दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के बड़े हिस्से में भीषण गर्मी ने दस्तक दे दी है। शनिवार, 25 अप्रैल 2026 को दिल्ली में इस साल का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, जहां पारा 42.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 'येलो अलर्ट' जारी किया है। यह न केवल तापमान में बढ़ोतरी है, बल्कि आने वाले दिनों में हीटवेव (लू) के और खतरनाक होने का संकेत भी है।
दिल्ली में गर्मी के टूटे रिकॉर्ड
राजधानी के बेस स्टेशन सफदरजंग में शनिवार को तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर दर्ज किया गया। यह 2022 के बाद अप्रैल के महीने में दर्ज किया गया सबसे अधिक तापमान है। शहर के कुछ हिस्सों, जैसे मुंगेशपुर और नजफगढ़ में पारा 44 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर गया है। उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाओं और आसमान साफ रहने के कारण धूप की तपिश सीधे जमीन तक पहुंच रही है, जिससे 'अर्बन हीट आइलैंड' जैसा प्रभाव महसूस हो रहा है।
मौसम विभाग का येलो अलर्ट
IMD ने दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इसका मतलब है कि मौसम की स्थिति खराब है और यह और बिगड़ सकती है। अगले 3-4 दिनों तक लू (Heatwave) चलने की संभावना है। हालांकि, 27 अप्रैल के बाद पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से हल्की राहत की उम्मीद जताई गई है, लेकिन तब तक लू का सितम जारी रहेगा।
दिल्ली सरकार का हीटवेव एक्शन प्लान 2026
बढ़ते तापमान को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 'हीटवेव एक्शन प्लान 2026' की समीक्षा की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य हीट स्ट्रेस को कम करना और जनहानि को रोकना है। सरकार ने पिछले साल की कमियों को दूर करते हुए इस बार जमीनी स्तर पर काम करने का दावा किया है। इसके तहत सभी जिला अधिकारियों को पेयजल और छाया की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
आम जनता पर क्या होगा असर ?
इस भीषण गर्मी का सबसे सीधा असर आम आदमी की जेब और सेहत पर पड़ रहा है।
स्वास्थ्य जोखिम: लू के कारण हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और थकान की समस्या बढ़ गई है। बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से घातक है।
बिजली की बढ़ती मांग: दिल्ली में एसी और कूलर के अत्यधिक उपयोग के कारण बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जिससे कुछ इलाकों में लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या हो सकती है।
महंगाई का झटका: अत्यधिक गर्मी के कारण हरी सब्जियों की फसल प्रभावित हो रही है, जिससे मंडियों में आवक कम होने से कीमतों में उछाल आने की आशंका है।
अस्पतालों और स्कूलों के लिए विशेष निर्देश
दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में हीटस्ट्रोक के मरीजों के लिए विशेष 'कूल रूम' तैयार किए गए हैं। एम्बुलेंस को स्टैंडबाय पर रखा गया है और पर्याप्त मात्रा में ओआरएस (ORS) और आईवी फ्लूइड का स्टॉक सुनिश्चित किया गया है। स्कूलों में बच्चों के लिए 'वॉटर बेल' (Water Bell) सिस्टम लागू करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि छात्र हर निश्चित अंतराल पर पानी पी सकें। निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों के लिए दोपहर 12 से 4 बजे के बीच काम के घंटों में बदलाव की सलाह दी गई है।
बिजली की रिकॉर्ड मांग और ऊर्जा संकट
गर्मी के साथ ही देश में ऊर्जा की खपत ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। शुक्रवार को भारत की पीक पावर डिमांड 252.07 गीगावाट (GW) तक पहुंच गई, जो पिछले साल मई में दर्ज 250 GW से अधिक है। यह दर्शाता है कि बढ़ते तापमान के कारण ग्रिड पर दबाव बढ़ रहा है। पावर मिनिस्ट्री स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह के बड़े ब्लैकआउट से बचा जा सके।
केरल में UV रेडिएशन का खतरा
उत्तर भारत जहां लू से जूझ रहा है, वहीं दक्षिण भारत के केरल में अल्ट्रावॉयलेट (UV) रेडिएशन का खतरा बढ़ गया है। राज्य के कई हिस्सों में UV इंडेक्स 8 से ऊपर चला गया है, जिसके लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है। उच्च UV लेवल त्वचा के कैंसर और आंखों की बीमारियों का कारण बन सकता है। वहां के प्रशासन ने लोगों को सुबह 10 से दोपहर 3 बजे के बीच सीधे धूप में निकलने से बचने की सलाह दी है।
क्या करें और क्या न करें जरूरी सुझाव
पानी का अधिक सेवन: प्यास न लगने पर भी नियमित रूप से पानी पीते रहें। छाछ, लस्सी और ओआरएस का उपयोग करें।
सही कपड़ों का चुनाव: हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनें। बाहर निकलते समय सिर को टोपी या तौलिए से ढकें।
दोपहर में बाहर निकलने से बचें: बहुत जरूरी न हो तो दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच धूप में न जाएं।
भोजन का ध्यान: हल्का भोजन करें और बासी खाने से बचें। तरबूज, खीरा और ककड़ी जैसे फल खाएं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर भारत में इस बार गर्मी समय से पहले और अधिक तीव्रता के साथ आई है। हालांकि अप्रैल के अंत में पहाड़ों पर होने वाली बर्फबारी और बारिश से मैदानी इलाकों में तापमान 2-3 डिग्री गिर सकता है, लेकिन मई और जून के महीने और भी कठिन होने वाले हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण अब लू के दिनों की संख्या हर साल बढ़ रही है, जो भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती है।