वैश्विक संदर्भ में देखें तो भारत उन देशों में शामिल है जहाँ 2025-26 में सबसे ज़्यादा मामले दर्ज हुए विशेषज्ञ कह रहे हैं कि 2026 का उन्मूलन लक्ष्य अब कड़ी चुनौती बन चुका है
चेन्नई में छिटपुट मामले पर खतरे को कम न आंकें
चेन्नई में इन दिनों खसरे (Measles) के छिटपुट मामले सामने आ रहे हैं खासकर छोटे बच्चों और किशोरों में। भले ही तमिलनाडु के सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं निवारक चिकित्सा निदेशालय ने यह स्पष्ट किया है कि पिछले वर्ष की तुलना में मामलों में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन डॉक्टरों की चेतावनी गंभीर है एक भी खुराक छूटी, तो बच्चा संक्रमण की चपेट में आ सकता है।
राज्य की टीकाकरण कवरेज 99 प्रतिशत बताई जा रही है और मीज़ल्स-रूबेला (MR) वैक्सीन जो नौ महीने और 18 महीने की उम्र में दी जाती है लगभग 85 प्रतिशत प्रभावशीलता प्रदान करती है। लेकिन यही 15 प्रतिशत 'गैप' असली चिंता की जड़ है।
गर्मी का मौसम खसरे का पीक सीज़न
SRM प्राइम हॉस्पिटल के जनरल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. प्रवीण कुमार के अनुसार, हम फिलहाल गर्मी के मौसम में खसरे के मामले देख रहे हैं, जो इस बीमारी का पीक पीरियड होता है। आंशिक टीकाकरण वाले बच्चे संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर बीमार पड़ सकते हैं।
Apollo Cradle Karapakkam की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विग्नेश्वरी राजा ने चेतावनी दी अभी मामले कम हैं, लेकिन जैसे-जैसे गर्मी का असली पीक आएगा, आंकड़े बदल सकते हैं।
भारत की तस्वीर WHO डेटा जो डराता है
चेन्नई की यह स्थानीय खबर दरअसल एक बड़े वैश्विक संकट की झलक है।
अगस्त 2025 से जनवरी 2026 के बीच, उत्तरी अमेरिका को छोड़कर सबसे ज़्यादा खसरे के मामले भारत में दर्ज किए गए कुल 12,135 मामले। इसके बाद अंगोला (11,941) और इंडोनेशिया (8,892) का नंबर था।
नई इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन के अनुसार, खसरे का प्राथमिक प्रजनन दर (R0) 12 से 18 के बीच है यानी एक संक्रमित व्यक्ति औसतन 12 से 18 लोगों को बीमार कर सकता है। 2024 में वैश्विक स्तर पर 3,95,521 प्रयोगशाला-पुष्ट मामले दर्ज हुए।
वैश्विक स्तर पर खसरे से होने वाली मौतों में 2000 के बाद से 88 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे करीब 5.9 करोड़ जीवन बचाए जा सके। फिर भी 2024 में अकेले खसरे से लगभग 95,000 लोगों मुख्यत पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मौत हुई।
भारत का 2026 लक्ष्य उन्मूलन पर राह आसान नहीं
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने विश्व टीकाकरण सप्ताह (24-30 अप्रैल) के दौरान 'नेशनल ज़ीरो मीज़ल्स-रूबेला एलिमिनेशन कैंपेन 2025-26' की शुरुआत की। HMIS 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में MR वैक्सीन की पहली खुराक की कवरेज 93.7% और दूसरी खुराक की 92.2% है।
जनवरी से मार्च 2025 के बीच 332 जिलों में खसरे का एक भी मामला नहीं आया और 487 जिलों में रूबेला का कोई मामला नहीं आया। यह उत्साहजनक है, लेकिन उन्मूलन के लिए हर जिले में 95% कवरेज अनिवार्य है और यह अंतर अभी बाकी है।
शोध के अनुसार, भारत में अभी भी 11.5 प्रतिशत बच्चों को खसरे की एक भी खुराक नहीं मिली है। पूर्वोत्तर राज्यों में यह समस्या सबसे गंभीर है, जबकि तमिलनाडु में 'ज़ीरो-डोज़' बच्चों की संख्या महज 4.6 प्रतिशत है जो राज्य की मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था की गवाही देता है।
मध्यप्रदेश की चेतावनी जब गांव में 41 बच्चे एक साथ बीमार पड़े
मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के टिकरी गांव में जनवरी-फरवरी 2026 के दौरान 41 बच्चों में खसरे की पुष्टि हुई। ग्वालियर और मुरैना दोनों जिलों में 2026 की पहली तिमाही में 2025 की तुलना में खसरे के मामले तेज़ी से बढ़े। WHO और स्वास्थ्य टीमों की तत्काल प्रतिक्रिया से मार्च 2026 तक दोनों जिलों में मामले एक-एक तक सीमित हो गए। (WHO) यह घटना बताती है कि निगरानी कमज़ोर पड़ी तो एक गांव भी राष्ट्रीय लक्ष्य को चुनौती दे सकता है।
वैश्विक खतरा फंडिंग कट से बढ़ी मुश्किल
नवंबर 2025 में कनाडा ने अपना खसरा उन्मूलन दर्जा खो दिया। जनवरी 2026 में WHO ने पुष्टि की कि आर्मेनिया, ऑस्ट्रिया, अज़रबैजान, स्पेन, यूनाइटेड किंगडम और उज़्बेकिस्तान छह देशों का उन्मूलन दर्जा समाप्त हो गया। WHO के ग्लोबल मीज़ल्स एंड रूबेला लेबोरेटरी नेटवर्क को 2026 के लिए अपनी वार्षिक फंडिंग का केवल 15 प्रतिशत ही मिल पाया।
इस परिदृश्य में भारत के लिए आत्मनिर्भर टीकाकरण बुनियादी ढांचे की ज़रूरत और भी अहम हो जाती है।
लक्षण बचाव और सावधानियां
खसरा सांस की बूंदों (respiratory droplets) से फैलता है। बुखार, चकत्ते (rash), खांसी, बहती नाक और आंखें लाल होना ये शुरुआती संकेत हैं। निमोनिया और कान का संक्रमण प्रमुख जटिलताएं हैं।
डॉक्टरों की सलाह:
MMR वैक्सीन की सभी खुराकें समय पर लें 15 महीने फिर 4-6 साल में बूस्टर
• संक्रमित बच्चे को घर पर अलग रखें
• शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से मिलें
• बुखार उतरने के बाद भी आराम, पानी और पोषण जारी रखें
चेन्नई की स्थिति अभी नियंत्रण में है 99% कवरेज और सतर्क स्वास्थ्य तंत्र इसके कारण हैं। लेकिन यह निश्चिंतता का समय नहीं है। भारत का 2026 उन्मूलन लक्ष्य तभी पूरा होगा जब हर बच्चे को दोनों खुराकें मिलें चाहे वह चेन्नई का शहरी बच्चा हो या मुरैना के टिकरी गांव का। वैश्विक अनुभव बता रहा है कि एक ढीली कड़ी पूरी chain तोड़ देती है।