालांकि एक्सरसाइज का प्रभाव ज्यादा स्पष्ट और लगातार देखने को मिला है। यह कैंसर मरीजों के लिए एक सुरक्षित और फायदेमंद विकल्प हो सकता है।”
क्या यह इलाज के रूप में अपनाया जा सकता है ?
अभी यह स्टडी शुरुआती (Phase II) स्तर की है, इसलिए इसे सीधे इलाज के रूप में अपनाने से पहले और बड़े स्तर पर रिसर्च की जरूरत है।
नियमित हल्की एक्सरसाइज कैंसर मरीजों के लिए सुरक्षित और फायदेमंद हो सकती है
किसी भी दवा (जैसे इबुप्रोफेन) का उपयोग डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए
कीमोथेरेपी के दौरान होने वाली दिमागी समस्याएं मरीजों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं। लेकिन इस नई रिसर्च से यह उम्मीद जगी है कि साधारण उपाय जैसे एक्सरसाइज इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
इबुप्रोफेन भी कुछ हद तक मददगार साबित हो सकता है, लेकिन एक्सरसाइज का असर ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद दिखा है।
आने वाले समय में अगर बड़े स्तर पर और रिसर्च होती है, तो यह तरीका कैंसर मरीजों की लाइफ क्वालिटी सुधारने में अहम भूमिका निभा सकता है।
NOTE: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी दवा या उपचार को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।